Donald Trump: 'वे मान गए क्योंकि मैंने कहा, जेलेंस्की और पुतिन को साथ आकर...', रूस और यूक्रेन के बीच एनर्जी सीजफायर पर बोले ट्रंप
रूस और यूक्रेन के बीच एनर्जी सीजफायर पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, "वे मान गए क्योंकि मैंने कहा। और यह बात सुलझनी चाहिए। दोनों देशों को साथ आना होगा।"
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को एक चौंकाने वाला ऐलान किया। उन्होंने दोनों देशों के बीच तत्काल प्रभाव से ऊर्जा संबंधी युद्धविराम (एनर्जी सीजफायर) लागू होने की घोषणा की। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर इसकी घोषणा कर हर किसी को हैरान कर दिया। अब पत्रकारों से बातचीत करते हुए इस सीजफायर को लेकर ट्रंप ने बड़ी बात कही है।
ट्रंप ने रूस और युक्रेन के बीच एनर्जी सीजफायर की घोषणा करते हुए अपने पोस्ट में लिखा, 'अभी से रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में एनर्जी सीजफायर लागू हो गया है। दोनों पक्ष इस पर सहमत हो गए हैं। इसे न तोड़ें! इस मामले पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद।” हालांकि, ट्रंप ने यह नहीं बताया कि सीजफायर कितने समय तक लागू रहेगा। वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने इस ऐलान के थोड़ी देर बात ही स्पष्ट कर दिया कि इस समझौते की उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
युद्ध एक आपदा है, इसे खत्म करना होगा-ट्रंप
रूस और यूक्रेन के बीच एनर्जी सीजफायर पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, "वे मान गए क्योंकि मैंने कहा। और यह बात सुलझनी चाहिए। युद्ध एक आपदा है। क्या आपने इस महीने आए नंबर देखे? 32,000, ज्यादा सैनिक, मारे गए। युद्ध खत्म होना चाहिए। इसकी पहल दोनों देशों को करने होगी। साथ मिलकर युद्ध को खत्म करने होगा।"
सीजफायर टूटने पर ट्रंप ने क्या कहा?
वहीं, एनर्जी सीजफायर के बावजूद यूक्रेन पर हमलों की रिपोर्ट पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, "मुझे इस बारे में पक्का नहीं पता, हम देखेंगे। लेकिन मुझे बस इतना पता है कि जेलेंस्की और पुतिन को एक साथ आकर उस लड़ाई को खत्म करना होगा। इस महीने उन्होंने उस लड़ाई में 32,000 लोगों को खो दिया, और यह बहुत अजीब है इसलिए उन्हें एक साथ आकर इसे खत्म करना होगा।"
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एनर्जी सीजफायर का मतलब
बता दें कि एनर्जी सीजफायर का मतलब है कि रूस और यूक्रेन के बीच एक समिति, आपसी समझौता हुआ है, जिसके तहत दोनों देश, एक दूसरे के ऊर्जा संबंधी बुनियादी ढांचे पर हमला नहीं करेंगे। यह पूरी तरह से युद्धविराम नहीं है, सिर्फ ऊर्जा क्षेत्र तक ही सीमित मामला है।