'पूरे देश को बर्बाद करना नहीं चाहता, मगर शायद मुझे...', मध्यावधि चुनावों में करारी हार के बाद ईरान के खिलाफ युद्ध को लेकर ट्रंप के बदले सुर
अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में अपनी रिपब्लिकन पार्टी को मिली हार के बाद, ईरान के खिलाफ उनकी पिछली धमकियों की तुलना में अब उनका यह रुख कुछ नरम लग रहा है।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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मिडटर्म चुनावों में डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी की करारी हार के बाद अब ईरान के खिलाफ युद्ध को लेकर रणनीति में बदलाव नजर आ रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि वे ईरान के बचे-खुचे हिस्से को नष्ट नहीं करना चाहते, लेकिन उन्होंने यह भी माना कि शायद उन्हें ऐसा करना पड़े। ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान में संभावित सैन्य ऑपरेशन शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में अपनी रिपब्लिकन पार्टी को मिली हार के बाद, ईरान के खिलाफ उनकी पिछली धमकियों की तुलना में उनका यह रुख कुछ नरम और हिचकिचाहट भरा लग रहा है। ट्रंप ने कहा कि युद्ध के और अधिक विनाशकारी करने या ना करने लेकर जल्द ही कोई अंतिम फैसला लिया जाएगा। उन्होंने कहा, "अगर संभव हो तो मैं देश के बाकी हिस्से को नष्ट नहीं करना चाहूंगा, लेकिन शायद मुझे ऐसा करना पड़े।"
ईरान को लेकर जल्द लेंगे फैसला
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "आपको जल्द ही पता चल जाएगा।" उन्होंने इस अंतिम विकल्प को एक स्थायी फैसले के रूप में पेश किया। ट्रंप ने कहा, "हम एक फैसला लेंगे कि क्या हम आगे बढ़ना चाहते हैं और एक ऐसा कदम उठाना चाहते हैं जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि ऐसी घटना दोबारा कभी न हो?" उन्होंने अनुमान लगाया कि देश को फिर से बनाने में एक चौथाई सदी (25 साल) लग जाएंगे।"
बचे-खुचे हिस्से को नष्ट करना नहीं चाहता-ट्रंप
ईरान के प्रति ट्रंप का यह रूख पहले से बिल्कुल अलग है। पहले उन्होंने चेतावनी दी थी कि अमेरिकी सेनाओं ने अभी ईरान के बचे-खुचे हिस्से को नष्ट करना" शुरू भी नहीं किया है, और वे वहां के ऊर्जा बुनियादी ढांचे और पुलों को अपना निशाना बना सकते हैं। इससे पहले, संघर्ष के एक अन्य चरण में, उन्होंने कहा था कि कोई समझौता तभी संभव है जब अमेरिका देश के बचे हुए हिस्से और उसके नेतृत्व को पूरी तरह नष्ट कर दे।
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ईरान के साथ बातचीत पर ट्रंप ने क्या कहा?
ये टिप्पणियां 8 अक्टूबर को किए गए एक वादे के बाद आई हैं, जब ट्रंप ने कहा था कि ईरान के साथ बातचीत सकारात्मक रही है और उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि राष्ट्रीय चुनावों से पहले कोई सैन्य कार्रवाई नहीं की जाएगी। उस समय उन्होंने कहा था, "हम 3 नवंबर को अमेरिका में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले किसी भी समय ईरान पर हमला नहीं करेंगे।"
ट्रंप को चुनाव में लगा बड़ा झटका
वहीं, अमेरिकी मीडिया ने बताया था कि दोनों पक्षों के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत चल रही थी। चुनाव संपन्न होने के साथ ही वह वादा अब खत्म हो चुका है। पहले की रिपोर्टों से संकेत मिला था कि ईरान की बची-खुची सैन्य क्षमता को पूरी तरह खत्म करने को लेकर प्रशासन हिचकिचा रहा है, क्योंकि देश के पुनर्निर्माण में बहुत लंबा समय लगेगा। देश के भीतर, चल रहे युद्ध ने प्रशासन के लिए राजनीतिक खींचतान पैदा कर दी है।
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इससे ईंधन की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं और चुनाव नजदीक आने के साथ ही प्रशासन की लोकप्रियता (पब्लिक अप्रूवल रेटिंग) में भी गिरावट आई है। प्रशासन आगे और सैन्य हमले करेगा या बातचीत के जरिए कोई समझौता करेगा। इसी बात से तय होगा कि इस संघर्ष का आगे क्या रुख रहता है। इस संघर्ष ने होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले जहाजी आवागमन को बुरी तरह बाधित किया है और ऊर्जा बाजारों में भारी उथल-पुथल मचा दी है।