दिल्‍ली में प्रदर्शन से अबतक 3000 करोड़ का नुकसान, CTI ने जताई चिंता, बोली- दीवाली तक जारी रहा प्रोटेस्‍ट तो 10000 करोड़ रुपए के पार जाएगा आंकड़ा

दिल्ली में लगातार चल रहे धरना प्रदर्शन की वजह से व्यापारियों को अब तक 3000 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। इतना ही नहीं, अगर दिल्ली में जारी धरना प्रदर्शन दीपावली तक जारी रहे तो ये नुकसान 10,000 करोड़ रुपये के आंकड़े को भी पार कर सकता है।

 
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दिल्‍ली में धरना प्रदर्शन से अबतक 3000 करोड़ का नुकसान, CTI ने जताई चिंता, कहा- अगर दीवाली तक जारी रहा प्रोटेस्‍ट तो 10000 करोड़ रुपए के पार जाएगा आंकड़ा | Image: X

दिल्ली में लगातार चल रहे धरना प्रदर्शन की वजह से व्यापारियों को अब तक 3000 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। इतना ही नहीं, अगर दिल्ली में जारी धरना प्रदर्शन दीपावली तक जारी रहे तो ये नुकसान 10,000 करोड़ रुपये के आंकड़े को भी पार कर सकता है। दिल्ली और देश में व्यापारियों और उद्यमियों के संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के चेयरमैन बृजेश गोयल ने शनिवार को ये बातें बताईं।

CTI के मुताबिक, व्यापारियों को यह भारी वित्तीय नुकसान दो मुख्य चरणों में उठाना पड़ा है, पहला झटका महीने के शुरुआत में हुए पहले बड़े प्रदर्शन के कारण एक ही दिन में 2,000 करोड़ रुपये का व्यापार प्रभावित हुआ। दूसरा झटका सेंट्रल दिल्ली में लगातार चार दिनों तक रास्ते बंद रहे। कनॉट प्लेस में मेट्रो और सेंट्रल पार्क की बंदी की वजह से 1,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त नुकसान जुड़ा।

CTI के अनुसार सेक्टर वाइज नुकसान का पूरा ब्योरा:

1. रिटेल व्यापार - 1800 करोड़ रुपये (60%)

सबसे ज्यादा मार रिटेल पर पड़ी है। सदर बाजार, चांदनी चौक, कश्मीरी गेट,  चावड़ी बाजार, भागीरथ प्लेस, गांधी नगर, नया बाजार, खारी बावली,  करावल नगर, करोल बाग, लाजपत राय मार्केट, कनॉट प्लेस सहित दिल्ली के 700 से ज्यादा बाजार प्रभावित हुए। नवरात्रि और दिवाली की पीक खरीददारी ठप्प पड़ गई।

2. थोक व्यापार और बाहरी खरीदार - 600 करोड़ रुपये (20%)

सोनीपत, पानीपत, गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा, गाजियाबाद और राजस्थान से आने वाले 3-4 लाख थोक खरीदार दिल्ली नहीं आए। ट्रकों की आवाजाही रुकी, सप्लाई चेन टूटी। त्यौंहारी माल गोदामों में ही पड़ा रहा।

3. हॉस्पिटैलिटी और सर्विस सेक्टर - 300 करोड़ रुपये (10%)

होटल, रेस्टोरेंट, सिनेमा हॉल, ब्यूटी पार्लर, सैलून, जिम, क्लब में 80% बुकिंग कैंसिल हुई। कनॉट प्लेस, खान मार्केट के रेस्टोरेंट में शाम की बुकिंग जीरो रही। टूरिस्ट, खासकर विदेशी पर्यटक, सेंट्रल दिल्ली आने से कतरा रहे हैं।

4. ट्रांसपोर्ट, ऑटो-टैक्सी और टूरिज्म - 180 करोड़ रुपये (6%)

20 से ज्यादा मेट्रो स्टेशन बंद, 10-12 किलोमीटर लंबे जाम, बस रूट डायवर्ट होने से ऑटो, टैक्सी, ई-रिक्शा चालकों की रोजी-रोटी बंद। ट्रांसपोर्टरों के 5000 से ज्यादा ट्रक-टेंपो जाम में फंसे।

5. अनौपचारिक सेक्टर - दिहाड़ी मजदूर, कारीगर, लोडिंग - 120 करोड़ रुपये (4%)

