दुनिया का एक बड़ा हिस्सा मुश्किलों का सामना कर रहा है, मैंने '4F संकट'..., UN हाई-लेवल वीक के समापन पर बोले विदेश मंत्री एस जयशंकर
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने UN हाई-लेवल वीक के समापन पर एशिया सोसाइटी को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने दुनिया में चल रहे बड़े संघर्षों पर अपने विचार रखे।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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भारत के विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र हाई-लेवल वीक के समापन पर एशिया सोसाइटी को संबोधित करते हुए मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय काफी मुश्किल दौर से गुजर रही है और बड़े देश ही इसकी दिशा तय कर रहे हैं। जयशंकर ने कहा, “यह वह समय है जब दुनिया भर के विदेश मंत्री न्यूयॉर्क में एकत्रित हुए हैं। मैं भी इसी सालाना कार्यक्रम के लिए यहां आया हूं। आम तौर पर हम इस प्रक्रिया के आखिर में बैठकर दुनिया के बाकी हिस्सों के साथ अपने विचार और अनुभव साझा करते हैं।”
जयशंकर ने वैश्विक हालात को गंभीर बताते हुए कहा कि वर्तमान में दो बड़े संघर्ष चल रहे हैं, जिनका असर दुनिया के हर देश पर पड़ रहा है। पश्चिमी एशिया (मिडिल ईस्ट) में हालात बेहद जटिल बने हुए हैं। अफ्रीका में भी कई संघर्ष जारी हैं, खासकर सूडान में। दुनिया के और जगहों पर भी। दुनिया का एक बड़ा हिस्सा उस संकट का सामना कर रहा है जिसे मैंने जनरल असेंबली में अपने संबोधन में '4F संकट' कहा था ।
जयशंकर ने बताया '4F संकट' का मतलब
'4F संकट' का मतलब समझाते हुए जयशंकर ने कहा, फूड(भोजन), फ्यूल(ईंधन), फर्टिलाइजर(उर्वरक) और फाइनेंस(वित्त) का संकट। इसके अलावा, सप्लाई चेन की कमजोरियां भी बढ़ रही हैं। SDG लक्ष्य पीछे छूट रहे हैं। टेक्नोलॉजी को लेकर भी काफी चिंता है। सच तो यह है कि यह दुनिया मुश्किल है और दिन-ब-दिन और मुश्किल होती जा रही है, और बड़े देश ही इसकी दिशा तय कर रहे हैं।"
UN हाई-लेवल वीक का समापन
यह बयान संयुक्त राष्ट्र महासभा के हाई-लेवल वीक के समापन के दौरान दिया गया, जहां वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा का सिलसिला जारी है। जयशंकर ने कहा कि बातचीत की “कहीं ज्यादा जटिल” जमीनी हकीकत का असर ट्रेड टॉक पर पड़ा है। पूर्व अमेरिकी राजनयिक डैनियल रसेल के साथ बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, “आज हम ऐसी स्थिति में पहुंच गए हैं जहां व्यापार समझौते को लेकर कमोबेश सहमति बन गई है।” जयशंकर ने कहा कि भारत का आर्थिक ढांचा, जिसमें बड़ी संख्या में छोटे उत्पादक, कृषि उत्पादक और कारखाने शामिल हैं। अमेरिका के आर्थिक ढांचे से काफी अलग हैं।