भारत के सबसे बड़े न्यूक्लियर पावर प्लांट के डेटा में सेंधमारी, 19000 फाइलें डार्व वेब पर लीक, इस कंपनी ने सरकार को दी जानकारी

कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट (KNPP) से 19,000 फाइलें डार्क वेब पर लीक हो गई हैं। रैंसमवेयर ग्रुप वर्ल्ड लीक्स ने इन्हें रिलायंस ग्रुप से चुराया बताया। फाइलों में यूनिट 3-4 के वेंटिलेशन, कूलिंग सिस्टम ब्लूप्रिंट और सप्लायर डिटेल्स हैं। रिएक्टर कोर प्रभावित नहीं हुआ है।

 
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न्यूक्लियर पावर प्लांट के डेटा में सेंधमारी | Image: X

भारत के सबसे बड़े न्यूक्लियर पावर प्लांट का डेटा लीक हो गया है। तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले में स्थित कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट (KNPP) से जुड़े संवेदनशील डेटा की चोरी हो गई है। न्यूक्लियर पावर प्लांट से जुड़ी करीब 19,000 संवेदनशील फाइलें डार्क वेब पर लीक हो गई हैं।

रैंसमवेयर ग्रुप वर्ल्ड लीक्स ने इन फाइलों को अनिल अंबानी की रिलायंस ग्रुप से चुराई हुई बताया है। ये फाइलें कुल 8,58,000 रिलायंस फाइलों के कैश का हिस्सा हैं, जिनमें से ये सबसे संवेदनशील मानी जा रही हैं।

लीक हुई फाइलों में यूनिट 3 और 4 के वेंटिलेशन और कूलिंग सिस्टम के कथित ब्लूप्रिंट और सप्लायरों की पूरी डिटेल हैं। ये दस्तावेज 2016 से मध्य 2025 तक के हैं। महत्वपूर्ण बात ये है कि इस डेटा लीक में न्यूक्लियर रिएक्टर के कोर सिस्टम शामिल नहीं हैं। ये सिस्टम रूस की रोसाटॉम कंपनी द्वारा सप्लाई किए जाते हैं। लीक हुई फाइलें मुख्य रूप से प्लांट के सपोर्ट सिस्टम, इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रशासनिक दस्तावेजों से जुड़ी हैं।

क्या लीक हुआ?

लीक हुई फाइलें कुल 858,000 फाइलों का हिस्सा हैं, जिनमें से सबसे संवेदनशील 19,000 फाइलें सार्वजनिक रूप से डार्क वेब पर डाल दी गईं। इन फाइलों में शामिल हैं

  • यूनिट 3 और यूनिट 4 के वेंटिलेशन और कूलिंग सिस्टम के ब्लूप्रिंट्स
  • कॉमन कंट्रोल रूम का पूरा फ्लोर लेआउट
  • सप्लायरों और वेंडर्स की पूरी डिटेल्स
  • मीटिंग और इंस्पेक्शन रिकॉर्ड्स
  • 2024 के जॉइंट इंस्पेक्शन के फोटोग्राफ्स सहित उपकरणों की समीक्षा
  • इंश्योरेंस पॉलिसीज, जिसमें यूनिट 3 या 4 पर आतंकवादी हमले की स्थिति में 112 मिलियन डॉलर (लगभग 950 करोड़ रुपये) का कवरेज शामिल है

ब्रीच कैसे हुआ?

यह डेटा ब्रीच Yotta नामक भारतीय तीसरे पक्ष के डेटा सेंटर कंपनी के सर्वर पर हुआ। Reliance Infrastructure का यह डेटा उसी सर्वर पर होस्टेड था।

29 मई 2026 को सर्वर पर संदिग्ध गतिविधि देखी गई। Yotta ने तुरंत इसे रोक दिया, जिससे Ransomware को पूरी तरह चलने से रोका जा सका। जून के अंत में Reliance Infrastructure ने Yotta को बाहरी खतरे वाले डेटा ब्रीच के दावे के बारे में जानकारी दी गई। Yotta ने अपनी तकनीकी जांच Reliance के साथ साझा की, लेकिन दावे की पुष्टि नहीं कर पाई।

Reliance Group ने की पुष्टि

अनिल अंबानी समूह की कंपनी Reliance Infrastructure  ने आधिकारिक तौर पर आंशिक डेटा ब्रीच की पुष्टि की है। कंपनी ने बयान दिया कि सरकार को इसकी जानकारी दे दी गई है।

Reliance Infrastructure को 2018 में कुदनकुलम के यूनिट 3 और यूनिट 4 के इंफ्रास्ट्रक्चर डिजाइन और निर्माण का ठेका मिला था। ये यूनिट अभी निर्माणाधीन हैं और 2027 तक चालू होने की उम्मीद है। दोनों यूनिट मिलकर 2,000 मेगावाट बिजली उत्पादन करेंगी।

यह दूसरी साइबर घटना

कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट इससे पहले भी एक साइबर हमला झेल चुका है। 2019 में उत्तर कोरियाई हैकर ग्रुप से जुड़ा मैलवेयर प्लांट के नेटवर्क पर पाया गया था। हालांकि, NPCIL ने तब कहा था कि प्लांट के मुख्य सिस्टम प्रभावित नहीं हुए थे और तुरंत जांच की गई थी।

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Published By : Sagar Singh

पब्लिश्ड 15 July 2026 at 18:07 IST