Nirav Modi: भगोड़े कारोबारी नीरव मोदी को जल्द लाया जा सकता है भारत, CBI की टीम ने लंदन में डाला डेरा, आगे क्या होगा?
Nirav Modi Extradition: नीरव मोदी फिलहाल लंदन के जेल में बंद है। मार्च में उसे यूके के हाई कोर्ट से झटका लगा, जिसके बाद उसने यूरोप मानवाधिकार न्यायालय का रुख किया था।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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Nirav Modi: पंजाब नेशनल बैंक (PNB) घोटाले के मुख्य आरोपी और भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी की मुश्किलें बढ़ सकती है। जल्द ही उसे लंदन से भारत लाया जा सकता है। आधिकारिक सरकारी सूत्रों के मुताबिक नीरव मोदी के प्रत्यर्पण का मामला अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। इसके लिए CBI की एक टीम लंदन भी पहुंच चुकी है। प्रक्रिया पूरी होते ही उसे भारत वापस लाया जा सकता है।
जानकारी के अनुसार, नीरव मोदी के प्रत्यर्पण में अब एक ही कानूनी रुकावट बची है। दो हफ्तों में उसके प्रत्यर्पण के खिलाफ याचिका पर सुनवाई होनी है। अब वो याचिका भी खारिज हो जाती है, तो कारोबारी को भारत लाया जा सकता है।
नीरव मोदी का केस 'गोपनीय' रहेगा
नीरव मोदी के प्रत्यर्पण के खिलाफ याचिका पर दो हफ्तों में सुनवाई होने की संभावना है। फ्रांस के स्ट्रासबर्ग में स्थित यूरोप मानवाधिकार न्यायालय (ECHR) ने गुमनामी की इजाजत दे दी है। उसका मामला अब सार्वजनिक जांच के दायरे से बाहर हो गया है। अदालत उसके मामले को गोपनीय मानेगी और सुनवाई सार्वजनिक रूप से नहीं होगी। ये बंद दरवाजों के पीछे की जाएगी।
ECHR के प्रेस कार्यालय के मुताबिक जिन मामलों में आवेदक को गुमनाम रखा जाता है और केस फाइल को गोपनीय रखा गया है, उस स्थिति में अदालत उस मामले के बारे में कोई जानकारी नहीं दे सकती। अगले दो हफ्तों में नीरव मोदी की याचिका पर सुनवाई हो सकती है। सुनवाई के दौरान अदालत सीबीआई का पक्ष भी सुनेगी। इसके बाद अदालत अपना फैसला सुनाएगी।
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खारिज हुई याचिका तो लाया जा सकता है भारत
अगर नीरव मोदी की याचिका खारिज हो जाती है, तो आखिरी कानूनी बाधा भी समाप्त हो जाएगी और उसे भारत लाया जा सकता है। फिलहाल वो लंदन की जेल में बंद है।
हाई कोर्ट से लगा था झटका
इससे पहले मार्च में यूके के हाई कोर्ट ऑफ जस्टिस से नीरव मोदी को तब तगड़ा झटका लगा था, जब उसकी प्रत्यर्पण के खिलाफ अपने मामले को फिर से खोलने की याचिका को खारिज कर दिया गया था। इससे यूके में नीरव मोदी के लिए सभी कानूनी रास्ते बंद हो गए थे। फिर उसने यूरोप मानवाधिकार न्यायालय का रुख किया था। यूके यूरोपीय मानवाधिकार कन्वेंशन का एक हस्ताक्षरकर्ता है।