'अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं करेंगे', अली लारीजानी ने साफ किए ईरान के इरादे, ट्रंप के दावे को किया खारिज
Israel-Iran war: राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में दावा किया कि ईरानी नेतृत्व के तेवर अब नरम पड़ रहे है और वो बातचीत की टेबल पर आने के लिए तैयार है। ईरान ने उनके बयान को खारिज कर दिया और साफ किया कि अमेरिका के साथ अब कोई बातचीत नहीं होगी।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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US-Israel Attack on Iran: सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत से ईरान गुस्से पर लाल है और अब अमेरिका के साथ किसी भी बातचीत से इनकार कर दिया है। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी ने अपने इरादे साफ किए। उनका कहना है कि अब बातचीत की कोई गुंजाइश ही नहीं बची है। उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति पर बरसते हुए कहा कि ट्रंप ने अपनी भ्रम वाली कल्पनाओं से पश्चिम एशिया में अफरा-तफरी मचा दी है।
ट्रंप को दिया साफ संदेश
अली लारीजानी ने सोमवार (2 मार्च) को X पर एक पोस्ट के जरिए एक पोस्ट में कहा, "हम अमेरिका के साथ बातचीत नहीं करेंगे।" उनका ये पोस्ट ऐसे समय पर आया है जब इससे पहले ट्रंप दावा कर रहे थे कि ईरान अब बातचीत के लिए तैयार हो गया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि ईरान का नया नेतृत्व बातचीत की टेबल पर आना चाहता है। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, "वे (ईरान) बात करना चाहते हैं और मैं बात करने के लिए राजी हो गया हूं। उन्हें यह पहले करना चाहिए था। यह बहुत प्रैक्टिकल और आसान था। उन्होंने बहुत देर कर दी।”
'ट्रंप ने अमेरिका फर्स्ट' को बनाया इजरायल फर्स्ट'
इसके अलावा अली लारीजानी ने एक और पोस्ट में लिखा, "ट्रंप ने अपनी भ्रम वाली कल्पनाओं से इलाके में अफरा-तफरी मचा दी है और अब उन्हें और ज्यादा अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने का डर है। अपने भ्रम वाले कामों से उन्होंने अपने बनाए 'अमेरिका फर्स्ट' नारे को 'इजराइल फर्स्ट' में बदल दिया। इजरायल की सत्ता की भूखी इच्छाओं के लिए अमेरिकी सैनिकों की बलि दे दी और नई मनगढ़ंत बातों के साथ, वह एक बार फिर अमेरिकी सैनिकों और परिवारों पर बोझ डाल रहे हैं। आज, ईरानी देश अपना बचाव कर रहा है। ईरान की सेना ने हमला शुरू नहीं किया।"
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मिडिल ईस्ट में बिगड़े हालात
बता दें कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने संयुक्त रूप से ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले शुरू किए। इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई समेत कई शीर्ष सैन्य और सुरक्षा अधिकारी मारे गए हैं। इन हमलों के बाद ईरान ने जवाब में इजरायल समेत 9 देशों में अमेरिकी बेस पर हमले किए हैं। जंग में लेबनान का उग्रवादी संगठन हिजबुल्लाह भी कूद गया है।