एक औरत नाचने लगी, हफ्ते भर में सैकड़ों लोग उसके साथ डांस करने लगे, जबतक उनमें से कई की मौत हो गई... अबतक अनसुलझा है डांसिंग प्लेग का रहस्य
वर्ष 1518 की बात है, फ्रांस के स्ट्रासबर्ग शहर में एक ऐसी रहस्यमयी घटना घटी जिसने इतिहास को हैरान कर दिया। सब कुछ सामान्य था, तभी अचानक फ्राउ ट्रोफिया नाम की एक महिला सड़क पर बेसुध होकर नाचने लगी। यह कोई खुशी का नाच नहीं था, बल्कि एक ऐसी बेचैनी थी जिसे वह रोक नहीं पा रही थी।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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इतिहास के पन्नों में कई ऐसी घटनाएं दर्ज हैं, जो आज भी वैज्ञानिकों और इतिहासकारों के लिए एक अनसुलझा रहस्य बनी हुई हैं। ऐसी ही एक अजीबोगरीब और डरावनी घटना घटी थी साल 1518 में फ्रांस के स्ट्रासबर्ग शहर में। इसे इतिहास में 'डांसिंग प्लेग' के नाम से जाना जाता है। एक सामान्य दिन अचानक शुरू हुआ यह नृत्य देखते ही देखते एक जानलेवा महामारी में बदल गया।
एक महिला से शुरू हुआ ये डांस
इस अजीब घटना की शुरुआत फ्राउ ट्रोफिया नाम की एक महिला से हुई। वह स्ट्रासबर्ग की सड़कों पर अचानक बिना किसी संगीत के नाचने लगी। देखते ही देखते कुछ दिन बीत गए, लेकिन वह रुकी नहीं। धीरे-धीरे सैकड़ों लोग उसके साथ जुड़ गए और बिना रुके, बिना थके लगातार नाचते रहे। स्थिति इतनी भयावह हो गई कि कई लोगों की नाचते-नाचते ही मौत हो गई। आज भी यह घटना कलाकारों और लेखकों को प्रेरित करती है। फ्लोरेंस + द मशीन का एल्बम 'डांस फीवर' और किरण मिलवुड हार्ग्रेव की किताब 'द डांस ट्री' इसी ऐतिहासिक रहस्य से प्रेरित हैं।
दैवीय श्राप या मानसिक बीमारी?
उस दौर के लोगों के लिए यह घटना किसी समझ से परे थी। तत्कालीन समाज में इसे भगवान का श्राप या शैतान का प्रकोप माना गया। पीड़ित लोगों को चर्च ले जाया गया, उन्हें लाल जूते और क्रॉस दिए गए, यहाँ तक कि उन्हें और नचाने के लिए ढोल-नगाड़े भी बजाए गए, ताकि वे नाचकर थक जाएं और शांत हो जाएं। लेकिन इन टोटकों का कोई असर नहीं हुआ।
बाद में, स्विस चिकित्सक पैरासेल्सस ने इसे दैवीय मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने तर्क दिया कि यह कोई दैवीय आपदा नहीं, बल्कि एक 'मानसिक महामारी' थी। उनके अनुसार, इंसानी कल्पना इतनी शक्तिशाली हो सकती है कि वह एक मानसिक स्थिति को बीमारी की तरह एक व्यक्ति से दूसरे में फैला दे।