'ईरान बरबाद हो चुका है, सैनिकों को वेतन नहीं, 300% महंगाई... होर्मुज पर अमेरिका ने बना दी स्टील की दीवार', डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा

अमेरिका पिछले कई महीनों से ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकाबंदी लागू किए हुए है। इस नाकाबंदी का मकसद ईरान की तेल निर्यात क्षमता को सीमित करना और उस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना बताया जा रहा है। अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने हाल ही में जानकारी दी थी कि होर्मुज से तेल का प्रवाह बढ़ रहा है।

होर्मुज को लेकर ट्रंप का बड़ा दावा
होर्मुज को लेकर ट्रंप का बड़ा दावा | Image: ANI

ईरान अमेरिका युद्ध किस ओर जाएगा, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। अमेरिका और ईरान हर रोज अपने-अपने दावे कर रहे हैं। इस बीच होर्मुज को लेकर दोनों देशों के बीच खींचतान जारी है। ताजा घटना क्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर बड़ा दावा किया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया ट्रुथ पर एक पोस्ट में लिखा है कि होर्मुज पर अमेरिका का पूर्ण नियंत्रण है।

क्या है डोनाल्ड ट्रंप का बयान?

डोनाल्ड ट्रंप ने आज 12 अगस्त 2026 पर सोशल मीडिया ट्रुथ पर पोस्ट कर कहा कि हमने होर्मुज पर स्टील की दीवार बना दी है। अब ईरान के पास कोई विकल्प नहीं है। होर्मुज पर अमेरिका का पूर्ण नियंत्रण है और हम इसे बनाए रखेंगे।

उन्होंने आगे कहा कि ईरान के पास अब कोई नौसेना या वायुसेना नहीं बची है। IRGC लगभग खत्म हो चुक है और वह भाग रही है। बचे हुए सैनिकों को वेतन नहीं मिल रहा, नेतृत्व अनिश्चित है। ईरान देश आर्थिक रूप से बर्बाद हो चुका है और महंगाई 300 प्रतिशत के आसपास पहुंच गई है। ट्रंप ने कहा कि ईरान अब “मिडिल ईस्ट का बुली नहीं रहा”। ट्रंप ने कहा कि उनके पास सिर्फ फेक न्यूज और बढ़ती महंगाई बची है।

US नौसैनिक नाकाबंदी का क्या है मतलब?

अमेरिका पिछले कई महीनों से ईरानी बंदरगाहों पर नौसेनिक नाकाबंदी लागू किए हुए है। इस नाकाबंदी का मकसद ईरान की तेल निर्यात क्षमता को सीमित करना और उस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना बताया जा रहा है। अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने हाल ही में जानकारी दी थी कि होर्मुज से तेल का प्रवाह बढ़ रहा है। ट्रंप ने इस नाकाबंदी को 'स्टील की दीवार' करार दिया है। उन्होने दावा किया कि ईरान इसे चुनौती देने की स्थिति में नहीं है।

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क्या है इस मुद्दे पर ईरान की प्रतिक्रिया?

ईरान ने ट्रंप के ‘पूर्ण नियंत्रण’ वाले दावे को खारिज कर दिया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि जलडमरूमध्य तब तक पूरी तरह नहीं खुलेगा जब तक अमेरिका अपनी मौजूदा नीति नहीं बदलता और उनकी शर्तों को स्वीकार नहीं करता।

होर्मुज क्यों बना अमेरिका-ईरान तनाव का केंद्र?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री ऊर्जा मार्गों में शामिल है। फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित यह संकरा जलमार्ग वैश्विक तेल और गेस आपूर्ति के लिए बेहद खास है।

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यही वजह है कि होर्मुज में लंबे समय तक किसी भी तरह की रुकावट का असर सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। इससे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग, तेल की कीमतों और वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है। ऐसे में ट्रंप प्रशासन के लिए होर्मुज को दोबारा सामान्य रूप से खुलवाना एक अहम रणनीतिक और आर्थिक लक्ष्य बन गया है।

होर्मुज खोलने के बदले ईरान की क्या हैं बड़ी मांगें?

सबसे बड़ी चुनौती यह है कि ईरान ने कथित तौर पर होर्मुज में सामान्य आवाजाही बहाल करने के बदले कई कड़ी शर्तें रखी हैं। तेहरान की मांगों में युद्ध की स्थायी रूप से खत्म करना, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाना और क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य बलों की वापसी शामिल बताई जा रही है। इसके साथ ही तेहरान अमेरिका से ईरान पर लगाए गए प्रतिबंध हटाने और विदेशों में फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों को जारी करने की मांग कर रहा है।

इसके अलावा ईरान कथित तौर पर युद्ध के हुए नुकसान के लिए मुआवजे और क्षेत्र में ईरान से जुड़े सशस्त्र समूहों के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई रोकने की भी मांग कर रहा है।

युद्ध की वर्तमान स्थिति और वैश्विक प्रभाव

ट्रंप का यह बयान उस समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत ठप पड़ी हुई है और मिडिल इस्ट में तनाव जारी है। वैश्विक तेल बाजार होर्मुज की स्थिति पर बारीकी से नजर गड़ाए हुए है। बता दें कि सामान्य समय में दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल इसी अहम जलमार्ग से गुजरता है। 

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Published By:
 Sujeet Kumar
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