अपडेटेड 8 February 2026 at 11:53 IST
Bangladesh: बांग्लादेश में चुनाव से पहले बड़े हिंदू नेता की जेल में मौत पर मचा बवाल, शेख हसीना सरकार में रह चुके थे मंत्री
Ramesh Chandra Sen Death: बांग्लादेश के पूर्व मंत्री और पांच बार के सांसद रहे रमेश चंद्र सेन की हिरासत में मौत हो गई। वो लंबे समय से बीमार चल रहे थे। हालांकि उनकी मौत पर सवाल भी उठ रहे हैं। अवामी लीग नेता को 2024 में शेख हसीना सरकार के गिराए जाने के बाद से गिरफ्तार किया गया था।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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Bangladesh news: बांग्लादेश में चुनाव से पहले हिंदू नेता और पूर्व जल संसाधन मंत्री रमेश चंद्र सेन की जेल में मौत हो गई है। बताया जा रहा है कि 85 साल के सेन काफी समय से बीमार चल रहे थे। बताया जा रहा है कि उनको शनिवार (7 फरवरी) सुबह 9:10 बजे दीनाजपुर जिला जेल से मेडिकल कॉलेज अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में लाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया गया। उनकी मौत को कस्टोडियल डेथ के रूप में देखा जा रहा है और कई लोग यूनुस सरकार पर सवाल भी उठा रहे हैं।
रमेश चंद्र सेन अवामी लीग के वरिष्ठ नेता थे। वह पांच बार सांसद रह चुके हैं। साल 2024 के उन्होंने आखिरी चुनाव में भी जीत हासिल की थी। शेख हसीना सरकार में वह मंत्री के तौर पर भी काम कर चुके हैं।
मौत पर क्यों उठ रहे सवाल?
मामले को लेकर आरोप लगाया जा रहा है कि जेल में उनकी अच्छी तरह से देखभाल नहीं की जा रही थी, जैसा एक पूर्व मंत्री से साथ व्यवहार किया जाना चाहिए था। अगस्त 2024 में रमेश च्रंद सेन की गिरफ्तारी के समय तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं, जिसमें उनके हाथ रस्सियों से बंधे नजर आए थे। उन पर तीन अलग-अलग मामले चल रहे थे, जिसमें एक हत्या से जुड़ा केस भी शामिल था।
बांग्लादेशी अवामी लीग ने उठाए सवाल
रमेश चंद्र सेन की मौत पर बांग्लादेशी अवामी लीग के एक्स अकाउंट से पोस्ट कर कहा गया कि पूर्व जल संसाधन मंत्री और दिग्गज राजनेता रमेश चंद्र सेन की दीनाजपुर जिला जेल में हिरासत में हुई मौत ने एक और भयावह सच्चाई उजागर कर दी है। जेलों को राजनीतिक विरोधियों को खत्म करने के एक गुप्त हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
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पोस्ट में आगे कहा गया कि जेल अधिकारियों ने इसे "स्वाभाविक मृत्यु" बताया है, लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। एक गंभीर मामले में हिरासत में लिए गए 83 वर्षीय पूर्व मंत्री को उन्नत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई। यह केवल राज्य की विफलता नहीं है। यह जानबूझकर की गई लापरवाही का स्पष्ट मामला है। गिरफ्तारी के बाद हिरासत में यातना, पर्याप्त चिकित्सा उपचार से वंचित करना, अचानक स्वास्थ्य में गिरावट और कुछ ही मिनटों में मृत्यु की घोषणा, ये सभी बातें मिलकर एक चिंताजनक प्रश्न खड़ा करती हैं। क्या यह वास्तव में एक दुर्घटना थी, या राजनीतिक प्रतिशोध के निरंतर पैटर्न का एक और अध्याय?
बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को आम चुनाव होने वाले हैं। इससे पहले पिछले कुछ महीनों में पड़ोसी देश में अल्पसंख्यक समुदायों (खासकर हिंदुओं) के खिलाफ हिंसा की कई घटनाएं सामने आई हैं। अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार के गिरने के बाद अवामी लीग के नेताओं के खिलाफ लगातार मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। अवामी लीग की राजनीतिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और बांग्लादेश चुनाव में भाग लेने से अवामी लीग को रोक दिया गया है।
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Published By : Ruchi Mehra
पब्लिश्ड 8 February 2026 at 11:53 IST