मौत के बाद भी नहीं मिट पाईं दिलों की दूरियां! एक साथ नहीं हुआ कुणाल और उसके मां-बाप का अंतिम संस्‍कार, मामले में शादी-जमीन को लेकर नया खुलासा

महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में चांदगुडे परिवार के तीन सदस्यों की एक साथ मौत ने पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया है। इस दुखद घटना में मुरलीधर चांदगुडे (48), उनकी पत्नी संगीता और 18 वर्षीय बेटे कुणाल की जान चली गई।

 
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मौत के बाद भी नहीं मिट पाईं दिलों की दूरियां! एक साथ नहीं हुआ कुणाल और उसके मां-बाप का अंतिम संस्‍कार, मामले में शादी-जमीन को लेकर नया खुलासा | Image: X

महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में चांदगुडे परिवार के तीन सदस्यों की एक साथ मौत ने पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया है। इस दुखद घटना में मुरलीधर चांदगुडे (48), उनकी पत्नी संगीता और 18 वर्षीय बेटे कुणाल की जान चली गई। शुरुआत में इस हृदयविदारक घटना के पीछे iPhone को वजह बताया जा रहा था, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, परिवार के भीतर चल रहे गहरे विवाद और तनाव की चौंकाने वाली परतें खुल रही हैं।

इस घटना की सबसे खौफनाक और हैरान करने वाली बात यह रही कि एक ही परिवार के इन तीनों सदस्यों का अंतिम संस्कार एक साथ नहीं किया गया, जिसने कई अनसुलझे सवालों को जन्म दे दिया है।

मौत एक साथ, लेकिन अंतिम सफर अलग-अलग

पोस्टमार्टम प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब शव परिजनों को सौंपे गए, तो परिवार की आपसी कड़वाहट श्मशान घाट तक नजर आई। जानकारी के मुताबिक, कुणाल और उसकी मां संगीता का अंतिम संस्कार शहर के मुकुंदवाड़ी श्मशान घाट (संगीता के मायके) में किया गया। वहीं, मुरलीधर चांदगुडे के शव को उनके रिश्तेदार उनके पैतृक गांव धनगर पिंपलगांव ले गए।

शुक्रवार रात करीब 12 बजे गांव के ही खेत में उनका अंतिम संस्कार किया गया। एक ही परिवार के सदस्यों की एक साथ मौत होने के बावजूद अलग-अलग जगहों पर हुए अंतिम संस्कार ने स्थानीय लोगों और ग्रामीणों को झकझोर कर रख दिया है।

20 साल पुराना मनमुटाव और 3 एकड़ जमीन

ग्रामीणों के दावों और पुलिस की शुरुआती तफ्तीश के अनुसार, चांदगुडे परिवार में लंबे समय से गहरा पारिवारिक कलह चल रहा था। इस विवाद की दो मुख्य वजहें सामने आई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि करीब 20 साल पहले मुरलीधर ने अपनी पसंद से संगीता से शादी की थी। इस शादी की भनक उन्होंने अपने माता-पिता को नहीं लगने दी थी, जिसके बाद से ही परिवार में तनाव का बीज बोया गया था।

इसके अलावा मुरलीधर के 75 वर्षीय पिता के नाम पर करीब तीन एकड़ पैतृक जमीन थी, जिसे उन्होंने मुरलीधर के नाम कर दिया था। इससे मुरलीधर की तीन बहनें नाराज थीं। पारिवारिक दबाव में आकर कुछ वर्ष पहले मुरलीधर ने इस जमीन का कुछ हिस्सा अपनी तीनों बहनों को दे दिया। इसी फैसले के बाद मुरलीधर और उनकी पत्नी संगीता के बीच भयंकर झगड़े शुरू हो गए।

अवसाद का शिकार था कुणाल, दूरियां बनीं वजह

पारिवारिक कलह और माता-पिता के बीच रोज होने वाले झगड़ों का सबसे गहरा असर 18 वर्षीय कुणाल के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ा था। ग्रामीणों के अनुसार, वह तनाव (Depression) में रहने लगा था। इसी क्लेश के कारण कुणाल और उसकी मां संगीता ने पैतृक गांव जाना पूरी तरह छोड़ दिया था। दूसरी ओर, मुरलीधर अक्सर अपने माता-पिता से मिलने गांव जाया करते थे और महज 15 दिन पहले भी वह गांव होकर आए थे।

पिता की गैरमौजूदगी और रिश्तों में खटास

मुरलीधर पेशे से एक ट्रांसपोर्ट कंपनी में ड्राइवर थे। काम के सिलसिले में उन्हें 15 दिन से लेकर एक महीने तक घर से बाहर रहना पड़ता था। परिवार के एक बड़े बेटे की कुछ साल पहले बीमारी के कारण मौत हो चुकी थी। बताया जा रहा है कि मुरलीधर और उनके बेटे कुणाल के बीच पिता-पुत्र के रिश्ते बिल्कुल अच्छे नहीं थे।

पुलिस कर रही हर एंगल से जांच

पुलिस अब ग्रामीणों के दावों और पारिवारिक इतिहास की कड़ी से कड़ी जोड़ रही है। पुलिस इस अहम एंगल से जांच कर रही है कि क्या माता-पिता के बीच का निरंतर विवाद, पिता की लंबी अनुपस्थिति और गहरे मानसिक तनाव ने ही कुनाल और परिवार को इस खौफनाक कदम की ओर धकेला? पुलिस अधिकारियों का कहना है कि रिश्तेदारों, पड़ोसियों और दोस्तों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और मामले की तह तक जाने के लिए हर पहलू की बारीकी से तफ्तीश की जा रही है।

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Published By : Ankur Shrivastava

पब्लिश्ड 24 August 2026 at 07:44 IST