सबसे ज्यादा मार गरीब तबके पर पड़ी। लोडिंग-अनलोडिंग मजदूर, कारीगर, सेल्समैन, हॉकर, रेडी-पटरी वालों की दिहाड़ी पूरी तरह चली गई। गांधी नगर, सदर बाजार में 50,000 से ज्यादा दिहाड़ी मजदूर बेरोजगार बैठे रहे।

CTI की सरकार से मांग:

1. दिवाली तक सेंट्रल दिल्ली, नई दिल्ली और लुटियंस जोन में किसी भी धरने-प्रदर्शन पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।
2. भविष्य के लिए बाहरी दिल्ली - बुराड़ी, रोहिणी, द्वारका में परमानेंट प्रोटेस्ट जोन बनाया जाए।
3. अक्टूबर में हुए 3000 करोड़ के नुकसान के लिए व्यापारियों को राहत पैकेज, बिजली-पानी के बिल और GST में छूट दी जाए।
4. पुलिस प्रशासन दुकानदारों पर जबरन दुकान बंद करने का दबाव न बनाए, बल्कि बाजार खुले रखने की सुरक्षा दे।

CTI चेयरमैन ने क्या कहा?

CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने प्रदर्शनों के कारण पैदा हुए हालात पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, "10 अक्टूबर को लॉकडाउन जैसे हालात थे, 16 अक्टूबर को सेंट्रल पार्क बंद, 10,000 पुलिसकर्मी तैनात, 150 से ज्यादा लोग हिरासत में, इससे पूरे दिल्ली में पैनिक फैला है। नवरात्रि, रामलीला और दिवाली हमारे लिए पूरे साल की कमाई का एकमात्र महीना है। अगर अब भी हर हफ्ते प्रोटेस्ट होता रहा तो दिवाली तक नुकसान 10000 करोड़ पार कर जाएगा।"

संगठन का कहना है कि प्रदर्शनों के असर को केवल एक बाजार या दिल्ली तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। दिल्ली देश के बड़े व्यापारिक केंद्रों में से एक है। यहां दूसरे राज्यों से सामान खरीदने के लिए व्यापारी आते हैं और यहां से देश के अलग-अलग हिस्सों में माल भेजा जाता है। ऐसे में दिल्ली के कारोबार में रुकावट का असर दूसरे शहरों और राज्यों तक पहुंच सकता है।

इलेक्ट्रिकल कारोबार पर भी पड़ रहा असर

दिल्ली इलेक्ट्रिकल ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय शर्मा ने कहा कि त्योहारों के दौरान इलेक्ट्रिकल सामान की मांग काफी बढ़ जाती है। घरों और दुकानों की सजावट, लाइटिंग और दिवाली की तैयारियों के लिए लोग बड़ी संख्या में खरीदारी करते हैं। उन्होंने कहा कि व्यापारियों के लिए यह सीजन बेहद अहम है। अजय शर्मा के मुताबिक, रक्षाबंधन से शुरू होकर दिवाली के बाद तक चलने वाले त्योहारों के दौरान साल की कमाई का बड़ा हिस्सा आता है।

उन्होंने प्रदर्शनों को लेकर अपनी राय रखते हुए कहा, "पहली बात तो मुझे लगता नहीं कि ये आंदोलन होने चाहिए थे क्योंकि ये आंदोलन कम अराजकता ज्यादा है। क्योंकि देश को स्थिर करने की साजिश चल रही है जैसे पहले नेपाल या श्रीलंका में हुआ तो शायद हो सकता है। अमेरिका में एलन मक्स बैठ के अपने जो सोच रहे हैं कि यहां इंडिया के अंदर जो हम अस्थिरता फैला देंगे तो इंडिया की जो डेमोक्रेसी की जो जड़े हैं वो बहुत गहरी हैं और यहां की पापुलेशन भी 140 करोड़ की है।"

अजय शर्मा ने कहा कि दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों की खबरें दूसरे राज्यों तक पहुंचने से बाहर के खरीदार यहां आने से बच सकते हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि व्यापार और आम लोगों की आवाजाही को ध्यान में रखते हुए ऐसे प्रदर्शनों के लिए दूसरी जगह तय की जाए।

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Published By : Ankur Shrivastava

पब्लिश्ड 17 October 2026 at 18:24 IST