BREAKING: मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच भारत को ईरान ने दी बड़ी राहत, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारतीय जहाजों को गुजरने की दी छूट

ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के उपाध्यक्ष अहमद हयात-मोगाद्दम ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में लागू पाबंदियों से भारतीय जहाजों को छूट दी गई है।

INS Garima Transits Strait of Hormuz Amidst Tensions
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारतीय जहाजों को गुजरने की दी छूट | Image: AI

मिडिल ईस्ट में बढ़ते रणनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही पर कड़े प्रतिबंधों के बीच भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक राहत भरी खबर सामने आई है। ईरानी सरकार ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में लागू पाबंदियों से भारतीय जहाजों को छूट दी गई है। ईरान ने भारत के साथ-साथ चीन, इराक और कतर को इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से जहाजों की आवाजाही के लिए विशेष छूट प्रदान की है।

ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के उपाध्यक्ष अहमद हयात-मोगाद्दम ने कहा कि पारगमन (ट्रांजिट) पाबंदियों से छूट दी गई है। भारत, चीन, इराक और कतर के जहाज बिना किसी रोक-टोक के इस जलमार्ग से गुजर सकते हैं। आर्थिक और सुरक्षा हालात की समीक्षा के लिए आयोजित एक बैठक में बोलते हुए, हयात-मोगाद्दम ने कहा, "होर्मुज जलडमरूमध्य के मामले में, हमने चार देशों को 'छूट' दी है। वे स्वतंत्र हैं, यानी हमारी नजर में उन पर कोई पाबंदी नहीं है।

भारत को ईरान ने क्यों दी छुट?

अमेरिका को भी उनसे कोई दिक्कत नहीं है। वे होर्मुज जलडमरूमध्य से आते-जाते रहते हैं। आखिरकार, हम व्यापार ही तो कर रहे हैं, है ना? हमने भारतीयों के लिए ऐसा इसलिए किया है ताकि हम उनसे दवाइयां मंगा सकें। हमने चीनियों के लिए भी ऐसा किया है ताकि हमें उनका राजनीतिक समर्थन मिल सके, हालांकि हम उनसे पैसे भी लेते हैं।"

कच्चे तेल का आयात होगा आसान

भारत के लिए यह फैसला इसलिए भी अहम है,क्योंकि उसके कच्चे तेल के आयात और अंतरराष्ट्रीय व्यापार का बड़ा हिस्सा होर्मुज मार्ग पर निर्भर करता है। इस बीच अमेरिका के साथ संभावित टकराव के मंडराते खतरों के बीच, ईरान के शीर्ष अधिकारी देश के सैन्य नेतृत्व पर कतर की मध्यस्थता वाले एक समझौते पर विचार करने के लिए जोर दे रहे हैं।

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ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध की संभावना

'अल अरबिया' के अनुसार, ईरान के आंतरिक आकलन बताते हैं कि तेहरान अब अमेरिका के साथ सीधे युद्ध के फिर से शुरू होने की संभावना को सबसे अधिक मान रहा है। सैन्य मोर्चे पर इन चिंताजनक अनुमानों के बावजूद, ईरान के वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं ने कूटनीतिक समाधान की वकालत करते हुए सक्रिय रूप से हस्तक्षेप किया है।

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Published By:
 Rupam Kumari
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