अपडेटेड 30 January 2026 at 09:53 IST
चीन को घेरने की बड़ी तैयारी, अमेरिकी मंत्री जैकब हेलबर्ग बोले- 'पैक्स सिलिका में भारत का स्वागत करने के लिए हम उत्सुक है'
अमेरिका फरवरी 2026 में पैक्स सिलिका में भारत को शामिल करने को लेकर उत्सुक है। 'पैक्स सिलिका' चीन पर निर्भरता कम करने और AI आपूर्ति चेन मजबूत करने का काम करता है। जानते हैं पैक्स सिलिका (Pax Silica) के जरिए कैसे अमेरिका चीन को घेरने की कोशिश कर रहा है और कितने देश इसमें शामिल है।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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India-US Partnership: अमरीका के आर्थिक मामलों के विदेश उप मंत्री जैकब हेलबर्ग ने कहा है कि अमेरिका अगले महीने फरवरी 2025 में अपनी तकनीकी पहल पैक्स सिलिका में भारत का स्वागत करने के लिए काफी उत्सुक है। पैक्स सिलिका (Pax Silica) चीन पर निर्भरता घटाते हुए सेमीकंडक्टर और AI आपूर्ति चेन को मजबूत करने का काम करता है।
जैकब हेलबर्ग के मुताबिक, यह कदम दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देगा। पैक्स सिलिका एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन है, जिसमें जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, नीदरलैंड, यूके, इजराइल, यूएई, ऑस्ट्रेलिया और कतर जैसे देश शामिल हैं। ये सभी सदस्य देश चिप डिजाइन, विनिर्माण और AI अवसंरचना पर मिलकर काम करेंगे। इसका उद्देश्य वैश्विक तकनीकी सुरक्षा को सुनिश्चित करना भी है।
पैक्स सिलिका के पहले दौर से बाहर रहा भारत
भारत को यह भी देखना है कि चीन को वह अचानक इस मामले में पूरी तरह से नजरअंदाज नहीं कर सकता। अमेरिका के साथ पैक्स सिलिका को लेकर औपचारिक बातचीत अभी होनी है। उससे पहले कई ऐसी बातें हैं, जिसका पहले से अध्ययन कर लेना बहुत जरूरी है। कुछ अधिकारी इस बात की ओर भी ध्यान दिला रहे हैं कि भारत इसमें शामिल होने का निमंत्रण देर से दिया गया है। जबकि, जापान सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, यूके, ऑस्ट्रेलिया, इजरायल और ग्रीस ने 12 दिसंबर को ही पैक्स सिलिका पर शिखर सम्मेलन के दौरान घोषणापत्र पर हस्ताक्षर कर दिए थे। बाद में नीदरलैंड्स, संयुक्त राष्ट्र अमीरात और कतर भी इसका हिस्सा बन गए।
चीन के प्रति भारत का नरम रुख
इस बीच, अमेरिका-चीन आर्थिक और सुरक्षा समीक्षा आयोग (USCC) ने घोषणा की है कि वह अगले महीने भारत की अमेरिका और चीन के साथ रणनीतिक संबंधों पर एक महत्वपूर्ण सुनवाई आयोजित करेगा। यह सुनवाई 17 फरवरी को होगी और यह 2026 रिपोर्टिंग साइकिल की पहली सार्वजनिक सुनवाई होगी। आयोग का उद्देश्य अमेरिका-चीन प्रतिद्वंद्विता के संदर्भ में भारत की स्थिति का आकलन करना है, जहां वाशिंगटन चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए भारत को एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में देखता है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और चीन के रिश्तों में एक थोड़ा थोड़ा सुधार देखा जा रहा है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सात साल बाद हुई बीजिंग यात्रा, पांच साल बाद फिर से शुरू हुई हवाई सेवा और गलवान संघर्ष के बाद चीनी निवेश पर लगी पाबंदियों में दी गई ढील पर अमेरिकी नीति निर्माता अपनी नजर बनाए हुए हैं।
अमेरिका के लिए इस सुनवाई का महत्व
पिछले एक दशक में वाशिंगटन ने भारत को चीन के खिलाफ एक 'रणनीतिक काउंटरवेट' (Strategic Counterweight) यानी संतुलन बनाने वाली शक्ति के रूप में देखा है। हालांकि, पिछले एक साल के दौरान भारत और अमेरिका के बीच कुछ तनाव भी देखे गए हैं। अमेरिकी नीति गलियारों में यह सवाल उठ रहा है कि भारत अपनी 'रणनीतिक स्वायत्तता' को बनाए रखते हुए अमेरिकी सुरक्षा ढांचे के साथ कितना तालमेल बिठा पाएगा। यह सुनवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके ठीक छह सप्ताह बाद, अप्रैल 2026 में, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन की आधिकारिक यात्रा पर जाने वाले हैं।
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Published By : Nidhi Mudgill
पब्लिश्ड 30 January 2026 at 09:53 IST