अपडेटेड 20 March 2026 at 08:48 IST

Iran: जंग के बीच ईरान में बीच चौराहे पर तीन प्रदर्शनकारियों को दी गई फांसी, 19 साल के पहलवान को लटकाया; क्या थे इन पर आरोप?

Iran news: ईरान में 19 साल के चैंपियन पहलवान सालेह मोहम्मदी और दो अन्य प्रदर्शनकारियों को सरेआम फांसी दी गई है। कोम शहर में तीनों को जनता के सामने लटकाया गया। मानवाधिकार संगठनों ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की।

Iran hanged three protestors
ईरान में तीन प्रदर्शनकारियों को दी गई फांसी | Image: X

Iran news: अमेरिका और इजरायल के साथ जारी जंग के बीच अब ईरान में तीन लोगों को सार्वजनिक रूप से फांसी दी गई है। एक 19 साल का पहलवान सालेह मोहम्मदी और दो अन्य प्रदर्शनकारी- सईद दावोदी और मेहदी घासेमी शामिल रहे। इन पर पुलिसकर्मियों की हत्या और 'खुदा के खिलाफ युद्ध छेड़ने' का आरोप था।  

कोम शहर में लोगों के सामने दी गई फांसी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 19 मार्च को कोम शहर में लोगों के एक ग्रुप के सामने सार्वजनिक तौर पर दी गई। ईरानी न्यायपालिका के अनुसार, सालेह मोहम्मदी, मेहदी घासेमी और सईद दावूदी पर जनवरी में हुए प्रदर्शनों के दौरान दो पुलिस अधिकारियों की हत्या करने का आरोप था।

यातना देकर झूठे बयान दिलवाने का आरोप

स्थानीय मीडिया के मुताबिक, उन्हें "खुदा के खिलाफ युद्ध छेड़ने" (मोहारेबेह) के अपराध में भी दोषी ठहराया गया, जो ईरान में मौत की सजा वाला अपराध माना जाता है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इनकी सजा को बरकरार रखा था, जिसके बाद तीनों को फांसी दी गई।  कहा जा रहा है कि यातना देकर इन लोगों से झूठे बयान दिलवाए गए और अपने पसंद के वकील से मिलने की इजाजत भी नहीं दी गई। ये तीनों प्रदर्शनकारी पूरे देश में हुए विरोध प्रदर्शनों के सिलसिले में फांसी पाने वाले पहले लोग हैं।

मानवाधिकार संगठनों ने की आलोचना

मानवाधिकार संगठनों जैसे एमनेस्टी इंटरनेशनल, ईरान ह्यूमन राइट्स (IHRNGO) ने ईरान की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की। IHRNGO के निदेशक महमूद अमीरी-मोगद्दाम ने कहा कि जिन प्रदर्शनकारियों को फाँसी दी गई, उन्हें बेहद अन्यायपूर्ण मुकदमों के बाद मौत की सजा सुनाई गई थी। ये सजाएं यातना और जबरदस्ती लिए गए बयानों पर आधारित थीं। हम इन फांसियों को 'न्यायेतर हत्याएं' (extrajudicial killings) मानते हैं, जिन्हें राजनीतिक असंतोष को दबाने के लिए अंजाम दिया गया है।

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वहीं, एमनेस्टी ने कहा कि इन तीनों लोगों को अपने बचाव का पर्याप्त मौका नहीं मिला। मुकदमे की प्रक्रिया इतनी जल्दबाजी में हुई कि उसे किसी भी नजरिए से उचित मुकदमा नहीं माना जा सकता।

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Published By : Ruchi Mehra

पब्लिश्ड 20 March 2026 at 08:48 IST