ब्रिक्स 2026 नई दिल्ली घोषणापत्र सर्वसम्मति से पास, जम्मू-कश्मीर आतंकी हमले की निंदा और एकतरफा टैरिफ पर जताई चिंता
BRICS Declaration: ब्रिक्स घोषणापत्र में भारत की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आकांक्षाओं का समर्थन किया गया। इसके अलावा, घोषणापत्र में जम्मू-कश्मीर आतंकी हमले की निंदा की गई और एकतरफा टैरिफ पर भी चिंता व्यक्त की गई है।
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BRICS Declaration 2026: नई दिल्ली में हुए 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अपनाए गए घोषणापत्र में कहा गया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य होने के नाते चीन और रूस ने संयुक्त राष्ट्र (और इसकी सुरक्षा परिषद) में बड़ी भूमिका निभाने की ब्राजील और भारत की इच्छा के प्रति अपना समर्थन दोहराया।
ब्रिक्स देशों ने 'नई दिल्ली घोषणापत्र 2026' को अपनाया। इसमें संयुक्त राष्ट्र में भारत और ब्राजील की बड़ी भूमिका निभाने की इच्छा का समर्थन किया गया। साथ ही, अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की गई और आतंकवाद के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' (बिल्कुल बर्दाश्त न करने) की नीति अपनाने का आह्वान किया गया।
घोषणापत्र में J&K आतंकी हमले की कड़ी निंदा
ब्रिक्स समूह ने आतंकवाद के मुद्दे पर 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले की "कड़े से कड़े शब्दों" में निंदा की, जिसमें 26 लोग मारे गए और कई अन्य घायल हो गए।
इस घोषणापत्र में आतंकवाद के सभी रूपों और तरीकों, जिनमें आतंकवादियों की सीमा-पार आवाजाही, आतंकवाद के लिए फंडिंग और सुरक्षित पनाहगाह शामिल हैं, से निपटने के लिए ब्रिक्स (BRICS) की प्रतिबद्धता को दोहराया गया। इसमें आतंकवाद के प्रति 'जीरो टॉलरेंस की बात कही गई और इस खतरे से निपटने में दोहरे मापदंडों को खारिज किया गया।
आतंकवादियों और आतंकवादी संगठनों के खिलाफ ठोस कार्रवाई हो
ब्रिक्स देशों ने संयुक्त राष्ट्र (UN) के ढांचे के तहत 'अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक कन्वेंशन' को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने और अपनाने का आह्वान किया। साथ ही, उन्होंने संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित सभी आतंकवादियों और आतंकवादी संगठनों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने पर जोर दिया।
ब्रिक्स समूह ने एकतरफा टैरिफ पर जताई चिंता
आर्थिक मोर्चे पर, घोषणापत्र में एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों के बढ़ते चलन पर गंभीर चिंता जताई गई। कहा गया कि ऐसे उपाय व्यापार को बाधित करते हैं, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए खतरा पैदा करते हैं और अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक गतिविधियों में अनिश्चितता लाते हैं।
समूह ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) में सुधार के लिए अपना समर्थन दोहराया और एक खुले, न्यायसंगत, पारदर्शी, निष्पक्ष, समावेशी और नियमों पर आधारित बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली की मांग की। साथ ही, उन्होंने WTO के विवाद निपटान तंत्र को पूरी तरह से और तुरंत बहाल करने की वकालत की।
घोषणापत्र में एकतरफा आर्थिक और सेकेंडरी प्रतिबंधों की भी निंदा की गई और कहा गया कि ये अंतर्राष्ट्रीय कानून के खिलाफ हैं। इसमें तर्क दिया गया कि ऐसे उपायों का विकास, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा पर बुरा असर पड़ता है।
Published By : Sahitya Maurya
पब्लिश्ड 12 September 2026 at 17:47 IST