ट्रंप की 'ख्वाहिश', खामेनेई की 'जिद' या कुछ और...पाकिस्तान में क्यों नाकाम हुई अमेरिका-ईरान की शांति वार्ता? जेडी वेंस ने बताया सबसे बड़ा सच
जेडी वेंस ने मंगलवार को साफ-साफ कह दिया है कि अमेरिका और ईरान के बीच बरसों से जो अविश्वास और नफरत चली आ रही है, उसे रातों-रात खत्म नहीं किया जा सकता।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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पिछले हफ्ते पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हुई ईरान-अमेरिका के बीच शांति वार्ता नाकाम रही थी। हालांकि दोनों देशों के बीच दोबारा वार्ता के रास्ते खुले हैं और उम्मीद है कि जल्द ही दोनों देशों की फिर मुलाकात होगी। ये मीटिंग किस जगह और कब होगी इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। लेकिन अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का एक अहम बयान जरूर सामने आया है जिससे उन कारणों का पता चला है कि इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता नाकाम क्यों हुई थी।
जेडी वेंस ने मंगलवार को साफ-साफ कह दिया है कि अमेरिका और ईरान के बीच बरसों से जो अविश्वास और नफरत चली आ रही है, उसे रातों-रात खत्म नहीं किया जा सकता। वेंस का कहना है कि दोनों देशों के बीच भरोसे की भारी कमी ही शांति समझौते के रास्ते में सबसे बड़ी रुकावट बनी हुई है। आसान भाषा में समझें तो दोनों देशों के बीच बातचीत तो चल रही है, लेकिन कोई भी एक-दूसरे पर यकीन करने को तैयार नहीं है।
हाल ही में पाकिस्तान में दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच करीब 21 घंटे तक बातचीत चली, लेकिन इसका कोई ठोस नतीजा नहीं निकल। हालांकि, जेडी वेंस ने एक सकारात्मक बात यह कही है कि ईरानी बातचीत करने वाले भी डील चाहते हैं और कूटनीति के दरवाजे अभी बंद नहीं हुए हैं। उन्होंने मौजूदा स्थिति को लेकर सकारात्मक संकेत दिए, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि समाधान आसान नहीं है।
डोनाल्ड ट्रंप की एक बड़ी ख्वाहिश भी है शांति वर्ता में देरी की वजह
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मंगलवार को एथेंस जॉर्जिया में एक कार्यक्रम में वेंस ने कहा, 'राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कोई छोटी डील नहीं करेंगे। वह एक बड़ा समझौता करना चाहते हैं। वह असल में ईरान को जो प्रस्ताव दे रहे हैं, वह बहुत सीधा-सादा है। उन्होंने कहा है कि अगर आप एक सामान्य देश की तरह व्यवहार करने को तैयार हैं तो हम भी आपके साथ आर्थिक रूप से एक सामान्य देश जैसा ही व्यवहार करेंगे।'
वेंस ने बताया कि ईरान के साथ अभी तक कोई अंतिम समझौता नहीं हो पाया है। इसकी वजह ट्रंप प्रशासन की ओर कड़ी परमाणु शर्तों पर जोर देना है। असल में ट्रंप एक ऐसा समझौता चाहते हैं जिसमें ईरान के पास कोई परमाणु हथियार ना हो। ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका कोई समझौता नहीं करेगा।
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इन शर्तों पर अड़ा है अमेरिका
- ईरान अपने यूरेनियम संवर्धन (enrichment) के सभी कार्य पूरी तरह से बंद कर दे।
- अपनी प्रमुख परमाणु संवर्धन सुविधाओं को नष्ट कर दे।
- 400 किलोग्राम से अधिक अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम को वापस सौंप दे, जिसके बारे में माना जाता है कि वह जमीन के नीचे दबा हुआ है।
16 अप्रैल 2026 हो सकती है वार्ता की तारीख
जानकारी के मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच गुरुवार को बातचीत का नया दौर शुरू हो सकता है। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से सामने आई इस जानकारी में बताया गया है कि दोनों पक्षों के बीच नई वार्ता की तैयारी चल रही है। समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच गुरुवार को बातचीत का नया दौर आयोजित किए जाने की संभावना है।