हिंसा, लूटपाट और आगजनी...पेरिस की सड़कों पर टैंक तो इटली में सेना तैनात; जानिए क्यों सुलग रहा है यूरोप और क्या है इसके पीछे की पूरी सियासत?

फ्रांस में स्कूलों के लिए बुनियादी बजट, कम वेतन और आसमान छूती महंगाई के खिलाफ फूटा जनआक्रोश अब पूरे देश में फैल चुका है। स्पेन की राजधानी मैड्रिड से लेकर फ्रांस के पेरिस और इटली के मिलान तक लाखों लोग सरकारों की नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं।

More than 400,000 protest across France, challenging Macron as Paris clashes erupt
हिंसा, लूटपाट और आगजनी...पेरिस की सड़कों पर टैंक तो इटली में सेना तैनात; जानिए क्यों सुलग रहा है यूरोप और क्या है इसके पीछे की पूरी सियासत? | Image: AP

फ्रांस में स्कूलों के लिए बुनियादी बजट, कम वेतन और आसमान छूती महंगाई के खिलाफ फूटा जनआक्रोश अब पूरे देश में फैल चुका है। स्पेन की राजधानी मैड्रिड से लेकर फ्रांस के पेरिस और इटली के मिलान तक लाखों लोग सरकारों की नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। भीषण हिंसा, लूटपाट और आगजनी में करीब 3000 दुकानों और सार्वजनिक इमारतों को हुए नुकसान के बाद सरकार ने शनिवार को देशभर में भारी सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सड़कों पर बख्तरबंद गाड़ियां और सेना के जवान उतारने पड़ रहे हैं।

कई बड़े शहरों में लगातार हिंसक झड़पें, लूटपाट और आगजनी की घटनाएं देखने को मिल रही हैं। एक के बाद एक कई यूरोपीय देशों में जनता का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है। पूरा यूरोप एक ऐसे संकट से घिर चुका है, जिसका असर आने वाले लंबे समय तक महाद्वीप की राजनीति और अर्थव्यवस्था पर पड़ना तय है। हिंसा इस कदर बढ़ गई हैं कि राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को खुद एक वीडियो रिलीज कर प्रदर्शनकारियों को शांति की अपील करनी पड़ी।

इमैनुएल मैक्रों ने कहा- 'फ्रांस के लोग फ्रांस के साथ ऐसा कैसे कर सकते हैं? जो हो रहा है उसे किसी भी तरह से सही नहीं ठहराया जा सकता. हम सब इस हिंसा पर शर्म महसूस कर रहे हैं।'

प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए छोड़े गए आंसू गैस के गोले

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फ्रांस की राजधानी पेरिस में शनिवार को प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं। फ्रांस सरकार के मुताबिक, देशभर में हुए प्रदर्शनों में करीब 4 लाख 10 हजार लोगों ने हिस्सा लिया। गृह मंत्रालय के अनुमान के अनुसार, पेरिस में सबसे बड़े मार्च में करीब 1 लाख 10 हजार लोग शामिल हुए। मार्च की शुरुआत शांतिपूर्ण तरीके से हुई थी, लेकिन बाद में हालात बिगड़ गए। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और पानी की बौछार करने वाली गाड़ियों का इस्तेमाल किया।

पेरिस में मार्च के दौरान हुई झड़पें

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तमाम तैयारियों के बाद शुरू हुए इस मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच में कई बार झड़प भी देखने को मिली। पेरिस में यह मार्च शांतिपूर्ण तरीके से शुरू हुआ था लेकिन आखिरी पड़ाव 'पोर्ट डी विन्सेनेस' के पास कुछ प्रदर्शनकारियों ने चीजें फेंकीं, जिसके जवाब में पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लोगों को तितर-बितर करने के लिए वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया।

फ्रांस में जारी प्रदर्शन की मुख्य वजहें

फ्रांस में जो कुछ हो रहा है उसके लिए महंगाई, शिक्षा व्यवस्था, सामाजिक असमानता, सरकारी खर्च जैसे मुद्दों को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। इससे लंबे समय से जनता में असंतोष है। ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं। रोजमर्रा की चीजें महंगी हो गई हैं। स्कूलों में शिक्षकों की कमी है और सार्वजनिक सेवाएं बदहाल हैं। दावा किया जा रहा है कि इन्हीं सब को लेकर लोग सड़कों पर हैं। लेकिन जिस तरह से भीड़ सार्वजनिक संपत्तियों को आग के हवाले कर रही है। नकाबपोश लोग जिस तरह से दुकानों को लूट रहे हैं, उससे इनके मकसद पर भी सवाल उठ रहे हैं।

फ्रांस में क्या हैं प्रदर्शनकारियों की मांगें?

फ्रांस में राष्ट्रपति मैक्रों 2017 से सत्ता पर काबिज हैं। उनके खिलाफ जनता का गुस्सा भी कई बार देखने को मिलता है। लेकिन इस प्रोटेस्ट की शुरुआत पिछले महीने पेरिस के एक हाई स्कूल में टीचर्स और कर्मचारियों की कमी के साथ शुरू हुई थी। देखते ही देखते यह पूरा प्रोटेस्ट फ्रांस भर में फैल गया। छात्र संगठनों ने इस मामले में 10 सूत्रीय मांग सरकार के सामने रखी हैं। इनमें स्कूल प्रणाली में बेहतरी से लेकर, शिक्षकों की भर्ती और वित्तीय सहायता मांग रखी गई है। छात्रों के सड़कों पर आने के बाद श्रमिक संगठनों ने भी अपनी मांगों के साथ सड़कों पर आना शुरु कर दिया। वह वेतन और पेंशन वृद्धि की मांग पर अड़े हैं।

राष्ट्रपति मैक्रों ने प्रदर्शनकारियों को बड़े बदलावों का आश्वासन दिया है। हालांकि, छात्र संगठनों की तरफ से साफ किया गया है कि जब तक सरकार अपनी बात को अमल में नहीं लाती, तब तक उनका प्रदर्शन जारी रहेगा। 2027 में मैक्रों का कार्यकाल खत्म होने वाला है और फ्रांसीसी संविधान के मुताबिक वह दो बार से ज्यादा लगातार राष्ट्रपति नहीं बन सकते। इसके अलावा उन्होंने 27 में कार्यकाल पूरा होने के बाद राजनीति से ब्रेक लेने का भी ऐलान किया है।

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Published By:
 Ankur Shrivastava
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