China vs America: अब ये बर्दाश्त नहीं... ट्रंप के 100% टैरिफ के बदले शी जिनपिंग का पलटवार, चीन ने अमेरिकी जहाजों पर बढ़ाई पोर्ट फीस
China vs America : चीन और अमेरिका के बीच पिछले कई महीनों से ट्रेड वॉर चल रह है। डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर जैसे ही 100 फीसदी का टैरिफ लगाया वैसे ही चीन ने अमेरिकी जहाजों पर पोर्ट फीस बढ़ाने का फैसला किया है।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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विश्व के दो बड़े देश अमेरिका और चीन एक बार फिर आमने-सामने आ गए हैं। इन दोनों देशों का तनाव अब समुद्री व्यापारों को भी प्रभावित कर रहा है। ट्रंप सरकार ने चीन पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाया था, जिसके बाद चीन ने भी पलटवार किया है। चीन ने कहा है कि अमेरिकी जहाजों पर भारी भरकम शुल्क लगाया जाएगा। चीन अपने बंदरगाहों पर आने वाले अमेरिकी जहाजों पर पोर्ट फीस बढ़ाने का फैसला किया है।
चीन की तरफ से बढ़ाई गई यह फीस अमेरिका में बने या अमेरिकी झंडे वाले सभी जगहों पर लागू होगी। चीन के बंदरगाहों पर माल लेकर आने-जाने वाले जगहों पर इसका असर पड़ेगा। खबरों के मुताबिक यह फीस आज यानी 14 अक्टूबर से लागू हो जाएगी।
चीन ने कितनी लगाई फीस?
चीन अमेरिकी जगहों पर 400 युआन यानी लगभग 56 डॉलर प्रति नेट टन चार्ज लगाने जा रहा है। वहीं 2028 से चीनी बंदरगाहों पर आने वाले अमेरिकी जगहों पर ये फीस बढ़कर 1,120 युआन प्रति टन देनी होगी। कहा जा रहा है कि पोर्ट फीस अमेरिका के उस जवाब में बढ़ा गई है, जिसमें ट्रंप ने चीनी जहजों पर 50 डॉलर प्रति टन की पोर्ट फीस लगाने की घोषणा की थी।
अमेरिका ने लगाई थी पोर्ट फीस
चीन का यह कदम अमेरिका को जवाब है। ट्रंप ने इस साल की शुरुआत में ही चीन के जहजों पर फीस लगाने की घोषणा की थी। अमेरिका के पोर्ट फीस के चलते साल 2026 तक चीन को करीब 3 डॉलर तक का नुकसान उठाना पड़ सकता है। अमेरिका के इस फैसले के बाद ही चीन ने भी अमेरिकी जगहों पर फीस लगाने का निर्णय लिया है।
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बढ़ सकती है ग्लोबल टेंशन
चीन और अमेरिका दो बड़ी आर्थिक शक्तियां हैं। ऐसे में अगर दोनों देश एक दुसरे पर फीस लगाते हैं, तो इसका असर सिर्फ इन दोनों देशों पर ही नहीं, बल्कि अन्य देशों पर भी देखा जा सकता है। अमेरिका और चीन द्वारा बढ़ाई गई फीस को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के सिद्धांतों का गंभीर उल्लंघन बताया जा रहा है। इससे समुद्री व्यापार कई देशों के लिए राजनीति का हथियार भी बन सकता है।