अपडेटेड 15 March 2026 at 18:57 IST
West Bengal Assembly Election 2026: पिछली बार 8 फेज में होने वाला बंगाल चुनाव इस बार दो फेज में क्यों? 2021 में प्री-पोलिंग से रिजल्ट तक 52 लोगों की हुई थी मौत
West Bengal Assembly Election 2026: चुनाव आयोग ने बंगाल में दो चरणों में चुनाव कराने का फैसला लिया है, जो पिछली बार आठ चरणों में हुआ था। चुनाव आयोग के इस फैसले के पीछे की स्ट्रेटजी क्या है? आइए जानते हैं…
West Bengal Assembly Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया है। चुनाव आयोग के अनुसार, इस बार बंगाल चुनाव दो चरणों में होगा, जिसके लिए 24 अप्रैल और 29 अप्रैल का दिन निर्धारित किया गया है।
हालांकि चुनाव आयोग के इस फैसले पर कई एक्सपर्ट्स ने चिंता व्यक्त की है। क्योंकि 2021 में 294 विधानसभा सीटों के लिए 8 फेज में मतदान हुआ था, वहीं इस बार इसे घटाकर मात्र 2 चरणों में समेट दिया गया है। आइए कुछ प्वाइंट्स में जानते हैं, आखिर ECI ने यह फैसला क्यों लिया है?
दो चरण में चुनाव बंगाल क्यों?
बता दें कि तारीखों की ऐलान के बाद मुख्य चुनाव आयोग ज्ञानेश कुमार ने बताया कि लोगों की सुविधा के लिए दो चरण में चुनाव बंगाल में कराए जाएंगे। इसके मुख्य कारण हैं-
- प्री-पोलिंग हिंसा में भारी गिरावट
बता दें, 2021 के चुनावों में नामांकन से लेकर नतीजों तक करीब 52 लोगों की जान गई थी। इसमें केवल चुनाव के दौरान लगभग 20 से 25 लोगों की मौत हुई थीं। हालांकि उस समय की तुलना में, 2026 के प्री-पोलिंग माहौल में हिंसा की खबरें न के बराबर हैं। चुनाव आयोग की 'क्रोनोलॉजी' को समझें तो यह स्पष्ट होता है कि यदि चुनाव की तारीखों के ऐलान से पहले ही शांति व्यवस्था कायम है, तो आयोग कम चरणों में चुनाव कराने का जोखिम उठा सकता है।
- छह महीने से जारी है SIR प्रक्रिया
इसके अलावा चुनाव आयोग इस बार बंगाल में पिछले छह महीनों (अक्टूबर 2025) से सक्रिय है। आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत उन 'अराजक तत्वों' और 'अवैध उपद्रवियों' की पहचान कर उन्हें वोटर लिस्ट से बाहर किया है जो चुनाव के दौरान हिंसा भड़काने की क्षमता रखते थे। साथ ही लंबी तैयारी के कारण आयोग के पास इस बार प्रशासन का सपोर्ट है, सटीक डेटा और नियंत्रण तंत्र भी मौजूद है।
- प्रशासन पर सीधा नियंत्रण
चुनाव आयोग के अनुसार, 2021 के दौरान उनके पास तैयारियों के लिए केवल दो महीने का समय था और स्थानीय प्रशासन पर राज्य सरकार का अधिक प्रभाव था। इस बार, चुनाव आयोग ने समय रहते कमान अपने हाथ में ले ली है। अधिकारियों के तबादले और सुरक्षा बलों की तैनाती को पहले से ही इस तरह नियोजित किया गया है कि हिंसा की संभावना को न्यूनतम किया जा सके। आयोग का मानना है कि केंद्रित प्रशासन होने पर कम चरणों में भी सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता रखी जा सकती है।
कब कहां चुनाव?
चुनाव आयोग ने जिलों को भौगोलिक और संवेदनशीलता के आधार पर दो हिस्सों में बांटा है-
- प्रथम चरण (24 अप्रैल): इसमें उत्तर बंगाल और जंगलमहल के 16 जिले शामिल हैं (जैसे दार्जिलिंग, मालदा, पुरुलिया, झाड़ग्राम आदि)। ये वो इलाके हैं जहां सुरक्षा बलों की आवाजाही और तैनाती को पहले चरण में प्राथमिकता दी जा रही है।
- द्वितीय चरण (29 अप्रैल): इसमें कोलकाता, 24 परगना, हावड़ा और हुगली जैसे 7 मुख्य जिले शामिल हैं। यह शहरी और घनी आबादी वाला क्षेत्र है, जिसे दूसरे चरण में कवर किया जाएगा।
मतदाताओं की सुविधा सबसे अहम
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के अनुसार, चरणों की संख्या कम करने का एक बड़ा कारण जनता की सुविधा भी है। लंबे समय तक चलने वाले चुनाव (जैसे पिछला 8 फेज का चुनाव) से न केवल जनजीवन प्रभावित होता है, बल्कि प्रशासनिक खर्च और थकान भी बढ़ती है।
Published By : Sagar Singh
पब्लिश्ड 15 March 2026 at 18:57 IST