Nepal Flood Updates: नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही 9 से ज्यादा की मौत, 9 जवान समेत 400 टूरिस्ट लापता; यूपी-बिहार में अलर्ट
नेपाल में हाल ही में अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। प्राप्त प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस भयंकर प्राकृतिक आपदा में अब तक 9 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है और 9 जवान लापता हैं। बाढ़ का पानी अचानक रिहायशी और पर्यटन इलाकों में घुसने से स्थिति बेहद गंभीर हो गई है।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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नेपाल के रसुवा जिले में प्रकृति ने एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखाया है। बुधवार तड़के भोटेकोशी नदी में अचानक आई भीषण बाढ़ ने भयानक तबाही मचाई है। तिब्बत की ओर से आए इस अचानक जल सैलाब ने न केवल नेपाल में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है, बल्कि भारत के सीमावर्ती राज्यों विशेषकर उत्तर प्रदेश और बिहार में अलर्ट जारी है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 9 लोगों की मौत की खबर सामने आई और 9 जवान लापता हैं।
नेपाल में बाढ़ से भीषण तबाही, 9 से ज्यादा की मौत
तबाही का खौफनाक मंजर और जनहानिरसुवा जिले के मुख्य बाजार क्षेत्र, विशेषकर टिमुरे बाजार और सीमा नाके के कस्टम क्षेत्र में बाढ़ ने सबसे ज्यादा कहर बरपाया है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इस हादसे में 9 से ज्यादा लोगों की मौत की बात सामने आई है। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, इलाके में बारिश नहीं हो रही थी। ऐसे में यह आशंका जताई जा रही है कि तिब्बत में भूस्खलन के कारण नदी का प्रवाह रुकने या ग्लेशियर फटने से अचानक यह सैलाब आया। पानी का वेग इतना प्रचंड था कि भारी वाहन तिनके की तरह बह गए और सड़कें पूरी तरह से कट गईं। ड्रोन फुटेज से पता चलता है कि आपदा का केंद्र पूरी तरह से दुर्गम हो चुका है।
400 से अधिक पर्यटक और जवान लापता
बाढ़ का सबसे चिंताजनक पहलू बड़ी संख्या में लोगों का लापता होना है। पर्यटन और ट्रैवल एजेंसियों के शुरुआती रिकॉर्ड के अनुसार, प्रभावित इलाके से लगभग 400 यात्रियों का कोई सुराग नहीं मिल रहा है। इनमें भारतीय पर्यटकों के साथ-साथ अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड्स, मलेशिया और दक्षिण अफ्रीका के विदेशी नागरिक शामिल हैं। 'कैलाश जर्नी' पर निकले 31 यात्री भी लापता बताए गए हैं। इसके अलावा, नेपाल-चीन सीमा के पास टिमुरे में तैनात सशस्त्र पुलिस बल के 9 जवान भी इस जल प्रलय में बह गए हैं। पर्यटन बोर्ड, स्थानीय प्रशासन और ट्रेकिंग गाइड मिलकर लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं।
युद्ध स्तर पर राहत और बचाव कार्य
त्रासदी की सूचना मिलते ही नेपाल सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया है। नेपाल पुलिस, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाली सेना पूरी ताकत के साथ खोज अभियान में जुटी है। अब तक 25 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। चूंकि रास्ते कट गए हैं, इसलिए दुर्गम इलाकों तक पहुंचने और लोगों को बचाने के लिए 15 हेलीकॉप्टरों की मदद ली जा रही है। घायलों के त्वरित इलाज के लिए मेडिकल सेंटर स्थापित किए गए हैं और प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकल टीमें मुस्तैदी से काम कर रही हैं।
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जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान
बाढ़ के तेज बहाव ने बुनियादी ढांचे को भी तहस-नहस कर दिया है। 13 जलविद्युत परियोजनाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। कई प्रोजेक्ट्स के बांध, पावरहाउस और पहुंच मार्ग क्षतिग्रस्त हो गए हैं। खतरे को देखते हुए काठमांडू ट्रैफिक पुलिस ने रसुवा, नुवाकोट, चितवन और धादिंग जाने वाले वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी है। त्रिशूली नदी के किनारे रहने वालों को नदी तट से दूर सुरक्षित स्थानों पर जाने का निर्देश दिया गया है।
यूपी और बिहार में बढ़ा अलर्ट, प्रशासन मुस्तैद
नेपाल से आने वाली नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए भारत में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाराजगंज और कुशीनगर में गंडक और नारायणी नदियों के जलस्तर पर नजर रखने और स्थानीय प्रशासन को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं।
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वहीं, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से स्थिति पर चर्चा की है। कोसी और गंडक बेसिन में जलस्तर बढ़ने की आशंका के चलते बिहार के 6 संवेदनशील जिलों में NDRF की कई टीमें रवाना कर दी गई हैं। इसके साथ ही, भारत-नेपाल सीमा पर तैनात सीमा सशस्त्र बल (SSB) को हाई अलर्ट पर रखा गया है। SSB ने राहत और बचाव के लिए 11 टीमें तैयार रखी हैं और 7 अतिरिक्त टीमों को स्टैंडबाय पर रखा गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।