अपडेटेड 24 March 2026 at 19:59 IST
Red River: भारत की एक ऐसी नदी जो 3 दिनों के लिए हो जाती है एकदम लाल, जानें क्या है कारण
Red River: क्या आप किसी ऐसी नदी की कल्पना कर सकते हैं, जिसका पानी साल में एक बार पूरी तरह सुर्ख लाल हो जाता है? यह किसी काल्पनिक फिल्म का दृश्य नहीं, बल्कि भारत की पावन धरती पर घटने वाला एक वास्तविक और विस्मयकारी चमत्कार है।
Red River: भारत को नदियों का देश कहा जाता है। यहां गंगा, यमुना और नर्मदा जैसी नदियों को सिर्फ जल का स्रोत नहीं, बल्कि साक्षात देवी का रूप माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे देश में एक ऐसी भी नदी है, जिसका पानी हर साल तीन दिनों के लिए पूरी तरह लाल हो जाता है? यह नजारा जितना हैरान करने वाला है, इसके पीछे की कहानी उतनी ही दिलचस्प है।आज हम बात कर रहे हैं ब्रह्मपुत्र नदी की, जो अपनी विशालता और इस अनोखी घटना के कारण दुनिया भर में चर्चा का विषय बनी रहती है। आइए जानते हैं।
एशिया की जीवनरेखा है ब्रह्मपुत्र नदी
ब्रह्मपुत्र न केवल भारत, बल्कि एशिया की सबसे महत्वपूर्ण और लंबी नदियों में से एक है। तिब्बत से निकलकर भारत के असम और फिर बांग्लादेश तक का सफर तय करने वाली यह नदी अपनी प्रलयंकारी बाढ़ और अथाह जलराशि के लिए जानी जाती है। लेकिन इसकी सबसे बड़ी विशेषता है वह 'तीन दिन', जब इसका नीला-धूसर पानी अचानक सुर्ख लाल हो जाता है।
क्यों हो जाती है ब्रह्मपुत्र नदी लाल?
इस नदी के लाल होने का सीधा संबंध असम के गुवाहाटी में स्थित प्रसिद्ध कामाख्या देवी मंदिर से है। कामाख्या मंदिर को माता के 51 शक्तिपीठों में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहां माता सती का योनि भाग गिरा था, इसलिए इसे प्रजनन और शक्ति का केंद्र माना जाता है। साल आषाढ़ के महीने में यहां 'अंबुबाची मेले' का आयोजन होता है। ऐसी मान्यता है कि इन तीन दिनों के दौरान माता कामाख्या रजस्वला मासिक धर्म होती हैं। ऐसा कहा जाता है कि कि माता के रजस्वला होने के कारण ही पास से बहने वाली ब्रह्मपुत्र नदी का पानी लाल हो जाता है। इस दौरान मंदिर के कपाट भक्तों के लिए बंद कर दिए जाते हैं और चौथे दिन विशेष पूजा के बाद ही इसे खोला जाता है।
नदी लाल होने का वैज्ञानिक कारण?
वैज्ञानिकों के अनुसार, ब्रह्मपुत्र के लाल होने के पीछे मुख्य कारण उस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति है। असम और कामाख्या पहाड़ियों के आसपास की मिट्टी में आयरन ऑक्साइड की मात्रा बहुत अधिक है। जून माह के दौरान जब भारी बारिश होती है, तो पहाड़ियों से मिट्टी कटकर नदी में मिल जाती है। लाल और पीली मिट्टी के सेडिमेंट्स जब पानी के साथ बड़ी मात्रा में घुलते हैं, तो नदी का रंग गहरा लाल दिखाई देने लगता है।
Published By : Aarya Pandey
पब्लिश्ड 24 March 2026 at 19:56 IST