PoK में असीम मुनीर ने मचाया कत्लेआम! रावलकोट में पाकिस्तानी सेना ने निहत्थों पर फायरिंग कर बिछा दीं लाशें; अब तक 19 प्रदर्शनकारियों की मौत
पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर कथिततौर पर रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध गोलीबारी का आरोप है। दावा है कि इसमें कई लोगों की मौत हो गई है, जबकि दर्जनों घायल हुए हैं।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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PoK Firing on Protesters: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के रावलकोट में हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं। अपनी मांगो को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे निहत्थे लोगों पर पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने कथिततौर पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी, जिसमें दर्जन भर से ज्यादा लोगों के मौत की खबर है।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि रावलकोट में विरोध प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने अंधाधुंध गोलीबारी की। सूत्रों के मुताबिक, इस गोलीबारी में 19 लोग मारे गए हैं। इस बीच, मारे गए लोगों के नामों की एक लिस्ट भी सामने आई है, जिसमें नईम बट, उस्मान नजीर, निसार अहमद, काशिफ याकूब, सरदार फिदा हुसैन, मुजम्मिल, बासित शाह, फहीम अफजल, कामरान मुश्ताक पनाखा,ज़रगाम खलील, साकिब हनीफ, साकिब इशाक, एरियल असगर, उस्मान गुल, जाफिर पहलवान, निसार शाहीन, अली हुसैन, ख्वाजा अबरार लतीफ डार और कामरान हफीज शामिल हैं।
इंटरनेट सेवाएं सस्पेंड
इसके अलावा कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि हिंसा के बाद पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर के कई हिस्सों में इंटरनेट सेवाएं सस्पेंड कर दी गई हैं।
दुकानों-व्यवसायों पर विरोध-प्रदर्शनों का असर
पिछले 52 दिनों से चल रहे बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शनों के कारण दुकानें, व्यवसाय और सार्वजनिक परिवहन बंद पड़े हैं। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई हिंसक झड़पों में कई लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें कुछ सुरक्षाकर्मी भी शामिल बताए जा रहे हैं।
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प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें
जानकारी के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में स्थानीय विधानसभा में 12 आरक्षित सीटों की व्यवस्था पूरी तरह खत्म करना, स्थानीय लोगों को राजनीति में अधिक प्रतिनिधित्व देना, आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को तुरंत रिहा करना, बेहतर और पारदर्शी शासन व्यवस्था लागू करना और बिजली संकट का समाधान करने समेत अन्य आर्थिक मुद्दों पर सुधार लाना शामिल हैं।
मुजफ्फराबाद मार्च के बीच क्यों भड़की हिंसा?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जेएएसी (JAAC) ने 27 जुलाई को दोपहर 1 बजे तक प्रशासन को उनकी मांगें स्वीकारने और आधिकारिक अधिसूचना जारी करने का अल्टीमेटम दिया था। समिति ने चेतावनी दी थी कि ऐसा नहीं होने पर हजारों की संख्या में लोग रावलकोट से मुजफ्फराबाद तक मार्च करेंगे। इसके बावजूद उनके अल्टीमेटम को गंभीरता से नहीं लिया गया। तय समय तक कोई सहमति नहीं बनने के बाद लोग बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर आए और मार्च शुरू कर दिया। इसी दौरान रावलकोट में हालात बिगड़े और गोलीबारी के आरोप और कथित वीडियो सामने आए।