तमिल मूल की भारतवंशी महिला नवनेथम 'नवी' पिल्लई को मिला शांति नोबेल पुरस्कार, डोनाल्ड ट्रंप का सपना फिर टूटा
1995 में रंगभेद खत्म होने के बाद नवनेथम पिल्लई को साउथ अफ्रीका उच्च न्यायालय में कार्यवाहक न्यायाधीश नियुक्त किया गया। फिर उन्हें संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा रवांडा के लिए अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण में न्यायाधीश के रूप में चुना गया। बाद में उन्हें 1 सितंबर 2008 को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त नियुक्त किया गया।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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साल 2026 के लिए नोबेल शांति पुरस्कार का ऐलान कर दिया गया है। भारतीय मूल की प्रसिद्ध मानवाधिकार रक्षक और न्यायविद महिला नवनेथम नवी पिल्लई को यह पुरस्कार दिया गया है। नार्वे की नोबेल समिति ने उन्हें यह पुरस्कार अंतरराष्ट्रीय कानून को मजबूत करने, रंगभेद के खिलाफ आवाज उठाने और दुनिया भर में मानवाधिकारों की रक्षा के लिए जीवन भर के योगदान के लिए दिया है। नवी पिल्लई दक्षिण अफ्रीका में पली बढ़ी हैं और वही उनकी कर्मभूमि रही है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नोबेल शांति पुरस्कार जीतने का सपना एक बार फिर टूट गया है। वो ऑपरेशन सिंदूर के बाद से ही लगातार कर रहे हैं कि उन्होंने 8 युद्ध खत्म कराए हैं। इसलिए उन्हें शांति नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए। लेकिन यह पुरस्कार इस बार भी उन्हें नहीं मिला। इस बार संयुक्त राष्ट्र की पूर्व मानवाधिकार प्रमुख भारतीय मूल की नवनेथम नवी पिल्लई को शांति का नोबेल पुरस्कार दिया गया है।
नोबेल जूरी ने आज शुक्रवार 9 सितंबर को नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा की।
नवनेथम पिल्लई दक्षिण अफ्रीका की 85 साल की न्यायधीश हैं। भारतीय मूल की पिल्लई दक्षिण अफ्रीका की नागरिक हैं। वह 1967 में अपने होमटाउन नेटाल में वकालत शुरू करने वाली पहली महिला थीं। इसके बाद अगले कुछ सालों में उन्होंने रंगभेद विरोधी कार्यकर्ताओं के लिए बचाव पक्ष की वकील के रूप में काम किया। पिल्लई ने क्वाजुलु-नताल विश्वविद्यालय में लेक्चरर के रूप में भी काम किया और बाद में डरबन वेस्टविले यूनिवर्सिटी की परिषद की उपाध्यक्ष भी नियुक्त की गईं।
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1995 में रंगभेद खत्म होने के बाद नवनेथम पिल्लई को साउथ अफ्रीका उच्च न्यायालय में कार्यवाहक न्यायाधीश नियुक्त किया गया। फिर उन्हें संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा रवांडा के लिए अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण में न्यायाधीश के रूप में चुना गया। बाद में उन्हें 1 सितंबर 2008 को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त नियुक्त किया गया।