भारत-चेक गणराज्य के बीच रक्षा समझौता, 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' को मिलेगा नया बल

दोनों पक्षों ने मौजूदा संयुक्त उपक्रमों का स्वागत किया और संयुक्त रक्षा समिति के माध्यम से संबंधों का विस्तार करने पर सहमति जताई। पाँच वर्षों के अंतराल के बाद पिछले वर्ष इस समिति की बैठक फिर से हुई थी।

 
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भारत-चेक गणराज्य के बीच रक्षा समझौता, 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' को मिलेगा नया बल | Image: Republic

भारत और चेक गणराज्य ने रक्षा औद्योगिक सहयोग का विस्तार करने पर सहमति जताई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और चेक गणराज्य के प्रथम उपप्रधानमंत्री तथा उद्योग एवं व्यापार मंत्री कारेल हवलिचेक के बीच द्विपक्षीय वार्ता के बाद रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि नई दिल्ली में हुई बैठक में दोनों नेताओं ने रक्षा औद्योगिक सहयोग के “समस्त आयामों” की समीक्षा की। दोनों पक्षों ने जारी सहयोग और विभिन्न संयुक्त उपक्रमों की स्थापना का स्वागत किया। साथ ही, रक्षा विनिर्माण में सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहलों को बढ़ावा देने के लिए भारत-चेक संयुक्त रक्षा समिति (जेडीसी) सहित विभिन्न माध्यमों से सहयोग का और विस्तार करने पर सहमति जताई।

बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने शांति और सुरक्षा से जुड़े मौजूदा मुद्दों पर भी चर्चा की तथा क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए अधिक सहयोग की आवश्यकता स्वीकार की। उन्होंने दोहराया कि यह साझेदारी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों और परस्पर विश्वास व सम्मान के साझा मूल्यों पर आधारित है।

हवलिचेक भारत की चार दिवसीय यात्रा पर हैं। इस दौरान वे विभिन्न मंत्रालयों के अधिकारियों के साथ-साथ व्यापार एवं कारोबारी प्रतिनिधियों से मुलाकात कर रहे हैं। उनका बेंगलुरु और मुंबई में औद्योगिक इकाइयों का दौरा करने का भी कार्यक्रम है।

यह ताजा द्विपक्षीय वार्ता अक्टूबर 2025 में प्राग में हुई जेडीसी की बैठक के एक वर्ष बाद हुई है। उस बैठक में भारतीय पक्ष का नेतृत्व महानिदेशक (अधिग्रहण) ए. अनबरसु ने किया था। तब संयुक्त उत्पादन, अनुसंधान एवं विकास, प्रौद्योगिकी साझा करने और क्षमता निर्माण पर चर्चा केंद्रित रही थी। फरवरी 2020 के बाद यह जेडीसी की पहली बैठक थी।

उद्योग स्तर पर भी संबंधों में तेजी आई है। अगस्त में विजयन त्रिशूल डिफेंस सॉल्यूशंस (वीटीडीएस) ने चेक एसटीवी समूह की सहयोगी कंपनी डीईयूएस ऑटोमेशन के साथ प्रौद्योगिकी साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। वीटीडीएस के पास छोटे हथियार और गोला-बारूद बनाने का गृह मंत्रालय का लाइसेंस है। इस समझौते के तहत चेक कंपनी भारत में छोटे कैलिबर के गोला-बारूद के उत्पादन के लिए प्रौद्योगिकी उपलब्ध कराएगी।

चेक अधिकारियों ने सोवियत मूल की हथियार प्रणालियों के साथ अपने उद्योग के अनुभव को सहयोग के आधार के रूप में प्रस्तुत किया है। दोनों देश इन हथियार प्रणालियों का इस्तेमाल करते रहे हैं। यह पहल ऐसे समय में हो रही है, जब भारत रूस पर निर्भरता कम करने के लिए रक्षा उपकरणों की खरीद के स्रोतों में विविधता ला रहा है।

भारत में चेक सैन्य उपकरणों का लंबा इतिहास रहा है। सेना के लिए हर तरह के भूभाग पर चलने वाले टाट्रा ट्रकों की खरीद का पहला अनुबंध 1986 में चेकोस्लोवाकिया के साथ हुआ था। इसके बाद बीईएमएल ने अगले 26 वर्षों में लगभग 7,000 ऐसे ट्रकों को असेंबल कर उनकी आपूर्ति की। हालांकि, बाद में यह व्यवस्था सीबीआई जांच के दायरे में आ गई थी।

द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने की यह पहल भारत और यूरोप के बीच मजबूत होते रक्षा संबंधों के बीच भी सामने आई है। जनवरी में भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन के इतर भारत और यूरोपीय संघ ने सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और आतंकवाद से मुकाबले जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इसके साथ ही लंबे समय से चल रही मुक्त व्यापार समझौते की वार्ताएं भी संपन्न हुई थीं। फरवरी में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में चेक उपप्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री पेत्र माचिंका से मुलाकात की थी, जहां दोनों ने आर्थिक और रक्षा सहयोग पर चर्चा की थी।

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Published By : Aarya Pandey

पब्लिश्ड 16 October 2026 at 22:33 IST