हाजीपुर में नशे की गिरफ्त में युवा पीढ़ी, एक ही सिरिंज से कई लोग ले रहे ड्रग्स, HIV पॉजिटिव पाए गए 100 से अधिक युवा
हाजीपुर के तेरसिया दियारे में एक ही सिरिंज से नशा लेने के कारण 100 से अधिक युवाएं HIV पॉजिटिव पाए गए हैं, जिनमें 12 वर्ष के किशोर से लेकर 35 वर्ष के युवा शामिल हैं।
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हाजीपुर के तेरसिया दियारे में स्वास्थ्य संकट खड़ा हो गया है। शराबबंदी के बाद इलाके में ड्रग्स का कारोबार तेजी से फैला और अब ड्रग्स को सिरिंज के साझा इस्तेमाल ने पूरे क्षेत्र को HIV का 'डेंजर जोन' बना दिया है। महज डेढ़ महीने के भीतर लगाए गए स्वास्थ्य शिविरों में 100 से अधिक लोग एचआईवी पॉजिटिव पाए गए हैं। सबसे डरावना सच यह है कि इनमें 12 वर्ष के मासूम बच्चों से लेकर 35 वर्ष तक के युवा शामिल हैं।
एक ही सिरिंज से 5 लोग ले रहे नशा
तेरसिया दियारे के युवा ‘कोटा’ नामक ड्रग्स का सेवन कर रहे हैं। नशा करने का तरीका बेहद जानलेवा है, युवा पहले इस पाउडर ड्रग्स को पानी में घोलते हैं, फिर 4 से 5 लोग एक ही सिरिंज में भरकर थोड़ा-थोड़ा अपनी नसों में इंजेक्ट करते हैं। इस नशा को लेने के बाद शरीर में उठने वाले असहनीय दर्द और एलर्जी से बचने के लिए वे उसी संक्रमित सुई से दर्द निवारक और एलर्जीरोधी इंजेक्शन भी लेते हैं। इस साझा इस्तेमाल ने पूरे इलाके में एचआईवी संक्रमण की एक अटूट साइलेंट चेन बना दी है।
60 प्रतिशत मरीज 20-25 साल के नवयुवक
कुल संक्रमितों में से 60 प्रतिशत से अधिक केवल 20 से 25 वर्ष की उम्र के युवा हैं। स्व. कन्हाई शुक्ला सामाजिक सेवा संस्थान ने 6 महीने पहले 12 संदिग्धों के सैंपल लिए थे, जिनमें 8 पॉजिटिव मिले। इसके बाद बड़े पैमाने पर लगे कैंपों में यह आंकड़ा 100 के पार चला गया। मामला बढ़ने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने आनन-फानन में 12 जुलाई तक 77 मरीजों की एआरटी दवाएं शुरू करवाई थी।
आपको बता दें, कुछ पीड़ितों ने अपनी आपबीती सुनाई। जिसमें 16 साल के एक युवक ने बताया कि 'मैं गाड़ी चलाकर महीने के 1 लाख तक कमा लेता था। गांव के लड़कों की संगति में ड्रग्स की लत लगी। पैसे खत्म हुए तो गाड़ी बेच दी। एक ही सुई से नशा लेने के कारण मुझे एचआईवी हो गया और मुझसे मेरी पत्नी भी संक्रमित हो गई। 16 की उम्र में जिंदगी बर्बाद हो चुकी है।' वहीं दूसरे पीड़ित ने कहा कि 'गांव में नशा इतना फैल चुका है कि अगर हर घर की जांच हो, तो 1-2 एचआईवी मरीज जरूर मिलेंगे। हम ड्रग्स और एविल घोलकर नस में ले लेते थे। अब डर भी लगता है और जीना भी चाहता हूं, लेकिन लत छूट नहीं रही।'
Published By : Aarya Pandey
पब्लिश्ड 24 August 2026 at 17:59 IST