क्या रूस और चीन से युद्ध में ईरान को मदद मिल रही है? उप विदेश मंत्री इस्माइल बघाई ने कर दिया बड़ा खुलासा

मिडिल ईस्‍ट में जारी तनाव के बीच एक रिपोर्ट में यह दावा किया जा रहा है कि रूस और चीन, ईरान को इस तरह समर्थन दे रहे हैं कि सीधे तौर पर अमेरिका से टकराव भी न हो और क्षेत्र में अपना प्रभाव भी बढ़ता रहे।

 Is Iran getting active support from China and Russia? Esmaeil Baghaei, Iranian Deputy Foreign Minister, answers
EXCLUSIVE: क्या रूस और चीन से युद्ध में ईरान को मदद मिल रही है? उप विदेश मंत्री इस्माइल बघाई ने कर दिया बड़ा खुलासा | Image: Republic

मिडिल ईस्‍ट में जारी तनाव के बीच एक रिपोर्ट में यह दावा किया जा रहा है कि रूस और चीन, ईरान को इस तरह समर्थन दे रहे हैं कि सीधे तौर पर अमेरिका से टकराव भी न हो और क्षेत्र में अपना प्रभाव भी बढ़ता रहे। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों का मुख्य उद्देश्य दुनिया में अमेरिका की एकछत्र शक्ति को कमजोर करना है। हालांकि इस दावे में कितनी सच्चाई है? इसका खुलासा ईरान के उप विदेश मंत्री इस्माइल बघाई ने रिपब्‍लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्‍वामी को दिए एक्‍सक्‍लूसिव इंटरव्‍यू में कर दिया।

अर्नब गोस्‍वामी के सवाल- 'क्या रूस और चीन से युद्ध में ईरान को मदद मिल रही है?' का जवाब देते हुए इस्माइल बघाई ने बताया कि हम रूस या चीन से किसी भी तरह खुफिया या सैन्य सहायता नहीं ले रहे। उन्होंने कहा, "हमारी सेना द्वारा इस्तेमाल हो रही मिसाइलें और ड्रोन पूरी तरह ईरान में ही बने हैं। रक्षा के मामले में हम 100 प्रतिशत अपनी क्षमताओं पर निर्भर हैं।"

हालांकि, उन्होंने रूस के साथ रणनीतिक रक्षा समझौते का जिक्र किया, लेकिन किसी सक्रिय सैन्य मदद से इनकार कर दिया। आपको बता दें कि कुछ रिपोर्ट्स में ऐसे दावे किए जा रहे हैं कि रूस ने S-400 मिसाइलें AN-135 विमानों को ईरान भेजी हैं, जो ईरान में लैंड भी हुई हैं। हालांकि इन रिपोर्ट्स को बघाई ने सिरे से खारिज कर दिया।

'अमेरिका ने कूटनीतिक विश्वासघात किया'

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बघाई ने खुलासा किया कि पाकिस्तान के जरिए ईरान को मध्यस्थता के लिए संदेश मिले हैं, लेकिन अमेरिका की स्थिति 'स्‍पष्‍ट ना होने के साथ-साथ अनुचित' भी है। उन्होंने कहा, "हम जून में अमेरिकी हमले के बावजूद बातचीत के लिए राजी हुए थे, लेकिन उन्होंने कूटनीति का विश्वासघात किया। अब हम चाहते हैं कि यह चक्र दोहराया न जाए।" भारत समेत पूरी दुनिया युद्ध समाप्ति चाहती है, ऐसे में उन्होंने शांति की इच्छा जताई, लेकिन चेतावनी दी कि बमबारी बंद होने के बिना बातचीत संभव नहीं।

दुश्मनों को पछतावा कराना ईरान का मकसद

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पिछले नौ महीनों में दूसरी बार 'अन्यायपूर्ण हमलों' का सामना कर रहे ईरान ने कहा कि दो परमाणु हथियार संपन्न देशों ने स्कूल, अस्पताल और आवासीय इलाकों पर बर्बरता की है। बघाई ने इजरायल के लिए कोई संदेश देने से इनकार किया। सद्दाम हुसैन के आठ साल के युद्ध का हवाला देते हुए बोले, "हमने तेहरान पर कब्जे का दावा झुठलाया। हम अपनी जमीन के लिए लड़ते रहेंगे जब तक दुश्मनों को उनकी आक्रामकता का पछतावा न हो।" ईरान क्षेत्रीय शांति चाहता है, लेकिन 'दुष्चक्र' रोकने के लिए सुनिश्चित है।

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Published By :
Ankur Shrivastava
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