SCO समिट में PM मोदी-पुतिन-जिनपिंग, रूसी राष्ट्रपति संग 50 मिनट की बैठक तय! किन मुद्दों पर होगी चर्चा?

प्रधानमंत्री मोदी अगले दो दिनों के लिए किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में रहने वाले हैं, जहां वह 26वें एससीओ शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यहां चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से उनकी मुलाकात हो सकती है।

Putin, PM Modi, Xi  Jinping
Putin, PM Modi, Xi Jinping | Image: ANI

PM Modi Kyrgyzstan Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर तक किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में रहेंगे, जहां वह 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। वैश्विक मंच पर इस समिट को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें रूस और चीन जैसे प्रमुख देशों के शीर्ष नेता भी शामिल हो रहे हैं, जिस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।

इस समिट के दौरान पीएम मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य देशों के नेताओं से मुलाकात होने की उम्मीद है। इससे इतर पीएम मोदी रूसी राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय बैठक कर सकते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच करीब 50 मिनट की बैठक होगी, जिसमें भारत-रूस संबंधों के साथ-साथ कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

मोदी-पुतिन की बातचीत का प्रमुख मुद्दा

मोदी-पुतिन की बातचीत में ऊर्जा सहयोग प्रमुख मुद्दा होने की उम्मीद है। यह मुलाकात इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि अगले महीने नई दिल्ली में प्रस्तावित BRICS शिखर सम्मेलन में भी दोनों नेताओं की मुलाकात होने की संभावना है।

भारत-रूस के बीच किन मुद्दों पर चर्चा संभव?

रूस भारत के लिए कच्चे तेल और उर्वरक का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। वर्तमान वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी अस्थिरता के बीच भारत के लिए रूसी ऊर्जा की आपूर्ति अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे में, दोनों देशों के नेता तेल और गैस आपूर्ति, उर्वरकों की उपलब्धता और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में चल रहे सहयोग की व्यापक समीक्षा कर सकते हैं। इसके साथ ही बैठक के एजेंडे में रक्षा सहयोग भी शामिल हो सकता है।

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PM मोदी का किर्गिस्तान दौरा क्यों अहम?

किर्गिस्तान में भारत के राजदूत बीरेंद्र सिंह यादव ने कहा था कि यह पीएम मोदी की किर्गिस्तान की तीसरी यात्रा होगी। प्रधानमंत्री की इस यात्रा से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

भारत के राजदूत ने कहा, ‘एससीओ समिट से इतर प्रधानमंत्री किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सादिर जापारोव के साथ द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे। दोनों नेता भारत-किर्गिस्तान संबंधों की व्यापक समीक्षा करने के साथ-साथ सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान पर भी विचार-विमर्श करेंगे। दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा देना भी बातचीत का अहम हिस्सा होगा।’

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पांच सालों में द्विपक्षीय व्यापार दोगुना- भारतीय राजदूत

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी की पिछली यात्रा के बाद पिछले पांच साल में द्विपक्षीय व्यापार दोगुना हो गया है। लेकिन अभी भी हमारे ट्रेड टर्नओवर का जो स्तर है वो क्षमता अनुरूप नहीं है। कोशिश यही रहेगी कि पीएम के मार्गदर्शन में हम आगे बढ़ें। भारत और किर्गिस्तान के बीच आर्थिक सहयोग की संभावनाएं काफी व्यापक हैं और दोनों पक्ष व्यापार को बढ़ाने तथा आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

बीरेंद्र सिंह यादव के मुताबिक, भारत-किर्गिस्तान के संबंधों में रक्षा और सुरक्षा सहयोग का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य दोनों देशों की क्षमताओं को मजबूत करना है, ताकि आतंकवाद, उग्रवाद, अलगाववाद और कट्टरपंथ जैसी साझा चुनौतियों का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके।

SCO में कुल कितने देश शामिल? 

बता दें कि यह सम्मेलन एससीओ के 25 साल पूरे होने के मौके पर हो रहा है। शंघाई सहयोग संगठन में कुल 10 देश शामिल हैं। चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने मिलकर साल 2001 में एससीओ की स्थापना की थी। भारत साल 2017 से एससीओ का सक्रिय सदस्य रहा है। जबकि पाकिस्तान भी साल 2017 में इस संगठन का पूर्ण सदस्य बना। इसके बाद साल 2023 में ईरान और साल 2024 में बेलारूस को इसके पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल किया गया।

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Published By:
 Priyanka Yadav
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