अपडेटेड 16 March 2026 at 07:51 IST
US-Iran War: 'न सीजफायर और न ही बातचीत', ईरान ने ट्रंप के दावों को झुठलाया, विदेश मंत्री बोले- तब तक करेंगे अपनी रक्षा, जब तक...
US-Iran War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान समझौता करना चाहता है, लेकिन मैं ऐसा नहीं करना चाहता। उनके इस बयान को अब ईरान ने झूठा बताया है। विदेश मंत्री ने कहा कि न तो हमने कभी सीजफायर की मांग की है और न ही बातचीत की।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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US-Iran War: ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन दावों को झूठा बताया है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि ईरान सीजफायर की मांग कर रहा है। ईरानी विदेश मंत्री सईद अब्बास अराघची ने कहा कि न तो हमने कभी सीजफायर की मांग की और न ही बातचीत। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि हम तब तक अपनी आत्मरक्षा करेंगे, जब तक इसकी जरूरत होगी।
‘जब हम बातचीत कर रहे थे तब उन्होंने हमला किया’
एक इंटरव्यू में ईरान के विदेश मंत्री सईद अब्बास अराघची ने कहा कि हमें अमेरिकियों से बात करने की कोई वजह नहीं दिखती। जब हम उनसे बात कर रहे थे, तब उन्होंने हम पर हमला किया। तेहरान ने इसका जवाब दिया और हम तब तक अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखेंगे, जब तक अमेरिका इस युद्ध को समाप्त नहीं करता है।
बताया कब तक जारी रहेगा युद्ध?
वहीं, सीजफायर की मांग वाले बयान पर उन्होंने कहा कि हमने इसकी मांग नहीं की है, बल्कि हमने तो बातचीत की भी कभी मांग नहीं की। राष्ट्रपति ट्रंप जब तक यह नहीं मान लेते कि यह एक गैर-कानूनी युद्ध है, जिसमें उनको कोई जीत नहीं मिल सकती है, तब तक ईरान अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखेगा।
अराघची ने इस दौरान खाड़ी देशों पर हमलों का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि हम केवल अमेरिकी संपत्तियों, अमेरिकी प्रतिष्ठानों और अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहे हैं। ये वे देश हैं जिन्होंने अमेरिकी सेनाओं को हम पर हमला करने के लिए अपनी जमीन दी है।
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ट्रंप ने किया था ये दावा
शनिवार (14 मार्च) को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा था कि ईरान समझौता करना चाहता है, लेकिन मैं ऐसा करना नहीं चाहता। इसकी वजह यह है कि उनकी शर्तें ठीक नहीं हैं।
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच पिछले 2 हफ्तों से भीषण संघर्ष जारी है। इसकी शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के ईरान पर संयुक्त हमले से हुई थी, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई सहित कई बड़े अधिकारी मारे गए थे। उसके बाद से ईरान और उसके प्रॉक्सी ग्रुप्स लगातार जवाबी कार्रवाई कर रहे हैं। क्षेत्रीय स्तर पर खाड़ी देशों पर भी ईरान के ड्रोन और मिसाइल हमले हो रहे हैं। वहीं, इजराइल ने ईरान और लेबनान में जवाबी हमले किए हैं, जिसमें सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है।
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Published By : Ruchi Mehra
पब्लिश्ड 16 March 2026 at 07:51 IST