Iran-US War: होर्मुज में कमर्शियल जहाजों पर फिर फायरिंग, जवाब में अमेरिका ने ईरान पर बरसाए बम; बंदर अब्बास, सिरिक समेत कई शहरों को किया धुआं-धुआं
मिडिल ईस्ट में हालात एक बार फिर बिगड़ते जा रहे हैं। ईरान और अमेरिका के बीच जंग शुरू होने से खाड़ी देशों में संकट खड़ा हो गया है।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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अमेरिका और ईरान के बीच जंग जारी है। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में एक बार फिर कमर्शियल जहाजों पर गोलीबारी की। इसके जवाब में अमेरिका सेना ईरान के कई शहरों पर भीषण बमबारी की है। बंदर अब्बास, सिरिक समेत कई शहरों में धमाकों की आवाज सुनी गई है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा है कि अगर ईरान होर्मुज में जहाजों पर फायरिंग बंद नहीं करता है तो उसे मुंहतोड़ जवाब मिलेगा।
मिडिल ईस्ट में हालात एक बार फिर बिगड़ते जा रहे हैं। ईरान और अमेरिका के बीच जंग शुरू होने से खाड़ी देशों में संकट खड़ा हो गया है। अमेरिका ने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) पर होर्मुज में कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाने का आरोप लगाया था, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में ईरान के कई शहरों पर भीषण बमबारी की गई।
होर्मुज में जहाजों पर फायरिंग के जवाब में एक्शन
सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने X पर एक पोस्ट में लिखा, "आज शाम 5 बजे ET पर, US सेंट्रल कमांड की सेनाओं ने ईरान के खिलाफ और हमले शुरू किए ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले आम नाविकों और कमर्शियल जहाजों पर हमला करने की उनकी क्षमता को और कम किया जा सके।" यह रास्ता दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
अमेरिका ने ईरान के इन शहरों को बनाया निशाना
ईरान ने दक्षिणी प्रांत में धमाकों की जानकारी दी है। ईरान के सरकारी मीडिया ने रविवार देर रात दक्षिणी ईरान के होर्मोजगन प्रांत में कई धमाकों की खबर दी। जास्क, केशम, बंदर अब्बास और सिरिक में धमाकों की खबर मिली, हालांकि स्थानीय अधिकारियों ने कहा कि इसमें किसी आम नागरिक की मौत नहीं हुई और न ही रिहायशी या कमर्शियल इंफ्रास्ट्रक्चर को कोई नुकसान पहुंचा है।
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ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई की निंदा की
ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका की हालिया कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि इन हमलों ने पश्चिम एशिया में तनाव कम करने के लिए पिछले कुछ महीनों में की गई कूटनीतिक कोशिशों को बेकार कर दिया है। मंत्रालय ने कहा है कि ये बर्बर हमले न केवल संयुक्त राष्ट्र चार्टर के बुनियादी सिद्धांतों का घोर उल्लंघन हैं। बल्कि अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा हैं।