'अभी फाइनल नहीं है, अगर मुझे पसंद नहीं आया तो फिर से बम गिराकर धुआं-धुआं कर देंगे', MoU पर साइन करने से पहले ट्रंप ने दी ईरान को खुली धमकी

Donald Trump ने ईरान के MoU को अंतिम नहीं बताया। उन्होंने कहा कि अगर पसंद नहीं आया या ईरान ने नियम तोड़े तो अमेरिका बमबारी शुरू कर देगा। समझौते पर शुक्रवार को औपचारिक हस्ताक्षर होने हैं।

Donald Trump issued an open threat to Iran before signing the MoU
ट्रंप ने दी ईरान को खुली धमकी | Image: Republic

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ हुए एक महत्वपूर्ण समझौते (MoU) को लेकर साफ चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यह समझौता अभी अंतिम नहीं है। अगर उन्हें यह पसंद नहीं आएगा या ईरान ने नियम नहीं माने, तो अमेरिका फिर से बमबारी शुरू कर सकता है।

अमेरिका और ईरान के बीच MoU पर शुक्रवार को औपचारिक हस्ताक्षर होने वाला है। यह बयान फ्रांस के एवियन में चल रहे G7 शिखर सम्मेलन के दौरान मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सीसी के साथ द्विपक्षीय बैठक में दिया गया। ट्रंप ने कहा,

“यह अंतिम नहीं है। यह एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग है। अगर मुझे यह पसंद नहीं आया तो हम वापस उनकी तरफ गोलीबारी शुरू कर देंगे, उनके सिर पर बम गिरा देंगे। अगर मुझे पसंद नहीं आया, अगर वे व्यवहार नहीं सुधारते, तो हम सीधे उनके सिर के बीच में बम गिरा देंगे। क्योंकि वे पिछले 47 सालों से गलत व्यवहार कर रहे हैं।”

MoU की मुख्य शर्तें

यह समझौता परफॉर्मेंस-बेस्ड है। इसमें ईरान को सैंक्शंस राहत तभी मिलेगी जब वह अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करेगा। अभी तक ईरान को कोई वित्तीय सहायता या सैंक्शंस राहत नहीं दी गई है।

  • ईरान को अपने समृद्ध यूरेनियम स्टॉकपाइल को खत्म करना होगा।
  • परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए सत्यापन व्यवस्था को स्वीकार करना होगा।
  • समझौते के तहत ईरान को वैश्विक अर्थव्यवस्था में फिर से शामिल होने का अवसर मिलेगा, बशर्ते वह नियमों का पालन करे।

डिजिटल हस्ताक्षर और कोई तत्काल राहत नहीं

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बताया कि दोनों पक्षों ने पहले ही डिजिटल रूप से समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। औपचारिक हस्ताक्षर शुक्रवार को होने वाले हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने बताया कि ईरान को अभी कोई पैसे या प्रतिबंध हटाने की राहत नहीं मिलेगी। राहत सिर्फ तभी मिलेगी जब ईरान अच्छा व्यवहार करेगा।

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अमेरिका का दावा है कि इस समझौते का मकसद ईरान को विश्व की अर्थव्यवस्था में वापस लाना है, लेकिन शर्त यह है कि वह नियमों का पालन करे।

इजरायल का रुख

समझौते को लागू करने में इजरायल का रुख एक बड़ी चुनौती बन सकता है। इजरायल इस MoU से बंधा नहीं है और उसने लेबनान में अपनी सेनाएं बनाए रखने का फैसला किया है। इजरायल ने अमेरिका-ईरान के इस शांति समझौते का खुलकर विरोध किया है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि वे ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए लड़ाई जारी रखेंगे। कई इजरायली नेताओं और विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील इजरायल के हितों के खिलाफ है और इससे ईरान की क्षेत्रीय ताकत बढ़ सकती है।

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 Sagar Singh
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