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Updated June 11th, 2024 at 10:59 IST

ब्रिटेन भारत को वापस लौटाएगा हिंदू संत की 500 साल पुरानी मूर्ति, तमिलनाडु के मंदिर से हुई थी चोरी

Britain में भारतीय उच्चायोग ने चार साल संत तिरुमंगई की मूर्ति को लेकर यह दावा किया गया था कि इसे तमिलनाडु के किसी मंदिर से चुराया गया था।

Reported by: Ruchi Mehra
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ऑक्सफोर्ड यूनवर्सिटी | Image:X
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Oxford University Britain: ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी 500 साल पुरानी एक प्रतिमा भारत को लौटाने को तैयार है। मूर्ति एक हिंदू संत की है, जो कथित तौर पर तमिलनाडु के एक मंदिर से चोरी हो गई थी। फिलहाल इस मूर्ति को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के एशमोलियन म्यूजियम में रखा हुआ है।

संत तिरुमनकई अलवर की 500 साल पुरानी कांस्य मूर्ति 60 सेंटीमीटर ऊंची है। बताया जाता है कि इस प्रतिमा को साल 1967 से म्यूजियम में रखा गया है। प्रतिमा को उस दौरान सोथबी के नीलामी घर से डॉ. जेआर बेलमोंट नामक एक संग्रहकर्ता के संग्रह से हासिल किया था।

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तमिलनाडु के मंदिर से प्रतिमा को चुराया गया

चार साल पहले ब्रिटेन में भारतीय उच्चायोग ने चार साल संत तिरुमंगई की मूर्ति को लेकर यह दावा किया गया था कि इसे तमिलनाडु के किसी मंदिर से चुराया गया था।

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इसको लेकर विश्वविद्यालय के एशमोलियन संग्रहालय ने एक बयान में कहा गया कि 11 मार्च 2024 को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की काउंसिल ने एशमोलियन संग्रहालय से संत तिरुमंकाई अलवर की 16वीं शताब्दी की कांस्य मूर्ति की वापसी के लिए भारतीय उच्चायोग के दावे का समर्थन किया है। इस फैसले को अप्रूवल के लिए चैरिटी आयोग के सामने पेश किया जाएगा।

ऐसे पता चला मूर्ति का ओरिजन

संग्रहालय का कहना है कि पिछले साल नवंबर में एक स्वतंत्र शोधकर्ता की तरफ से उसे 500 साल पुरानी इस प्रतिमा की ओरिजन के बारे में पता चला था। इसके बाद उसने भारतीय उच्चायोग से संपर्क किया। बता दें कि ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के एशमोलियन म्यूजियम में दुनियाभर की कुछ सबसे प्रसिद्ध कला और पुरातत्व कलाकृतियां मौजूद हैं।

पहले भी लौटाई गई है कई मूर्तियां

गौरतलब है कि इससे पहले भी कई ऐसी भारतीय कलाकृतियों को ब्रिटेन से भारत वापस लाया गया है, जो चोरी हुई थी। बीते साल अगस्त में आंध्र प्रदेश से उत्पन्न एक चूना पत्थर की नक्काशीदार राहत मूर्ति और 17वीं शताब्दी के तमिलनाडु से आई “नवनीत कृष्ण” कांस्य मूर्ति को भी भारत पुनर्स्थापित किया गया। इस संबंध में स्कॉटलैंड यार्ड की कला और प्राचीन वस्तु इकाई से जुड़ी अमेरिका-ब्रिटेन की संयुक्त जांच के बाद दोनों मूर्तियों को ब्रिटेन ने भारतीय उच्चायुक्त को सौंपा था।

यह भी पढ़ें: पाकिस्तानी कारोबारी का बड़ा दावा, मोदी का चुना जाना केवल भारत नहीं पूरे दक्षिण एशिया के लिए अच्छा

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Published June 11th, 2024 at 10:38 IST

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