अपडेटेड 26 March 2026 at 08:17 IST
PNB घोटाले में नीरव मोदी के प्रत्यर्पण का रास्ता साफ, लंदन हाई कोर्ट ने ठुकराई पुनर्विचार याचिका
लंदन हाई कोर्ट ने भगोड़े नीरव मोदी की प्रत्यर्पण प्रक्रिया दोबारा खोलने की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि मामले में असाधारण परिस्थितियां नहीं हैं। सीबीआई की मजबूत तैयारी और क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस के प्रयासों से यह सफलता मिली। अब पीएनबी घोटाले के आरोपी नीरव मोदी के प्रत्यर्पण का रास्ता और साफ हो गया है।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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भगोड़े नीरव मोदी को लंदन की हाई कोर्ट ऑफ जस्टिस (किंग्स बेंच डिवीजन) से बड़ा झटका लगा है। 25 मार्च 2026 को हाई कोर्ट ने हीरे के व्यापारी नीरव मोदी की प्रत्यर्पण प्रक्रिया दोबारा खोलने की याचिका को खारिज कर दिया। नीरव मोदी ने भारत में अपने प्रत्यर्पण के मामले को फिर से खोलने की मांग की थी।
लंदन हाई कोर्ट का यह फैसला पंजाब नेशनल बैंक (PNB) घोटाले से जुड़े मामले में भारत की प्रत्यर्पण मांग को मजबूत करता है। भगोड़े नीरव मोदी पर भारत में करीब 13,000 करोड़ के PNB घोटाले से जुड़े होने का आरोप है। CBI के अनुसार, अदालत ने कहा कि याचिका और उससे जुड़ी परिस्थितियां इतनी असाधारण नहीं हैं कि मामले को दोबारा खोला जाए। अदालत ने यह भी माना कि याचिका में उठाए गए आधार, जिसमें भंडारी फैसले का हवाला शामिल था, पर्याप्त नहीं थे।
CBI की मजबूत तैयारी
क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (CPS) के वकील ने याचिका का पुरजोर विरोध किया। उन्हें सीबीआई की टीम का पूरा सहयोग मिला, जिसमें जांच अधिकारी भी शामिल थे, जो विशेष रूप से सुनवाई के लिए लंदन पहुंचे थे। CBI के प्रवक्ता ने कहा, “पुनर्विचार याचिका भंडारी फैसले के आधार पर दायर की गई थी, लेकिन सीबीआई के निरंतर और समन्वित प्रयासों से इस चुनौती को सफलतापूर्वक पार कर लिया गया।”
2019 में आर्थिक अपराधी घोषित
नीरव मोदी पर आरोप है कि उसने 2018 में PNB को 6,498.20 करोड़ रुपये का चूना लगाया। कथित तौर पर फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग के जरिए यह धोखाधड़ी की। नीरव को 2019 में आर्थिक अपराधी घोषित किया गया था।
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उसके बाद 19 मार्च 2019 को भारत के प्रयासों से ब्रिटेन में उसकी गिरफ्तारी हुई। उसके बाद यूके की अदालतों ने प्रत्यर्पण को मंजूरी दी और पहले की अपीलें खारिज कर दीं। अदालतों ने भारत में उसके साथ उचित व्यवहार के आश्वासनों को स्वीकार किया और कोई कानूनी बाधा नहीं पाई। एक अस्थायी कानूनी अड़चन के कारण प्रक्रिया में देरी हुई, जिसे अगस्त 2025 में हटा दिया गया।
नीरव मोदी ने अपनी अपील दोबारा खोलने की मांग की थी, जिसमें भारत में संभावित दुर्व्यवहार की आशंका जताई गई थी और भारतीय अधिकारियों द्वारा दिए गए आश्वासनों पर सवाल उठाए गए थे।
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अदालत का फैसला
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा कि याचिका में बताई गई परिस्थितियां असाधारण परिस्थितियों के स्तर को पूरा नहीं करतीं। इसलिए मामले को दोबारा खोलना उचित नहीं है। यह फैसला नीरवमोदी के लिए एक बड़ा झटका है और प्रत्यर्पण की राह को और साफ करता है।
सीबीआई ने 2018 से नीरव मोदी के प्रत्यर्पण के लिए लगातार प्रयास किए हैं। नीरवमोदी फिलहाल लंदन की जेल में बंद हैं और उन पर भारत में धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग समेत कई गंभीर आरोपों का मुकदमा चलना है।
Published By : Sagar Singh
पब्लिश्ड 26 March 2026 at 06:56 IST