'BJP का घमंड चूर-चूर होने दो!, ये 'काला कानून' तमिलनाडु को...', एमके स्टालिन ने जलाई परिसीमन विधेयक बिल की कॉपी, एकजुट हुआ विपक्ष

परिसीमन विधेयक पर विपक्ष का विरोध जारी है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने तो विधेयक की प्रति ही जला डाली और काला झंडा दिखाकर बिल पर अपना विरोध जताया।

 
Follow :
एमके स्टालिन ने जलाई परिसीमन विधेयक बिल की कॉपी | Image: X

संसद का विशेष सत्र शुरू हो गया है। मोदी सरकार इस सत्र में लोकसभा में तीन बिल पेश कर रही है। मगर परिसमीन विधेयक को लेकर पेच गहराता जा रहा है। इसके लेकर विरोध के सुर कम नहीं हो रहे हैं। पूरा विपक्ष एकजुट हो गया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के.स्टालिन ने तो बिल की कॉपी जलाकर अपना विरोध जताया। उन्होंने बिल को 'काला कानून' करार देते हुए कहा कि विरोध की लपटें पूरे तमिलनाडु में फैलने दो।

महिला आरक्षण संशोधन अधिनियम पर संसद की विशेष बैठक से कुछ घंटे पहले स्टालिन ने विरोध प्रदर्शन किया। पश्चिमी तमिलनाडु के नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने काले वस्त्र पहने हुए विधेयक की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया। उनके साथ अन्य कार्यकर्ताओं ने भी काले कपड़े पहनकर प्रदर्शन किया।

बिल को जलाकर स्टालिन ने क्या कहा?

एक और जहां संसद में महिला आरक्षण बिल पर लोकसभा में बहस चल रही है तो दूसरी और सीएम स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन विधेयक की एक प्रति जला दी। उन्होंने इस बिल का काला कानून करार देते हुए आरोप लगाया कि यह तमिल लोगों की उनकी अपनी भूमि पर भी शरणार्थी बनाने की साजिश है। उन्होंने अपने X पोस्ट में लिखा,   विरोध की लपटें पूरे तमिलनाडु में फैलने दो! फासीवादी BJP का घमंड चूर-चूर होने दो!

 BJP के घमंड को घुटनों पर ला देगें-स्टालिन 

स्टालिन ने अपने पोस्ट में लिखा है, पहले भी जब तमिलनाडु में हिंदी थोपने के खिलाफ प्रतिरोध की आग भड़की थी, तो उसकी तपिश दिल्ली तक पहुंची थी। वह आग तब ही शांत हुई, जब दिल्ली को झुकना पड़ा।  आज, मैंने इस 'काले कानून' की प्रति जलाकर और इसके खिलाफ काला झंडा फहराकर उस आग को फिर से भड़का दिया है, यह कानून तमिल लोगों को उनकी अपनी ही धरती पर शरणार्थी बनाने की साजिश है। अब यह आग पूरे द्रविड़ क्षेत्र में फैल जाएगी। यह और भड़केगी, यह और तेज़ होगी, और यह BJP के घमंड को घुटनों पर ला देगी।

परिसीमन का विरोध क्यों?

बता दें कि परिसीमन (delimitation) लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं जनसंख्या के आधार पर नए सिरे से तय करने की प्रक्रिया है। इसके लिए एक परिसीमन आयोग बनेगा, जो 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर  सीटों का बंटवारा करेगा और उनका क्षेत्र तय करेगा। विवाद की जड़ परिसीमन ही है।

विपक्ष इसी बात का विरोध कर रहा है। उसका कहना है कि 2011 की जनगणना के आधार पर सीटों का बंटवारा हुआ तो तमिलनाडु , केरल और कर्नाटक जैसे दक्षिण भारत के राज्यों को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है।

 

यह भी पढ़ें: परिसीमन का विरोध क्यों कर रहा विपक्ष? क्या है सरकार का तर्क?

Published By : Rupam Kumari

पब्लिश्ड 16 April 2026 at 11:55 IST