अपडेटेड 12 March 2026 at 14:15 IST
ईरान-इजरायल जंग के बीच भारत को ट्रंप फिर दे सकते हैं बड़ा झटका, ट्रेड को लेकर 16 देशों के खिलाफ होगी जांच, रिपोर्ट आने के बाद होगा ये एक्शन
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच राष्ट्रपति ट्रंप भारत सहित 16 देशों के खिलाफ बड़े एक्शन की तैयारी में है। ट्रंप एक बार फिर कई देशों पर टैरिफ बम फोड़ने की तैयारी में हैं।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच राष्ट्रपति ट्रंप भारत सहित 16 देशों के खिलाफ बड़े एक्शन की तैयारी में है। ईरान के साथ जारी जंग के बीच ट्रंप एक बार फिर कई देशों पर टैरिफ बम फोड़ने की तैयारी में हैं। अमेरिका ने 16 देशों की औद्योगिक उत्पादन क्षमता की जांच के आदेश दिए हैं। जांच पूरी होने के बाद इन देशों से आने वाला सामान पर भारी भरकम टैक्स लग सकते है।
मिडिल ईस्ट में ईरान के साथ जारी भीषण युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्यापार क्षेत्र में बड़ा उठाने की तैयारी में है। ट्रंप प्रशासन ने भारत सहित 16 प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों के खिलाफ सेक्शन 301 जांच शुरू कर दी है, जिसके बाद इन देशों के सामानों पर नए टैरिफ लगाए जा सकते हैं। यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) जैमीसन ग्रीर ने 11 मार्च को इस जांच की घोषणा की।
फिर से टैरिफ बम फोड़ने की तैयारी में ट्रंप
इस कदम का मकसद पिछले महीने US सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद टैरिफ प्रेशर को फिर से लागू करना है, जिसमें ट्रंप के पिछले टैरिफ के आदेश को गैर-कानूनी बताया गया था। जांच 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य उन देशों की नीतियों की पड़ताल करना है, जो स्ट्रक्चरल एक्सेस कैपेसिटी (अधिक उत्पादन क्षमता) और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में ओवरप्रोडक्शन को बढ़ावा दे रही हैं।
यह कानून US ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव को उन देशों के खिलाफ टैरिफ या दूसरी सजा देने वाली कार्रवाई करने का अधिकार देता है जो गलत ट्रेड प्रैक्टिस का इस्तेमाल करते पाए जाते हैं। जेमीसन ग्रियर ने कहा कि अमेरिका के बड़े ट्रेड पार्टनर्स ने अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ा ली है, जिसका असर अमेरिका के ट्रेड पर पड़ रहा है।
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जांच के दायरे में शामिल 16 देशों के नाम
- चीन
- यूरोपियन यूनियन
- भारत
- जापान
- दक्षिण कोरिया
- मेक्सिको
- सिंगापुर
- स्विट्जरलैंड
- नॉर्वे
- इंडोनेशिया
- मलेशिया
- कंबोडिया
- थाईलैंड
- वियतनाम
- ताइवान
- बांग्लादेश
लिस्ट से कनाडा बाहर
खास बात यह है कि US का दूसरा सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर कनाडा को लिस्ट से बाहर रखा गया था। ग्रीर ने एक कॉन्फ्रेंस कॉल के दौरान रिपोर्टर्स को बताया कि "जांच उन इकॉनमी पर फोकस करेगी जिनके बारे में हमारे पास सबूत हैं कि वे अलग-अलग मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर्स में स्ट्रक्चरल एक्स्ट्रा कैपेसिटी और प्रोडक्शन दिखा रहे हैं।" कैपेसिटी जांच के अलावा, ग्रीर ने घोषणा की कि वह धारा 301 के तहत एक अलग जांच शुरू करेंगे। इस दूसरी जांच का उद्देश्य मजबूर श्रम का उपयोग करके निर्मित उत्पादों के अमेरिकी आयात पर प्रतिबंध लगाना है
USTR के अनुसार, इन देशों में से कई में लगातार बड़े व्यापार अधिशेष (ट्रेड सरप्लस) देखे गए हैं या उनकी उत्पादन क्षमता का उपयोग कम हो रहा है, जो सब्सिडी, कम मजदूरी या अन्य सरकारी समर्थन से जुड़ा हो सकता है। भारत के मामले में सोलर मॉड्यूल, पेट्रोकेमिकल्स, स्टील, टेक्सटाइल, स्वास्थ्य संबंधित सामान, निर्माण सामग्री और ऑटोमोटिव सेक्टर में अतिरिक्त क्षमता का जिक्र किया गया है। 2025 में भारत का अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार करीब 58 अरब डॉलर रहा।
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Published By : Rupam Kumari
पब्लिश्ड 12 March 2026 at 14:15 IST