अपडेटेड 16 January 2026 at 23:42 IST

25 साल बाद ढह गया महाराष्ट्र में शिवसेना का किला, BJP का खिला कमल; साथ आकर भी ठाकरे बंधुओं की निकली हवा

महाराष्ट्र के नगर निगम चुनावों में भाजपा और उसकी सहयोगी शिवसेना ने बड़ी जीत हासिल की है। मुंबई महानगर पालिका में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है।

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25 साल बाद ढह गया महाराष्ट्र में शिवसेना का किला, BJP का खिला कमल; साथ आकर भी ठाकरे बंधुओं की निकली हवा | Image: Republic

महाराष्ट्र के नगर निगम चुनावों में भाजपा और उसकी सहयोगी शिवसेना ने बड़ी जीत हासिल की है। मुंबई महानगर पालिका में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। वहीं उद्धव ठाकरे की शिवसेना पीछे हो गई है। बीजेपी के मेयर का रास्ता साफ हो गया है। इसके साथ ही बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) में ठाकरे परिवार का 25 साल का वर्चस्व टूट गया है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसे रिकॉर्ड तोड़ जनादेश करार दिया। उनका कहना है कि यह जीत प्रधानमंत्री मोदी पर जनता के भरोसे की जीत है, जिसने महाराष्ट्र ही नहीं, पूरे देश में विकास की एक नई भाषा गढ़ी है। इसी के साथ बीजेपी ने एक साथ बड़े-बड़े राजनीतिक घरानों के गढ़ को ढहा दिया है। सहकारी से सरकारी तक फॉर्मूले पर चलने वाला पवार परिवार एक होकर भी अपने किलों को बचाने में नाकाम रहा है। मराठी मानुष और हिंदू स्वाभिमान के मंत्र से चलने वाला ठाकरे परिवार भी एक होकर अपने गढ़ को बीजेपी के आगे बचा नहीं पाया।

निकाय चुनाव के नायक बनकर उभरे फडणवीस

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बीजेपी को प्रचंड जीत मिली थी। इसके बाद निकाय चुनावों में भी जबरदस्त प्रदर्शन किया है। 25 सालों से सत्ता के लिए तरस रही बीजेपी का वनवास खत्म हो गया है। अब बीजेपी गठबंधन का राज बीएमसी पर होगा। इस जीत के सबसे बड़े नायक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देंवेंद्र फडणवीस बनकर उभरे हैं। इस जीत के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह है और मुंबई में जश्न मन रहा है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने निकाय चुनाव के लिए काफी मेहनत की। चुनावी सभाओं से लेकर डोर टू डोर कैंपेन में वह शामिल हुए। मुंबई में लोगों के दरवाजे पर जा रहे थे। घरों में बैठकर उनसे संवाद कर रहे थे। लोगों को भरोसा दिलाया कि यह आपकी सरकार है। हम हमेशा आपके लिए मौजूद हैं। उसी का असर हुआ है कि मुंबई में बीजेपी ने कमाल किया है।

ठाकरे ब्रदर्स ने लोगों पर नहीं छोड़ा छाप

वहीं, इसके उलट मुंबई निकाय चुनाव में ठाकरे ब्रदर्स तक लोगों की पहुंच आसान नहीं थी। उद्धव ठाकरे खुद भी लोगों से कनेक्ट नहीं कर पाए। वह पुरानी विरासत के सहारे जीत की उम्मीद पाले रहें। फडणवीस ने मराठी भाषियों से लेकर गैर मराठियों तक को साधने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

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Published By : Ankur Shrivastava

पब्लिश्ड 16 January 2026 at 23:42 IST