स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने को 40 देश एकजुट, ब्रिटेन के नेतृत्व में हुई बैठक, कहा- दुनिया की अर्थव्यवस्था को बंधक बना रहा ईरान

ब्रिटेन के नेतृत्व में करीब 40 देशों ने वर्चुअल बैठक की। बैठक में ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद करने की निंदा की गई। देशों ने कहा कि ईरान पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को बंधक बना रहा है। फ्रांस, जर्मनी, UAE और भारत समेत कई देश शामिल हुए।

Britain's Foreign Secretary Yvette Cooper, second right, attends a virtual summit at the Foreign Office in London on Thursday April 2, 2026
ईरान के खिलाफ बड़ा कदम | Image: AP

दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने के लिए ब्रिटेन ने एक बड़ी बैठक आयोजित की। इस वर्चुअल बैठक में करीब 40 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। ब्रिटेन का कहना है कि ईरान इस होर्मुज को बंद करके पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को बंधक बना रहा है।

यह संकीर्ण रास्ता फारस की खाड़ी से बाहर निकलने का मुख्य रास्ता है। दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल इसी रास्ते से गुजरता है। अगर यह बंद रहता है तो तेल की कीमतें आसमान छू जाती हैं, खाना-पीना महंगा हो जाता है और हर देश की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ता है।

28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले किए थे। उसके बाद ईरान ने होर्मुज को बंद कर दिया। ईरान ने कहा कि बिना उसकी अनुमति के जहाज नहीं गुजर सकते और कुछ जहाजों पर शर्तें भी लगा दीं। नतीजा यह हुआ कि मार्च से अब तक इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों में 94 प्रतिशत की भारी कमी आ गई है। कई व्यापारी जहाज हमलों का शिकार भी हुए हैं।

ब्रिटेन की बैठक में क्या हुआ?

ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर ने इस बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में फ्रांस, जर्मनी, कनाडा, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और भारत जैसे देश शामिल थे। अमेरिका इस बैठक में नहीं आया। यवेट कूपर ने कहा, “ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ते को हाईजैक कर लिया है और पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को बंधक बना रखा है। इस लापरवाही से तेल और खाने-पीने की चीजों की कीमतें बहुत बढ़ गई हैं, जो हर देश के लोगों और कारोबार को नुकसान पहुंचा रही हैं।”

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गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के महासचिव ने कहा कि ईरान ने तेल टैंकरों और व्यापारी जहाजों को रोक लिया है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से अपील की कि वह समुद्री रास्तों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाए।

आगे क्या प्लान है?

पहले चरण में कूटनीतिक और आर्थिक दबाव बढ़ाने की बात हुई। अगले हफ्ते सैन्य विशेषज्ञों की बैठक होगी, जिसमें खदानें साफ करने और व्यापारी जहाजों को सुरक्षा देने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। सभी देश इस बात पर सहमत हैं कि ईरान किसी भी जहाज से टोल टैक्स या फीस नहीं वसूल सकता। रास्ता सबके लिए खुला और सुरक्षित होना चाहिए।

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फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि होर्मुज को बलपूर्वक खोलना बहुत मुश्किल और जोखिम भरा है, क्योंकि ईरान के पास तटीय खतरे और मिसाइलें हैं।

भारत की भूमिका

भारत भी इस बैठक में शामिल हुआ। भारत की तरफ से विदेश सचिव स्तर के अधिकारी ने हिस्सा लिया। भारत जैसे कई देश ऊर्जा सुरक्षा के लिए इस रास्ते पर निर्भर हैं, इसलिए यह मुद्दा हमारे लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है।

इस बैठक में फिलहाल तो कोई बड़ा फैसला नहीं हुआ, लेकिन यह संदेश साफ गया कि दुनिया भर के देश मिलकर ईरान पर दबाव डालना चाहते हैं। ब्रिटेन और फ्रांस इस कोशिश के अगुवा हैं।

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Published By :
Sagar Singh
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