India New Oil & Gas Alternatives: तेल संकट के बीच भारत ढूंढ रहा स्थाई समाधान, महानदी और अंडमान बेसिन में तेल भंडार पर नजर

ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भारत अब गहरे समुद्र में निवेश बढ़ा रहा है। अगर इन क्षेत्रों में बड़े व्यावसायिक खोज होते हैं तो न सिर्फ आयात घटेगा, बल्कि रोजगार सृजन और आत्मनिर्भरता की दिशा में भी बड़ा कदम होगा। महानदी और अंडमान बेसिन भारत की ऊर्जा भविष्य की कुंजी बन सकते हैं।

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महानदी और अंडमान बेसिन में तेल भंडार पर भारत की नजर | Image: X

वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और ऊर्जा सुरक्षा की चुनौतियों के बीच भारत अब पूर्वी तट पर नए तेल और प्राकृतिक गैस भंडारों की खोज तेज कर रहा है। विशेष रूप से महानदी बेसिन और अंडमान बेसिन में गहरे पानी वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

ONGC और Oil India Limited (OIL) जैसे प्रमुख संगठन इस दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। भारत, नए गहरे जल भंडारों की खोज के माध्यम से आयात पर निर्भरता कम करना चाहता है। जिसके चलते महानदी और अंडमान बेसिन में अपतटीय तेल और गैस की खोज में तेजी ला रहा है।

भारत की प्रमुख अपस्ट्रीम तेल और गैस कंपनियां जैसे ऑयल एंड गैस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (ONGC) और ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) ने अंडमान बेसिन में नए विकल्पों की पहचान करने के अपने प्रयासों को दोगुना कर दिया है।

क्यों जरूरी है पूर्वी क्षेत्र की खोज?

भारत वर्तमान में अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है। पश्चिमी क्षेत्रों (ऑनशोर और ऑफशोर) में खोज और उत्पादन लगभग अपनी सीमा तक पहुंच चुका है। इसलिए सरकार का फोकस अब बंगाल की खाड़ी, महानदी और अंडमान जैसे पूर्वी क्षेत्रों पर शिफ्ट हो गया है।

  • महानदी बेसिन: ओडिशा और छत्तीसगढ़ तक फैला यह क्षेत्र संभावनाओं से भरा माना जा रहा है।
  • अंडमान बेसिन: यहां हाल में Oil India द्वारा गैस की खोज (Vijayapuram-2 वेल) ने नई उम्मीद जगाई है। यह क्षेत्र डीपवाटर एक्सप्लोरेशन के लिए महत्वपूर्ण है।

मेगा सर्वे का प्लान

सरकार एक बड़े मल्टी-बेसिन जियोलॉजिकल सर्वे की तैयारी कर रही है। इसमें कई क्षेत्र शामिल हैं।

  • बंगाल-पुर्णिया और महानदी: करीब 45,000 लाइन किलोमीटर (LKM)
  • कृष्णा-गोदावरी: लगभग 43,000 LKM
  • कावेरी: 30,000 LKM
  • अंडमान: 43,000 LKM

14 मई को इस सर्वे के लिए बिड्स आमंत्रित किए गए थे। इसमें रिग्स, 3D तकनीक और प्राइवेट कंपनियों के साथ सरकारी सहयोग शामिल होगा। इसका मकसद आयात पर निर्भरता कम करना और नए वैकल्पिक भंडार ढूंढना है।

मौजूदा स्थिति

यह खबर लिखे जाने के समय ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमत 109.9 डॉलर प्रति बैरल और WTI करीब 102 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी। बढ़ती कीमतें देश की अर्थव्यवस्था और आम आदमी दोनों पर दबाव डाल रही हैं।

ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भारत अब गहरे समुद्र में निवेश बढ़ा रहा है। अगर इन क्षेत्रों में बड़े व्यावसायिक खोज होते हैं तो न सिर्फ आयात घटेगा, बल्कि रोजगार सृजन और आत्मनिर्भरता की दिशा में भी बड़ा कदम होगा। महानदी और अंडमान बेसिन भारत की ऊर्जा भविष्य की कुंजी बन सकते हैं। सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के प्रयासों से उम्मीद है कि आने वाले समय में देश को नए तेल-गैस संसाधन मिलेंगे, जो ऊर्जा संकट से निपटने में मदद करेंगे।

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Published By : Sagar Singh

पब्लिश्ड 20 May 2026 at 17:01 IST