अपडेटेड 20 January 2026 at 12:02 IST

सबसे बड़ी बेटी की उम्र 21 और सबसे छोटी की 3... अब 24 साल बाद खत्म हुआ इंतजार, 9 बेटियों के बाद हुआ बेटा तो खुशी से झूमा परिवार

हरियाणा के जींद में एक परिवार की खुशी का उस वक्त ठिकाना नहीं रहा, जब उनका 24 साल का इंतजार खत्म हुआ। इस परिवार में 9 बेटियों के बाद बेटे ने जन्म लिया।

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After 24 years family rejoiced when a son was finally born | Image: x

Haryana News: हरियाणा के जींद जिले के उचाना कलां से एक अनोखी खबर सोशल मीडिया पर छाई हुई है। यहां एक परिवार में जब 9 बेटियों के बाद जब बेटे ने जन्म लिया तो परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। हालांकि ये खबर एक बार फिर समाज की सोच पर सीधा सवाल कर रही है।

उचाना कलां में रहने वाले सुरेंद्र और उनकी पत्नी रीतू की शादी को 24 साल हो चुके हैं। इन 24 सालों में उनके घर एक, दो, तीन या चार नहीं, बल्कि 9 बेटियां जन्मी। इसके बावजूद परिवार को एक बेटे का इंतजार था। हालांकि, 24 साल बाद उनका यह इंतजार खत्म हुआ और 9 बेटियों के बाद एक बेटे का जन्म हुआ।

9 बेटियों के बाद जन्मा बेटा, झूमा परिवार

नागरिक अस्पताल से बेटे के जन्म की सूचना मिलते ही परिवार में खुशी का ठिकाना नहीं रहा। हर किसी के चेहरे खुशी से खिल उठे। आलम ऐसा था कि अस्पताल में जश्न सा माहौल हो गया। अस्पताल परिसर में मिठाइयां बांटी गईं।

2 बेटियों का कर चुके हैं ब्याह

सुरेंद्र ने कहा कि सभी दुआ कर रहे थे कि इस बार बेटा हो। भगवान कि कृपा से 9 लड़कियों के बाद बेटा हुआ है। जब भी बेटी होती थी तो सभी कहते थे कि भगवान इन्हें बेटा दे, ताकि बेटियों को भाई मिल सके। उनके मुताबिक, दूसरे भाई की भी तीन बेटियां हैं। ऐसे में बेटे के जन्म के बाद 12 बहनों को उनका भाई मिल गया।

सबसे छोटी बेटी की उम्र 3 साल

बीते नवंबर 2 बेटियों के हाथ पीले कर दिए। सबसे बड़ी बेटी की उम्र 21 साल और सबसे छोटी बेटी  की उम्र 3 साल है। बेटियों के नाम कल्पना, आरती, भारती, खुशी, मानसू, रजनी, रजीव, काफी, माफी है।

10वीं संतान का नाम रखा ‘दिलखुश’

बेटे के आगमन पर परिजनों का कहना है कि ये ईश्वर की कृपा है। 24 साल का इंतजार पूरा होने पर परिवार इतना खुश दिखा कि उन्होंने बेटे का नाम 'दिलखुश' रखने का ऐलान कर दिया।

भले ही परिवार में खुशियों की गूंज है, लेकिन 9 बेटियों के बाद भी बेटे की चाहत समाज के लिए सवाल खड़े कर रहा है। आधुनिक दौर में भी बच्चे को जेंडर से तौलने वाली मानसिकता अब भी बरकरार है। 

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Published By : Priyanka Yadav

पब्लिश्ड 20 January 2026 at 12:02 IST