पूरी एयर फोर्स तैयार थी, स्क्वाड्रनों की ब्रिफिंग चल रही थी, लेकिन तभी आया एक फोन... पिछले हफ्ते ईरान पर सबसे बड़ा हमला करने वाला था इजरायल
इजरायली वायुसेना प्रमुख मेजर जनरल ओमर तिश्लर ने पुष्टि करते हुए बताया कि पिछले हफ्ते ईरान पर बड़ा हमला होने वाला था। 8 जून को पूरी वायुसेना सैकड़ों लक्ष्यों पर हमले के लिए तैयार थी। अमेरिका-ईरान समझौते के बाद प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने इसे रोक दिया।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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पिछले हफ्ते ईरान पर एक बहुत बड़ा हमला करने की पूरी तैयारी हो चुकी थी, लेकिन इसे आखिरी समय में रोक दिया गया। इजरायल के वायुसेना प्रमुख मेजर जनरल ओमर तिश्लर (Maj. Gen. Omer Tischler) ने इसकी पुष्टि है। उन्होंने बताया कि पूरी एयर फोर्स तैयार थी। स्क्वाड्रनों में ब्रिफिंग चल रही थी। हमले से सिर्फ एक घंटे पहले सब कुछ रोक दिया गया।
इजरायली वायुसेना प्रमुख ने बताया कि 8 जून 2026 को दोपहर में वायुसेना बल एक व्यापक हमले के लिए तैयार था। यह हमला ईरान के अंदर सैकड़ों जगहों पर होने वाला था। यह घटना इजरायल और ईरान के बीच पिछले हफ्ते छिड़े संघर्ष के दौरान हुई। अप्रैल 2026 की शुरुआत में सीजफायर के बाद यह पहला बड़ा टकराव था। मेजर जनरल ओमर तिश्लर ने बताया-
“अगले दिन दोपहर में पूरी वायुसेना एक व्यापक हमले के लिए उड़ान भरने को तैयार थी। हमले के आदेश से कुछ घंटे पहले ही अलर्ट पीरियड को छोटा करते हुए, पूरे बेड़े को आर्मिंग, प्लानिंग और तैयार करते हुए सैकड़ों लक्ष्यों पर हमला करने की तैयारी चल रही थी, लेकिन हमला स्क्वाड्रनों में ब्रिफिंग के दौरान ही रोक दिया गया।”
क्यों रोका गया हमला?
इजरायल की पूरी वायुसेना इस ऑपरेशन के लिए तैयार थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर कई बार बात की। ट्रंप ने कहा कि अगर इजरायल और हमले बढ़ाएगा तो उसे अकेला छोड़ दिया जाएगा। नेतन्याहू ने ट्रंप की बात मान ली और हमला रोकने का आदेश दे दिया। इसके बाद अमेरिका और ईरान के बीच समझौता हो गया, जिससे युद्ध को खत्म करने की कोशिश शुरू हुई।
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पिछले हफ्ते क्या हुआ था?
हिजबुल्लाह ने उत्तरी इजरायल पर रॉकेट दागे थे। इसके जवाब में इजरायल ने बेरूत के दहियेह इलाके पर हमला किया। इसके बाद ईरान ने इजरायल पर 24 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जबकि यमन के हूती विद्रोहियों ने भी दो मिसाइलें चलाईं। इजरायल ने जवाब देते हुए ईरान पर हमले किए। एयरफोर्स ने 1500 किलोमीटर दूर जाकर ईरान की हवाई सुरक्षा प्रणालियों को काफी नुकसान पहुंचाया और कुछ फैक्ट्रियों पर भी हमला किया, लेकिन जो बहुत बड़ा हमला होने वाला था, वह नहीं हुआ।
वायुसेना ने ईरान के अंदर दो लहरों में हमले किए। पहली लहर में पश्चिमी और मध्य ईरान में नौ वायु रक्षा प्रणालियों को निशाना बनाया गया। दूसरी लहर में दक्षिण-पश्चिमी ईरान के पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स की तीन फैक्ट्रियों पर हमला किया गया, जो मिसाइलों के कच्चे माल के उत्पादन से जुड़ी थीं।