Bihar: PhD स्कॉलर्स का लोकभवन मार्च जारी, बैरिकेडिंग तोड़ आगे बढ़ने की कोशिश; पुलिस के साथ धक्का-मुक्की; जानें क्या है मांग
राजधानी पटना में PhD धारकों का प्रदर्शन अब आंदोलन का रूप ले रहा है। आज बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों ने आर ब्लॉक चौराहा से लोकभवन के लिए मार्च निकाला। इस दौरान पुलिस के उनकी धक्का-मुक्की भी हुई।
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बिहार की राजधानी पटना में शुक्रवार को PhD धारकों, रिसर्च स्कॉलर्स और गेस्ट फैकल्टी ने सरकार के खिलाफ अपना आंदोलन तेज कर दिया। आर ब्लॉक स्थित वीर कुंवर सिंह पार्क के पास से शुरू हुए इस प्रदर्शन में प्रदर्शनकारियों ने लोकभवन की ओर मार्च निकाला। सुबह करीब 11 बजे आर ब्लॉक चौराहे से शुरू हुए इस मार्च में बड़ी संख्या में पीएचडी होल्डर्स और छात्र शामिल हुए।
ये प्रदर्शनकारी पिछले 19 दिनों से अपनी मांगों को लेकर आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं। अब उन्होंने आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए और अपनी मांग को पूरा करवाने के लिए लोकभवन तक मार्च का रास्ता अपनाया है। सुबह से ही बड़ी संख्या में PhD स्कॉलर्स लोकभवन मार्च के लिए आर ब्लॉक चौराहे पर जमा हुआ। इनके मार्च को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई।
PhD धारकों के लोकभवन मार्च में भारी हंगामा
प्रशासन ने आर ब्लॉक और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। आर ब्लॉक चौराहे पर बैरिकेडिंग की गई है और रेलवे स्टेशन की ओर से आर ब्लॉक आने वाले रास्ते को बंद कर दिया गया है। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात है। PhD स्कॉलर्स एसोसिएशन और NSUI ने असिस्टेंट प्रोफेसरों के लिए प्रस्तावित नए भर्ती नियमों को वापस लेने समेत कई मांगों को लेकर पटना में लोक भवन तक मार्च निकाला है।
आर ब्लॉक चौराहे पर स्थिति तनावपूर्ण
आर ब्लॉक चौराहे पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई। प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, जबकि पुलिस उन्हें रोकने में लगी है। दोनों पक्षों के बीच लगातार खींचतान की स्थिति बनी हुई है। पुलिस के रोकने पर कई छात्र बैरिकेडिंग पर चढ़कर सरकारे के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे कुमुद पटेल भी आर ब्लॉक चौराहे पर पहुंच गए हैं। प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री संजय सिंह टाइगर के इस्तीफे की मांग भी कर रहे हैं।
क्या है PhD धारकों की प्रमख मांग ?
बता दें कि प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग यह है कि बिहार सरकार ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नियमों और विनियमों को दरकिनार कर राज्य में अपना नया रेगुलेशन लागू कर दिया है। वे इस नए रेगुलेशन को तुरंत रद्द करने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी मांगें केवल नियुक्ति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था और शोधार्थियों के भविष्य से जुड़ी हैं।
- असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति में UGC Regulation 2018 और Table 3A लागू किया जाए।
- असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती की प्रक्रिया नियमित और स्थायी हो, यानी खाली पदों पर जल्द नियमित नियुक्ति की जाए।
- अधिकतम उम्र सीमा बढ़ाकर 55 साल की जाए।
- बिहार में प्रभावी डोमिसाइल नीति लागू की जाए।
- बिहार स्टैच्यूट 2026 में बताई जा रही विसंगतियों को दूर किया जाए और योग्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति में उचित मौका मिले।
- गेस्ट असिस्टेंट प्रोफेसर से जुड़े मामलों में सेवा सुरक्षा या उचित समायोजन किया जाए।
- विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की स्वायत्तता में कथित हस्तक्षेप बंद किया जाए।
- विश्वविद्यालयों में खाली Assistant Professor के पदों पर जल्द नियुक्ति की जाए।
Published By : Rupam Kumari
पब्लिश्ड 22 August 2026 at 14:15 IST