अपडेटेड 9 March 2026 at 18:36 IST

Lahore 1947: अब सनी देओल की फिल्म का नया टाइटल होगा ‘बंटवारा 1947’? प्रोड्यूसर आमिर खान ने बताया क्या है सच

Lahore 1947: सनी देओल की आगामी फिल्म 'लाहौर 1947' को आमिर खान प्रोडक्शंस के बैनर तले बनाया जा रहा है। फिल्म 13 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस के वीकेंड पर सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

Lahore 1947 | Image: instagram

Lahore 1947: सनी देओल की ‘बॉर्डर 2’ बॉक्स ऑफिस पर हिट रही। अब वो बहुत जल्द फिल्म 'लाहौर 1947' में नजर आएंगे जिसे राजकुमार संतोषी बना रहे हैं। बीते कुछ दिनों से फिल्म के टाइटल बदलने की खबरें सामने आ रही हैं। ऐसा कहा गया कि अब 'लाहौर 1947' का नया टाइटल ‘बंटवारा 1947’ होगा। इन खबरों में कितनी सच्चाई है, इसका खुलासा खुद प्रोड्यूसर आमिर खान ने कर दिया है।

सनी देओल की आगामी फिल्म 'लाहौर 1947' को आमिर खान प्रोडक्शंस के बैनर तले बनाया जा रहा है। कुछ दिनों पहले मेकर्स ने ऐलान किया था कि फिल्म 13 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस के वीकेंड पर सिनेमाघरों में रिलीज होगी। 

सनी देओल की 'लाहौर 1947' का बदला टाइटल?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत और पाकिस्तान के बीच मौजूदा तनाव के मद्देनजर मेकर्स को लगता है कि फिल्म के टाइटल में "लाहौर" नाम जोड़ने से दिक्कत हो सकती है। ऐसा भी बताया गया कि अब सनी देओल स्टारर का नाम बदलकर ‘बंटवारा 1947’ कर दिया गया है क्योंकि फिल्म भारत-पाकिस्तान बंटवारे के समय में सेट है। हालांकि, आमिर खान ने इन खबरों का सिरे से खंडन कर दिया है। 

बॉलीवुड हंगामा से बातचीत में आमिर पहले तो टाइटल बदलने की खबरों पर हंसे और फिर पूछा- “आपने ऐसा कहां सुन लिया? नहीं, हमारी फिल्म का टाइटल नहीं बदला है। अभी भी इसका नाम 'लाहौर 1947' ही है, और मैं इसे इसी नाम से रखना चाहता हूं”।

'लाहौर 1947' को लेकर विवाद

बता दें कि ऐसा कहा जा रहा था कि पाकिस्तानी शहर के नाम पर बनी फिल्म को भारतीय दर्शक स्वीकार नहीं करेंगे लेकिन आमिर का कहना है कि वो किसी दवाब में आने वाले नहीं हैं। असली समस्या कहीं और है। निर्माता-निर्देशक सुनील दर्शन के पास 'लाहौर' टाइटल के राइट्स हैं। बातचीत जारी है और मामला जल्द ही सुलझ जाएगा।

दर्दभरी है 'लाहौर 1947' की कहानी 

बता दें कि 'लाहौर 1947' में आमिर खान भी सहायक भूमिका में नजर आएंगे। इसमें प्रीति जिंटा, अली फजल और शबाना आजमी भी मुख्य भूमिका में हैं। ये मूवी सैयद असगर वजाहत द्वारा 1980 में लिखे गए नाटक 'जिस लाहौर नई देख्या, ओ जमया ई नई' पर आधारित है। ये भारत-पाकिस्तान बंटवारे की कहानी दिखाएगी जिसमें एक मुस्लिम परिवार लखनऊ से लाहौर पलायन करता है और एक हिंदू परिवार द्वारा खाली की गई हवेली में रहने लगता है। परिवार की बुजुर्ग हिंदू मुखिया अपना पुश्तैनी घर छोड़ने से इनकार कर देती है और समय के साथ उसका मुस्लिम प्रवासियों के साथ एक अनूठा रिश्ता बन जाता है।

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Published By : Sakshi Bansal

पब्लिश्ड 9 March 2026 at 18:36 IST