US Iran War: 'ईरान ने सीजफायर की गुजारिश की', जंग के बीच ट्रंप का बड़ा दावा, बोले- होर्मुज खोल दे वरना इतना बम मारेंगे कि पाषाण युग में...
US Iran war news: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के नए राष्ट्रपति ने अमेरिका से सीजफायर की मांग की है। इसके लिए उन्होंने ईरान के सामने एक शर्त रखी और साथ ही धमकी भी दी।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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Donald Trump news: ईरान जंग को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक और बयान आया है। उन्होंने कहा है कि ईरान ने अमेरिका से सीजफायर की मांग की है। साथ ही ट्रंप ने यह शर्त भी रख दी कि वो इस पर तभी विचार करेंगे, जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह से खुला, स्वतंत्र और सुरक्षित हो जाएगा।
‘ईरान के नए राष्ट्रपति कहीं अधिक बुद्धिमान’
ट्रंप ने कुछ देर पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर किए गए पोस्ट की ईरान के नए शासन की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि ईरान के नए शासन के राष्ट्रपति- जो अपने पूर्ववर्तियों की तुलना में कहीं कम कट्टर और कहीं अधिक बुद्धिमान हैं... उन्होंने अभी-अभी संयुक्त राज्य अमेरिका से 'युद्धविराम' (Ceasefire) का अनुरोध किया है।
‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज नहीं खुला तो…’
ट्रंप ने कहा कि हम इस पर तभी विचार करेंगे, जब होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) पूरी तरह से खुला, स्वतंत्र और सुरक्षित हो जाएगा। तब तक, हम ईरान को पूरी तरह से तबाह कर देंगे या जैसा कि कहा जाता है, उसे वापस 'पाषाण युग' (Stone Ages) में धकेल देंगे।

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'होर्मुज खुलेगा, लेकिन आपके लिए नहीं...'
इससे पहले ईरान ने अमेरिका पर पलटवार किया था। ईरानी संसद के राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने अपने इरादे साफ करते हुए कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलेगा, लेकिन आपके आपके लिए नहीं।
उन्होंने कहा कि आखिरकार, ट्रंप ने 'सत्ता परिवर्तन' का सपना पूरा कर लिया, लेकिन समुद्रों के शासन में। होर्मुज जलडमरूमध्य निश्चित रूप से खोला जाएगा, लेकिन आपके लिए नहीं। उन लोगों के लिए जो इस्लामी गणतंत्र ईरान के नए नियमों का पालन करते हैं। मेहमाननवाजी का 47 साल पुराना युग खत्म हो गया है।
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इससे पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिकी सेना ईरान में अपना ऑपरेशन बहुत जल्द खत्म कर देगी। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना अगले दो से तीन हफ्तों में ईरान छोड़ देगी। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान में 'रिजीम चेंज' का लक्ष्य पूरा हो चुका है, इसीलिए अमेरिका अब इस संघर्ष को लंबा खींचने के पक्ष में नहीं है।