ईरान में इस्लामी क्रांति के सिद्धांत टूटे, खामेनेई के बेटे मोजतबा हुसैनी बने देश के नए सुप्रीम लीडर
अयातुल्लाह अली खामेनेई की अमेरिका-इजराइल हमलों में मौत के बाद ईरान की विशेषज्ञों की सभा ने उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता चुना है। IRGC के दबाव में लिया गया यह फैसला विवादास्पद है। मोजतबा कट्टरपंथी माने जाते हैं और IRGC-बसिज से गहरे जुड़े हैं।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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इजरायली-अमेरिका के हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतोल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद देश को नया नेता मिल गया है। इजरायली मीडिया के मुताबिक, अयातुल्ला खामेनेई के बेटे मोजतबा हुसैनी खामेनेई (Mojtaba Hosseini Khamenei) को ईरान का अगला सर्वोच्च नेता चुना गया है।
खबरों के मुताबिक, उन्हें ईरान की विशेषज्ञ सभा द्वारा खामेनेई के उत्तराधिकारी के रूप में चुना गया। इस्लामी गणराज्य ईरान की व्यवस्था में सर्वोच्च नेता का पद सबसे शक्तिशाली होता है। यह पद आजीवन के लिए होता है और इसे विशेषज्ञों की सभा (Assembly of Experts) द्वारा चुना जाता है। हाल ही में, 28 फरवरी 2026 को आयतोल्लाह अली खामेनेई की हत्या के बाद देश में सत्ता का संकट पैदा हो गया था।
करीब 36 साल तक देश पर शासन करने वाले खामेनेई की मौत अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमलों में हुई। हमलों के वक्त वो अपने अपने घर में थे। उनके साथ उनकी बेटी, दामाद और पोती भी मारे गए। खामेनेई की पत्नी, मंसूरेह खोजास्तेह बघेरजादेह की भी मौत हो गई है। खामेनेई ने ईरान के सर्वोच्च पद पर रहते हुए विदेश नीति, सेना और धार्मिक मामलों पर मजबूत नियंत्रण रखा था।
मोतबा खामेनेई कौन हैं?
खामेनेई की मौत के बाद अंतरिम व्यवस्था लागू हुई, जिसमें राष्ट्रपति, न्यायाधीश और गार्जियन काउंसिल के एक सदस्य ने अस्थायी रूप से जिम्मेदारी संभाली। लेकिन जल्द ही रिपोर्ट्स आईं कि विशेषज्ञों की सभा ने मोतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता चुन लिया है। 8 सितंबर 1969 को जन्मे मोतबा खामेनेई, अली खामेनेई के दूसरे बेटे हैं। वे एक मध्यम स्तर के शिया धर्मगुरु हैं और लंबे समय से पर्दे के पीछे से राजनीति और सुरक्षा मामलों में प्रभावशाली रहे हैं।
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मोतबा के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और बसिज मिलिशिया से गहरे संबंध हैं। कई सालों से उन्हें उनके पिता का संभावित उत्तराधिकारी माना जाता रहा है, हालांकि ईरान की क्रांति के सिद्धांतों में राजवंशीय उत्तराधिकार को गैर-इस्लामी माना जाता है, जिसके कारण यह फैसला विवादास्पद माना जा रहा है।
कैसे हुआ मोतबा का चुनाव?
अली खामेनेई की मौत के बाद देश में सत्ता का संकट पैदा हुआ। 88 सदस्यों वाली धार्मिक संस्था की जल्दबाजी में विशेषज्ञों की बैठक बुलाई गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, ये फैसला IRGC के दबाव में लिया गया है। यह ईरान के इतिहास में पहली बार है जब सर्वोच्च नेता का पद पिता की मौत के बाद बेटे को सीधे हस्तांतरित हुआ है।
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यह बदलाव ईरान की आंतरिक राजनीति को और सख्त बना सकता है। मोतबा को कट्टरपंथी माना जाता है, जिससे अमेरिका, इजराइल और पश्चिमी देशों के साथ तनाव बढ़ सकता है। वहीं, ईरान के भीतर विरोधी ताकतें इसे राजशाही की तरह देख सकती हैं, जो 1979 की इस्लामी क्रांति के खिलाफ है। वर्तमान में ईरान युद्ध में है, और नया नेता IRGC की मदद से सत्ता को मजबूत करने की कोशिश करेगा।