नेपाल में बाढ़ से त्राहिमाम... जलप्रलय ने लील ली 90 से ज्यादा लोगों की जिंदगियां, 133 भारतीय समेत 400 से ज्यादा लापता; अब तक क्या-क्या हुआ?
नेपाल में तिब्बत की सीमा से लगे रसुवा और आसपास के जिलों में अचानक आई बाढ़ से तबाही मची हुई है। बुधवार सुबह तिब्बत की दिशा से भोटेकोशी नदी में अचानक पानी का तेज बहाव आया जिसमें कई इलाके चपेट में आ गए।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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Nepal Flood: नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार सुबह भोटेकोशी नदी में अचानक आई भीषण फ्लैश फ्लड ने देश के कई हिस्सों में भारी तबाही हुई है। बाढ़ के पानी के प्रचंड बहाव ने नदी किनारे बसे कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे तकरीबन 6 से ज्यादा जिले पूरी तरह डूब गए। इस त्रासदी में बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है, जहां कई पुल टूट गए हैं और सड़कें जमींदोज हो चुकी हैं। इस विनाशकारी आपदा में अब तक 90 से अधिक लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है।
नेपाल पुलिस के मुताबिक, बाढ़ में मरने वालों की संख्या 100 पहुंच गई है। जबकि अब तक 579 लोग लापता बताए जा रहे हैं। इनमें 133 भारतीय समेत 300 से ज्यादा विदेशी पर्यटक शामिल हैं। लापता पर्यटकों में 113 नेपाल के नागरिक, 54 अमेरिकन और 33 ब्रिटेन के लापता नागरिक हैं। हालांकि, अभी कई अन्य विदेशी पर्यटकों की राष्ट्रीयता की पुष्टि होना बाकी है।
युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव अभियान जारी
इस भीषण संकट को देखते हुए नेपाल सेना ने प्रभावित क्षेत्रों में कमान संभाल ली है। फंसे हुए नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है। वहीं, लापता यात्रियों की सटीक डिटेल्स जुटाने के लिए नेपाल प्रशासन और ट्रैवल एजेंसियां लगातार प्रयास कर रही हैं।
80 से ज्यादा लोगों को किया गया रेस्क्यू
'द काठमांडू पोस्ट' के मुताबिक, रसुवा कस्टम्स ऑफिस के प्रमुख राजेंद्र ढुंगाना ने पुष्टि की है कि तिमुरे ऑफिस में तैनात 15 कर्मचारी लापता हैं। अभी बड़े पैमाने पर हवाई बचाव और मेडिकल निकासी का काम चल रहा है। सेना के प्रवक्ता राजाराम बस्नेत ने बताया कि नेपाली सेना ने 88 लोगों को सुरक्षित बचा लिया है, जिनमें से 13 घायलों को काठमांडू के त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है, जबकि बाकी लोगों का इलाज त्रिशूली कैंप में किया जा रहा है या उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
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पीएम मोदी ने बालेन शाह से की बात
इस मुश्किल घड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह को फोन कर बात की। उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर ट्वीट कर लिखा, 'प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बात की और नेपाल में बाढ़ से हुई जान-माल की हानि पर संवेदना व्यक्त की। इस मुश्किल समय में भारत के लोग नेपाल में अपने भाई-बहनों के साथ एकजुटता से खड़े हैं। भारत नेपाल को हर संभव मानवीय सहायता देने के लिए तैयार है। हमारी टीमें बचाव और राहत कार्यों के लिए मिलकर काम कर रही हैं।'
नेपाल के PMO ने जताया आभार
नेपाल के पीएमओ ने एक्स पर पीएम मोदी के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए लिखा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आपके फोन कॉल और गहरी संवेदनाओं के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। इस मुश्किल समय में नेपाल के प्रति एकजुटता दिखाने वाले आपके स्नेहपूर्ण शब्दों और मदद की उदार पेशकश की हम दिल से सराहना करते हैं। एकजुटता का यह भाव हमारे दोनों देशों के बीच दोस्ती के मजबूत रिश्तों को दर्शाता है, जिन्हें हम बहुत महत्व देते हैं।'
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प्रभावित जिले 'संकट-ग्रस्त क्षेत्र' घोषित
इस बीच नेपाल सरकार ने 'आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन अधिनियम, 2074' की धारा 32 के तहत आपदा से प्रभावित जिलों के इलाकों को तीन महीने के लिए 'संकट-ग्रस्त क्षेत्र' घोषित किया है। यह फैसला मंत्रिपरिषद की बैठक में लिया गया। यह बैठक तिब्बत सीमा के पास रासुवागढ़ी से भोटेकोशी नदी में आए विनाशकारी बाढ़ (फ़्लैश फ्लड) के बाद हुई।