'मैं लोगों की जान नहीं लेना चाहता', डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ कैंसिल किए 'भीषण हमले', ईरानी मीडिया ने कस दिया तंज
अमेरिका और इजरायल ईरान पर भीषण हमले की तैयारी में था, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने फिलहाल अपने कदम पीछे कर लिए हैं और हमला टालने का ऐलान किया है। उनके इस फैसले पर ईरानी मीडिया ने तंज कसा है।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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Donald Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले का फैसला टाल दिया है। उन्होंने अपने इस निर्णय को लेकर कहा कि ने निर्दोषों की जान नहीं लेना चाहते हैं। युद्ध में लोगों की मौत होती है और वे ऐसा नहीं चाहते। उन्होंने दावा किया कि इस बाबत उन्होंने सऊदी अरब के किंग और क्राउंड प्रिंस से बातचीत की थी, जिसके जवाब में उन्होंने कहा कि वे सैन्य कार्रवाई के बजाय एक समझौते को प्राथमिकता देंगे।
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने हालिया बयान में कहा, 'यह एक बहुत बड़ा हमला होने वाला था। यह हमला दूसरे विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा हमला होता। लेकिन उन्होंने (ईरान) हमसे ऐसा न करने को कहा। उन्होंने कहा कि कृपया ऐसा मत कीजिए। उनके पड़ोसियों ने भी यही कहा। इसलिए हम बस यह देखेंगे कि क्या हम परमाणु हथियार खत्म करने की दिशा में कोई समझौता कर सकते हैं या नहीं।'
सहयोगी देशों ने हमले टालने को कहा- ट्रंप
उन्होंने आगे कहा, 'सऊदी अरब, UAE, कतर और ईरान ने ऐसा (सैन्य हमले नहीं करने को) करने को कहा। हम पूरी तरह तैयार थे। यह एक बहुत बड़ा हमला होता। लेकिन जब सहयोगी देश इसे टालने के लिए कहते हैं, तो आपको सोचना पड़ता है, देखते हैं क्या होता है। और उनके ऐसा कहने की वजह यह है कि उन्हें लगता है कि कोई डील हो सकती है। होर्मुज पर एक डील हो सकती है, फिर न्यूक्लियर मामले पर भी डील होगी।'
ट्रंप का दावा- ईरान डील करना चाहता है
ट्रंप ने कहते हैं कि मैं इसे ईरान का डी-न्यूक्लियरइजेशन (परमाणु हथियार खत्म करना) कहता हूं। हम अभी रुके हुए हैं। लेकिन हम जब चाहें तब हमला कर सकते हैं। ईरान ने भी हमसे कहा है कि वे डील करना चाहते हैं। अब, मुझे नहीं पता कि वे क्या कहते हैं क्योंकि कई बार वे मुझसे कुछ कहते हैं और फिर बाद में कहते हैं कि उन्हें नहीं पता कि मैं किस बारे में बात कर रहा हूं। वे नहीं चाहते कि उन पर हमला हो, क्योंकि उन्हें हमले की गंभीरता का अंदाजा था।'
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अमेरिका-ईरान के बीच बैठक
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अब हम बातचीत (नेगोशिएशन) के जरिए ईरान से बात कर रहे हैं, जो सोमवार दोपहर शुरू होगी। मैं ऐसा करना पसंद करूंगा। इससे बहुत सारी जानें बचेंगी। बहुत सारी बेकार की ताकत का इस्तेमाल बचेगा। इसे दोबारा बनाने में बहुत साल लग जाते हैं। सच कहूं तो, सऊदी अरब भी नहीं चाहता था कि ऐसा (हमला) हो।
मैं लोगों की जान नहीं लेना चाहता- ट्रंप
इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि मैं लोगों की जान नहीं लेना चाहता क्योंकि लोगों की मौत होती है। इसलिए हम ऐसा नहीं चाहते। मैंने सऊदी अरब के किंग और क्राउन प्रिंस से पूछा। मैंने कहा, क्या आप चाहेंगे कि हम ऐसा करें या नहीं? उन्होंने कहा कि हम एक डील (समझौता) को ज्यादा पसंद करेंगे, क्योंकि आपको नहीं पता कि ये हमले कहां तक जाएंगे। मेरा मतलब है, उनके देश में लोगों की बाढ़ आ जाएगी और यह एक बड़ी मुसीबत होगी। बहुत सी बुरी चीजें हो सकती हैं।
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ईरान ने भी दी थी धमकी
बता दें कि शुक्रवार को खबर आई थी कि अमेरिका और इजरायल ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर बड़े हमले की तैयारी कर रहे हैं। इस बीच, शनिवार को अमेरिका ने अपने नागरिकों को पश्चिम एशिया से कभी भी निकलने के लिए तैयार रहने की सलाह तक दे दी, जिसके बाद मामला गंभीर माना जा रहा था। इसे देखते हुए ईरान ने भी साफ चेतावनी दी कि अगर हमला हुआ तो जवाब सिर्फ अमेरिका या इजरायल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सऊदी अरब, UAE, कतर और पूरे खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा ठिकाने निशाने पर होंगे। इसके बाद सबसे ज्यादा बेचैनी सऊदी अरब में बढ़ी। आखिरकार क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से सीधे बात की और तनाव कम करने का आग्रह किया। इसके बाद अब ट्रंप ने फिलहाल हमला टालने की घोषणा कर दी है।
ईरानी मीडिया ने उड़ाया मजाक
ईरानी मीडिया ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सैन्य कार्रवाई टालने और बातचीत शुरू करने के फैसले पर तीखा तंज कसा है। स्थानीय मीडिया का दावा है कि अमेरिका में सैन्य कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं बची है, इसलिए वह अब केवल बातचीत का बहाना बना रहा है। इसी सिलसिले में ईरान की अर्ध-सरकारी न्यूज एजेंसी 'फार्स' ने ट्रंप पर सीधा हमला बोलते हुए तंज किया कि 'बेवकूफ की हवा निकल गई है।'