Pakistan: ग्वादर पोर्ट इस्तेमाल करने का चीन को लोभ, बदले में 'सेकेंड स्ट्राइक' पनडुब्बी... आसिम मुनीर ने की थी खतरनाक डील, US मीडिया ने खोली पोल

पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने 2024 में चीन से परमाणु हथियारों से लैस पनडुब्बियां मांगी थीं। बदले में ग्वादर पोर्ट को चीनी नौसेना का स्थायी अड्डा बनाने की पेशकश की गई। पाकिस्तान 'सेकंड स्ट्राइक' क्षमता हासिल कर न्यूक्लियर ट्रायड पूरा करना चाहता था, लेकिन चीन ने प्रस्ताव को खारिज कर दिया।

Pakistan asked China for a nuclear submarine in exchange for Gwadar Port
आसिम मुनीर ने की थी खतरनाक डील | Image: AP

पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने 2024 में चीन से एक बड़ी और खतरनाक डील करने की कोशिश की थी। उन्होंने ग्वादर पोर्ट चीन को स्थायी नौसैनिक अड्डे के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति देने के बदले परमाणु हथियारों वाली पनडुब्बी की मांग की थी।

एक अमेरिकी स्वतंत्र न्यूज आउटलेट की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान के आर्मी चीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने 2024 में चीन से परमाणु हथियारों से लैस पनडुब्बियों की मांग की थी। इसके बदले में पाकिस्तान ग्वादर पोर्ट को चीनी नौसेना के लिए स्थायी अड्डे के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति देने को तैयार था।

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान इस डील के जरिए 'सेकंड स्ट्राइक' क्षमता हासिल करना चाहता था। यानी अगर दुश्मन पहले हमला करके उसके जमीनी और हवाई परमाणु ठिकानों को नष्ट कर दे, तो भी समुद्र की गहराई से छिपी पनडुब्बियां जवाबी परमाणु हमला कर सकें। इस तरह पाकिस्तान न्यूक्लियर ट्रायड (जल, थल और वायु से परमाणु हमला) पूरी करने की राह पर आगे बढ़ना चाहता था।

क्या था पूरा मामला?

अमेरिकी न्यूज वेबसाइट ड्रॉप साइट न्यूज ने यह खुलासा किया है। पाकिस्तान चाहता था कि चीन उसे ऐसी पनडुब्बी दे, जो समुद्र में छिपकर दुश्मन पर जवाबी परमाणु हमला कर सके। इसे सेकंड स्ट्राइक कैपेबिलिटी कहते हैं। इससे पाकिस्तान की परमाणु ताकत और मजबूत हो जाती। अभी पाकिस्तान के पास जमीन और हवा से परमाणु हमला करने की क्षमता है, लेकिन समुद्र से नहीं। अगर यह डील हो जाती तो पाकिस्तान जमीन, हवा और समुद्र से हमला परमाणु हमला करने की ताकत हासिल कर लेता।

Advertisement

डील क्यों नहीं हुई?

चीन ने इस मांग को ज्यादा माना और बात आगे नहीं बढ़ी। पाकिस्तान पहले से ही चीन पर बहुत निर्भर है। उसकी ज्यादातर हथियार और परमाणु तकनीक चीन की मदद से ही बनी है। आसिम मुनीर को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपना पसंदीदा फील्ड मार्शल कहते हैं। मुनीर के समय में पाकिस्तान अमेरिका के साथ रिश्ते सुधार रहा है, लेकिन चीन के साथ भी पुराने संबंध बनाए रखना चाहता है।

क्यों है यह खबर महत्वपूर्ण?

ग्वादर पोर्ट चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का अहम हिस्सा है। अगर पाकिस्तान को परमाणु पनडुब्बी मिल जाती तो क्षेत्र में तनाव बढ़ सकता था। परमाणु पनडुब्बियां दुनिया के कुछ चुनिंदा देशों अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन, भारत के पास ही हैं। इनसे लैस होना कोई साधारण उपलब्धि नहीं होती।

Advertisement

पाकिस्तान-चीन परमाणु सहयोग का इतिहास

चीन लंबे समय से पाकिस्तान का प्रमुख रक्षा साझेदार रहा है। 1970-80 के दशक में चीन ने पाकिस्तान को परमाणु कार्यक्रम के लिए तकनीकी मदद दी थी। बाद में मिसाइल टेक्नोलॉजी भी ट्रांसफर की गई। हाल ही में पाकिस्तान ने चीन से हैंगोर क्लास पनडुब्बियां हासिल की हैं, लेकिन ये परमाणु हथियार ले जाने वाली नहीं बताई जातीं।

ये भी पढ़ें: Bihar: 'JDU का BJP में विलय हो गया, दोनों में अंदरखाने सबकुछ ठीक नहीं है, ये सरकार ज्यादा दिन...', RJD ने सम्राट सरकार पर बोला हमला

Published By:
 Sagar Singh
पब्लिश्ड