CJP प्रोटेस्ट के बीच 124 पूर्व अफसर चुनाव आयोग के समर्थन में उतरे , बोले- आरोप लगाने वाले पहले सबूत भी दें
चुनावी गड़बड़ियों के आरोपों पर राजनीतिक बहस के बीच पूर्व IAS, IFS और एलाइड सर्विसेज अधिकारियों ने चुनाव आयोग का समर्थन करते हुए SIR को जरूरी बताया। एक पत्र के माध्यम से उन्होंने कहा कि बिना किसी पक्के सबूत के वोटिंग में धांधली के दावों पर सवाल उठाना गलत है।
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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में चुनावी गड़बड़ियों के आरोपों पर राजनीतिक बहस जारी है। इस बीच 124 पूर्व IAS, IFS और एलाइड सर्विसेज अधिकारियों ने एक खुला पत्र जारी कर भारतीय चुनाव आयोग (ECI) और वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का बचाव किया है।
अधिकारियों ने पत्र में कहा कि चुनाव में गड़बड़ी के आरोप ठोस सबूतों के आधार पर लगाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा “जब आप जीतते हैं तो कोई सिस्टम ईमानदार नहीं हो सकता और जब आप हारते हैं तो धांधली वाला नहीं हो सकता। 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों का हवाला देते हुए, अधिकारियों ने दावा किया कि चुनाव बिना किसी री-पोलिंग के हुए और 1951 के बाद सबसे ज्यादा वोटर टर्नआउट हुआ।”
चुनाव आयोग के समर्थन में उतरे 124 पूर्व अफसर
शनिवार को 124 पूर्व अफसर ने एक खुला पत्र लिखकर भारतीय निर्वाचन आयोग यानी ECI का बचाव करते हुए कहा कि 'बूथ कैप्चरिंग, बैलेट बॉक्स में सामान डालने और चुनाव से जुड़ी हिंसा के जमाने से देश के चुनाव सिस्टम में बड़ा बदलाव आया है। पहले चुनाव के दौरान हिंसा जैसी समस्याएं देखने को मिलती थी, लेकिन अब पोलिंग एजेंट, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की सीलिंग, स्ट्रांग-रूम की सिक्योरिटी और वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) वेरिफ़िकेशन जैसे सेफ़गार्ड जैसे उपाय चुनावी प्रक्रिया की निगरानी में मदद करते हैं।
2025 बिहार विधानसभा चुनाव का दिया हवाला
लेटर में पूर्व अधिकारियों ने 2025 बिहार विधानसभा चुनाव का हवाला देते हुए कहा कि 'बिहार विधानसभा 2025 चुनाव बिना किसी री-पोलिंग के हुए और 1951 के बाद सबसे ज्यादा वोटर टर्नआउट हुआ। उन्होंने कहा कि यह डेवलपमेंट चुनाव मैनेजमेंट और इंस्टीट्यूशनल सेफ़गार्ड्स में सुधार को दिखाता है।
'जीते तो ईमानदार, हारे तो धांधली...,'
पत्रा में आगे कहा कि “जब आप जीतते हैं तो कोई सिस्टम ईमानदार नहीं हो सकता और जब आप हारते हैं तो धांधली वाला नहीं हो सकता।” पत्रा में यह भी बताया गया कि केंद्र में सत्ताधारी पार्टी उसी इलेक्शन कमीशन के तहत कई राज्यों के चुनाव हार चुकी है। अधिकारियों ने 2024 के लोकसभा चुनावों का भी ज़िक्र किया, जिसमें सत्ताधारी पार्टी अपने दम पर पूरी तरह से बहुमत हासिल करने में नाकाम रही थी।
पूर्व अधिकारियों ने SIR को जरूरी बताया
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को जरूरी प्रक्रिया बताते हुए अधिकारियों ने इसे मरे हुए वोटर्स, डुप्लीकेट एंट्रीज़ और ऐसे लोगों की पहचान करके सही इलेक्टोरल रोल बनाए रखने के लिए एक जरूरी प्रोसेस बताया, जिन्होंने हमेशा के लिए अपना घर बदल लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि SIR प्रोसेस में गलत तरीके से नाम बाहर होने की चिंताओं को दूर करने के लिए सुरक्षा उपाय शामिल हैं, जिसमें ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल का पब्लिकेशन, दावे और आपत्तियां दर्ज करने के मौके, सुनवाई और अपील के लिए प्रावधान शामिल हैं।
आरोप लगाने वाले पहले सबूत दें
अधिकारियों ने कहा, “सवाल करना हर नागरिक का अधिकार है। आरोप लगाने वाले का काम साबित करना है,” और कहा कि बिना सबूत के आरोप लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनावी प्रक्रिया में लोगों का भरोसा कमज़ोर कर सकते हैं।
Published By : Sahitya Maurya
पब्लिश्ड 10 October 2026 at 20:38 IST