'भारत की जमीन पर कब्जा किया', संसद में बयान देकर घिरे नेपाली PM बालेन शाह, चौतरफा आलोचना के बाद अब आई विदेश मंत्रालय की सफाई
Nepal: प्रधानमंत्री बालेन शाह ने नेपाली संसद में कहा था कि प्रधानमंत्री बनने के बाद मुझे पता चला कि न केवल भारत ने नेपाल की जमीन पर कब्जा किया है, बल्कि नेपाल ने भी कई जगहों पर भारत की जमीन पर कब्जा किया है। उनके इसी बयान पर बवाल है।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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Nepal PM Balen Shah Controversial Statement: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के भारत को लेकर दिए एक बयान पर बड़ा बवाल खड़ा हो गया। उन्होंने संसद में भारत की जमीन पर कब्जा करने का बड़ा दावा किया, जिस पर हंगामा मच गया। इसे लेकर नेपाल में राजनीतिक दलों और लोगों ने बालेन शाह की तीखी आलोचना की। विपक्ष ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। विरोध बढ़ता देख नेपाल के विदेश मंत्रालय ने अब उनके बयान पर सफाई दी है और बताया कि नेपाली पीएम के बयान का मतलब क्या था?
विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
रविवार (31 मई) को एक बयान जारी करते हुए नेपाली विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि प्रधानमंत्री का बयान विशेष रूप से बॉर्डर पर नो-मैन्स लैंड क्षेत्र में अतिक्रमण से जुड़ा था। इसे किसी सरकारी कब्जे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
मंत्रालय ने कहा कि भारत और नेपाल की मौजूदा सीमा 1816 की सुगौली संधि पर आधारित है। नदी वाले इलाकों में नेपाल-भारत की सीमा को फिक्स्ड बाउंड्री सिद्धांत के आधार पर तय किया गया था। इसके चलते ऐसी स्थिति बन गई है कि एक देश के नागरिक दूसरे देश के अधिकार क्षेत्र वाली जमीन पर खेती करते हैं या रहते भी हैं।
मंत्रालय ने कहा कि एक तकनीकी समिति के अध्ययन में यह सामने आया है कि नेपाल जिस भूमि का अभी उपयोग कर रहा है और जिस पर उसका कब्जा है, वह तकनीकी रूप से भारत की सीमा के अंदर आ सकती है। ठीक उसी तरह, भारत जिस भूमि का उपयोग और कब्जा कर रहा है, वह नेपाली क्षेत्र में आ सकती है।
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'लंबित सीमा मुद्दे बातचीत से सुलझेंगे'
नेपाली विदेश मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि नेपाल और भारत दोनों ही देश सभी लंबित सीमा मुद्दों को द्विपक्षीय बातचीत और कूटनीति के जरिए सुलझाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। प्रधानमंत्री शाह ने संसद में ही लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी जैसे मुद्दों पर भी बात की और कहा कि नेपाल ने इन पर भारत को डिप्लोमैटिक नोट भेजा है और भारत की तरफ से जवाब भी आ चुका है। उन्होंने टेबल टॉक्स (बैठक) के जरिए विवाद सुलझाने का प्रस्ताव रखा।
क्या था बालेन शाह का विवादित बयान?
नेपाल के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह रविवार (31 मई, 2026) को संसद में अपनी पहली उपस्थिति दे रहे थे। एक सांसद ने उनसे लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी क्षेत्रों को लेकर सरकार का रुख पूछा, तब बालेन शाह ने कहा, "प्रधानमंत्री बनने के बाद मुझे पता चला कि न केवल भारत ने नेपाल की जमीन पर कब्जा किया है, बल्कि नेपाल ने भी कई जगहों पर भारत की जमीन पर कब्जा किया है।"
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यह पहली बार था जब किसी नेपाली प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक रूप से नेपाल की तरफ से अतिक्रमण की बात स्वीकार की। शाह ने यह भी कहा कि इस सीमा विवाद में चीन और ब्रिटेन को भी शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने भारत, चीन के साथ-साथ यूके सरकार से भी इस मामले पर बात की है।