अपडेटेड 31 January 2026 at 21:13 IST

Union Budget 2026: क्या होता है फिस्कल डेफिसिट और रेवेन्यू डेफिसिट? समझिए बजट के इन भारी-भरकम शब्दों का सरल मतलब

Union Budget 2026: बजट में फिस्कल डेफिसिट और रेवेन्यू डेफिसिट सरकार की वित्तीय सेहत के मुख्य पैमाने हैं। इन आंकड़ों का सीधा असर आम आदमी के लोन, ब्याज दरों और बाजार में महंगाई पर पड़ता है। जानिए क्या है इनका अर्थ, सरकार इन्हें कैसे कम करती है और आपकी जेब पर इसका क्या असर पड़ता है।

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Union Budget 2026 Revenue Deficit vs Fiscal Deficit | Image: AI/Republic

Union Budget 2026: 1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपना नौवां बजट पेश करने जा रही हैं। जैसे-जैसे बजट की घड़ी नजदीक आ रही है, टीवी और अखबारों में 'फिस्कल डेफिसिट' और 'रेवेन्यू डेफिसिट' जैसे शब्दों का शोर बढ़ने लगा है। 

आम आदमी अक्सर इन्हें जटिल आर्थिक आंकड़े मानकर नजरअंदाज कर देता है, लेकिन ये भारी-भरकम शब्द आपकी जेब, महंगाई और देश की विकास दर को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं। आइए समझते हैं इनका आसान मतलब…

क्या होता है फिस्कल डेफिसिट?

सरल शब्दों में कहें तो फिस्कल डेफिसिट (Fiscal Deficit) वह अंतर है जो बताता है कि सरकार की कुल कमाई और उसके कुल खर्च के बीच कितनी दूरी है। अगर सरकार 100 रुपये कमाती है और 115 रुपये खर्च करती है, तो यह 15 रुपये का अंतर 'राजकोषीय घाटा या फिस्कल डेफिसिट' कहलाता है। इसके अलावा यह तय करता है कि सरकार के पास इंफ्रास्ट्रक्चर, कल्याणकारी योजनाओं और रक्षा पर खर्च करने के लिए कितनी गुंजाइश है। 

इस कमी को पूरा करने के लिए सरकार को बाजार से उधारी लेनी पड़ती है। बजट 2026 में विशेषज्ञों की नजर इस पर टिकी है क्योंकि ज्यादा घाटे का मतलब है ज्यादा कर्ज, जिससे भविष्य में ब्याज का बोझ बढ़ता है और देश की क्रेडिट रेटिंग पर भी असर पड़ सकता है।

क्या होता है रेवेन्यू डेफिसिट?

रेवेन्यू डेफिसिट (Revenue Deficit) थोड़ा अलग है। यह सरकार के उन रोजमर्रा के खर्चों को दर्शाता है जिनसे कोई नई संपत्ति (जैसे सड़क या पुल) नहीं बनती। इसमें कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन और सब्सिडी जैसे खर्च शामिल होते हैं। यदि सरकार की नियमित टैक्स आय इन खर्चों को पूरा नहीं कर पाती, तो इसे राजस्व घाटा माना जाता है। 

अर्थशास्त्री इसे अधिक चिंताजनक मानते हैं क्योंकि इसका मतलब है कि सरकार अपना 'किचन' चलाने के लिए भी कर्ज ले रही है। एक स्वस्थ अर्थव्यवस्था के लिए इस घाटे का कम होना बेहद जरूरी है।

आम आदमी पर क्या होता है इसका असर?

आप सोच रहे होंगे कि सरकार के घाटे से आपको क्या लेना-देना? लेकिन इसका सीधा संबंध आपकी खुशहाली से है। यदि फिस्कल डेफिसिट बहुत ज्यादा बढ़ जाए, तो बाजार में नकदी की कमी हो सकती है, जिससे आपके होम लोन या कार लोन की ब्याज दरें बढ़ सकती हैं। 

इसके अलावा, घाटा बढ़ने पर सरकार नोट छापने या अन्य तरीकों से बाजार में पैसा डालती है, जो बाद में महंगाई को जन्म देता है। बजट 2026 में सरकार का लक्ष्य इन घाटों को नियंत्रित करना होगा, ताकि देश में इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बना रहे और निवेश का माहौल बेहतर हो।

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Published By : Ruchi Mehra

पब्लिश्ड 31 January 2026 at 21:13 IST