अपडेटेड 11 March 2026 at 08:15 IST

Iran-Israel War: ईरान-इजरायल जंग के बीच भारत को रूस से तेल खरीदने की छूट क्यों मिली? अमेरिका ने बता दिया पूरा सच

अमेरिका ने भारत को समुद्री रास्ते पर मौजूद रूसी कच्चे तेल खरीदने की अस्थायी छूट दी है। यह फैसला पश्चिम एशिया में ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति में उत्पन्न कमी को पूरा करने के उद्देश्य से लिया गया है।

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ईरान-इजरायल जंग के बीच भारत को रूस से तेल खरीदने की छूट क्यों मिली? अमेरिका ने बता दिया पूरा सच | Image: AP/X

अमेरिका ने भारत को समुद्री रास्ते पर मौजूद रूसी कच्चे तेल खरीदने की अस्थायी छूट दी है। यह फैसला पश्चिम एशिया में ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति में उत्पन्न कमी को पूरा करने के उद्देश्य से लिया गया है। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने पत्रकारों से कहा कि भारत ने पहले अमेरिकी प्रतिबंधों का पालन करते हुए रूसी तेल खरीद बंद कर दी थी, इसलिए उन्हें अच्छा साझेदार मानते हुए यह छूट दी गई।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह रूसी तेल पहले से समुद्र में लद चुका था, जिससे मॉस्को को कोई बड़ा आर्थिक लाभ नहीं होगा। यह 30 दिनों की अस्थायी छूट 5 मार्च से 4 अप्रैल 2026 तक लागू है और केवल भारत पहुंचने वाले उन जहाजों पर है जो 5 मार्च से पहले लदे थे।

अमेरिकी अधिकारियों के बयान

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने फॉक्स बिजनेस को दिए इंटरव्यू में कहा कि भारत ने  कुछ समय पहले प्रतिबंधित रूसी तेल की खरीद रोक दी थी और अमेरिकी तेल लेने को तैयार था, लेकिन वैश्विक कमी को देखते हुए यह इजाजत दी गई। बेसेंट ने भारत को "अच्छा साझेदार" करार दिया और कहा कि जरूरत पड़ने पर अन्य रूसी तेल पर भी प्रतिबंध हटाए जा सकते हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ट्रेजरी विभाग ने इस फैसले को मंजूरी दी है।

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पहले के प्रतिबंध और टैरिफ

पहले अमेरिका ने यूक्रेन युद्ध में रूस की मदद का आरोप लगाते हुए भारत पर 25% रेसिप्रोकल टैरिफ और 25% जुर्माना लगाया था, जिससे भारत से आयात पर कुल 50% टैरिफ लग रहा था। हालिया व्यापार समझौते और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के ट्रंप के टैरिफ को असंवैधानिक ठहराने के बाद ये हटा लिए गए। भारत ने रूसी तेल बंद करने और अमेरिकी ऊर्जा खरीदने का वादा किया था।

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क्या है भारत का रुख?

भारत की तरफ से कहा गया है कि वह किसी देश की इजाजत पर निर्भर नहीं है। भारत ने स्पष्ट किया कि 1.4 अरब आबादी की ऊर्जा जरूरतों को प्राथमिकता देना जारी रखेगी। भारत अपनी कच्चे तेल जरूरत का लगभग 88.6% आयात करता है, जो वित्त वर्ष 2026 में और बढ़ सकता है।

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Published By : Ankur Shrivastava

पब्लिश्ड 11 March 2026 at 08:15 IST